Monday, June 2, 2014

एक गैंगरेप की खबर आती है तो उसके तुरत बाद वैसी ख़बरों की बाढ़ आ जाती है. लेकिन मीडिया में जैसे ही कोई दूसरा मुद्दा हावी होता है तो ये ख़बरें गायब हो जाती हैं


कई बार से देख रहा हूँ कि एक गैंगरेप की खबर आती है तो उसके तुरत बाद वैसी ख़बरों की बाढ़ आ जाती है. लेकिन मीडिया में जैसे ही कोई दूसरा मुद्दा हावी होता है तो ये ख़बरें गायब हो जाती हैं. असल में बलात्कार और यौन उत्पीडन की घटनाएँ इस देश के हर कोने में लगातार जारी रहती हैं, पर हमेशा मीडिया उन्हें सुर्खियाँ नहीं बनाता. जितनी घटनाएँ वास्तव में लगातार हो रही हैं, अगर सबको सामने ला दिया जाए तो हमारे समाज की और भी वीभत्स और चिंताजनक तस्वीर सामने आयेगी. सिर्फ कुछ हृदयविदारक घटनाओं की मीडिया में सुर्ख़ियां बनने के बाद ही संवेदित होने से काम नहीं चलने वाला है. लिंग, जाति, सम्प्रदाय और वर्ग के स्तर पर मौजूद उत्पीडन, भेदभाव और बर्बरता को खत्म करने के लिए निरंतर जुझारू सामाजिक-सांस्कृतिक और राजनीतिक आन्दोलन चलाने की जरूरत है. इस सामाजिक-सांस्कृतिक ढांचे को हरसंभव तरीके से बदलना ही होगा.

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