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Monday, May 23, 2011

Fwd: भाषा,शिक्षा और रोज़गार



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From: भाषा,शिक्षा और रोज़गार <eduployment@gmail.com>
Date: 2011/5/23
Subject: भाषा,शिक्षा और रोज़गार
To: palashbiswaskl@gmail.com


भाषा,शिक्षा और रोज़गार


इन्द्रप्रस्थ विविःबीएड प्रवेश परीक्षा के सवालों ने किया हैरान

Posted: 22 May 2011 08:29 AM PDT

व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के माध्यम से उम्दा प्रोफेशनल तैयार करने वाले गुरु गोविंद सिंह इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (आईपीयू) की कथित लापरवाही शनिवार को उन छात्र-छात्राओं के लिए परेशानी का सबब बन गई जो बीएड में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा देने पहुंचे थे। राजधानी के विभिन्न 10 केन्द्रों पर आयोजित इस प्रवेश परीक्षा में पूछे गए सवालों को लेकर छात्रों में भारी भ्रम रहा, उन्हें समझ ही नहीं आ रहा था कि आखिर सवाल सही हैं या गलत। नतीजतन, कुछ केन्द्रों पर परीक्षार्थियों ने विरोध दर्ज कराया तो कुछ ने स्वविवेक से जवाब दिया। हालांकि, इस मुद्दे पर विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि गलत सवाल के चलते किसी भी छात्र का नम्बर नहीं काटा जाएगा, लेकिन यदि सवाल जटिल है और छात्र के विवेक को जांचने के लिए पूछा गया है तो फिर कोई राहत नहीं दी जाएगी।



कालका पब्लिक स्कूल, अलकनंदा पर प्रवेश परीक्षा के लिए पहुंचीं यामिनी ने बताया कि बीएड की प्रवेश परीक्षा का आयोजन दोपहर दो बजे से साढ़े चार बजे के बीच किया गया। इस दौरान कई सवालों को लेकर परीक्षा केन्द्र पर भ्रम की स्थिति बनी और परीक्षार्थी परेशान दिखे। यामिनी के मुताबिक एक सवाल में सही जवाब के तीन विकल्प थे जबकि दो अलग-अलग सवालों को एक ही नम्बर के साथ पेश किया, जिसके चलते परीक्षार्थी बगले झांकते नजर आएं। इसी तरह, एक अन्य छात्रा सुषमा ने बताया कि एक सवाल के दो सही जवाब दिए गए थे, इसलिए काफी देर तक सोच-विचार के बाद मैंने दोनों ही जवाब लिख दिए। सुषमा ने बताया कि छात्र इन सवालों को लेकर इसलिए ज्यादा परेशान थे, क्योंकि परीक्षाथिर्यों के समक्ष हर गलत जवाब के लिए नेगेटिव मार्किग थी। 

विश्वविद्यालय की ओर से प्रवेश परीक्षा का आयोजन की जिम्मेदारी सम्भाल रहे अस्टिेंट रजिस्ट्रार एडी लाम्बा ने बताया कि करीब 24 सौ सीटों के लिए दिल्लीभर 10 केन्द्रों करीब सात हजार परीक्षार्थियों ने यह परीक्षा दी। उन्होंने बताया कि एक-दो सवालों को लेकर शिकायत आई है, जिनकी पड़ताल की जाएगी और यदि उनकी परेशानी जायज होगी तो उन्हें राहत दी जाएगी। राहत में या तो सभी परीक्षार्थी को गलत सवाल के नम्बर दे दिए जाएंगे या फिर उसे रद्द ही कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि कुछ सवाल जानबूझकर घुमा-फिराकर व जटिल बनाकर पेश किए जाते हैं। ऐसे सवालों में विश्वविद्यालय परीक्षार्थी के विवेक का मूल्यांकन करता है और यदि ऐसे सवालों को लेकर किसी तरह की शिकायत होगी तो उस पर विचार नहीं किया जाएगा(दैनिक भास्कर,दिल्ली,22.5.11)।

बिहारःन्यायिक सेवा परीक्षा में अंग्रेजी अनिवार्य

Posted: 22 May 2011 08:26 AM PDT

राज्य स्तरीय न्यायिक सेवा की परीक्षा में अंग्रेजी विषय को अनिवार्य कर दिया गया है। बिहार लोक सेवा आयोग की ओर से ली जा रही 27वीं न्यायिक सेवा की मुख्य परीक्षा में अनिवार्य विषय के रूप में सामान्य अंग्रेजी को रखा गया है।

इसके पहले अनिवार्य विषय के रूप में केवल हिंदी विषय की परीक्षा ली जा रही थी। पहली बार हिंदी विषय के साथ-साथ सामान्य अंग्रेजी को अनिवार्य विषय के रूप में लागू किया गया है। परीक्षार्थी को इन दोनों विषयों में पास करना अनिवार्य है।

सामान्य अंग्रेजी का पेपर 100 अंकों का होगा। पास मार्क्‍स 30 अंक होगा। जो परीक्षार्थी अंग्रेजी में पास करेंगे। उन्हीं का मुख्य परीक्षा का परिणाम घोषित होगा।


आयोग ने एक विज्ञापन के जरिए अंग्रेजी विषय के लिए सिलेबस जारी कर दिया है। 27वीं न्यायिक सेवा की लिखित प्रतियोगिता परीक्षा में परीक्षार्थियों की अंग्रेजी विषय की सामान्य समझ और लेखन की क्षमता का आकलन किया जाएगा।

इस बार मुख्य परीक्षा में लगभग 1752 परीक्षार्थी शामिल होंगे। ज्ञात हो कि न्यायिक सेवा की पीटी परीक्षा के रिजल्ट का मामला कोर्ट में विचाराधीन था।
(दैनिक भास्कर,पटना,22.5.11)।

राजस्थानःबीएड में कम हुए 28 हजार आवेदक

Posted: 22 May 2011 08:19 AM PDT

शिक्षक बनने का सपना देखने वालों के लिए इस बार बीएड करना आसान रहेगा। पहली बार पिछली बार की तुलना में अप्रत्याशित रूप से पीटीईटी के लिए 28 हजार कम आवेदन आए हैं। इस बार पीटीईटी देने वाले छात्रों की संख्या करीब डेढ़ लाख है, जबकि 90 हजार सीटें उपलब्ध हैं।

पिछली बार काउंसलिंग में देरी के चलते कॉलेजों में 12 हजार सीटें खाली रह गई थीं। पीटीईटी के माध्यम से राज्य के 700 बीएड कॉलेजों में प्रवेश होने हैं। शिक्षाविदों के अनुसार सरकारी सेवा के लिए नियमित रिक्तियां नहीं निकलने के कारण इस बार छात्रों का रुझान अपेक्षाकृत कम हुआ है। यह सिलसिला अगले एक-दो साल तक बैकलॉग पूरा होने तक बना रह सकता है। इसके अलावा शिक्षा विभाग में कॉमर्स के लिए काफी कम नियुक्तियां निकलने के कारण भी इस संकाय के छात्रों की दिलचस्पी कम हुई है।

स्नातक में 50 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता और बीएड करने के बावजूद टैट जैसी परीक्षाओं के प्रावधान का भी काफी हद तक इस पर असर पड़ा है। शिक्षा महाविद्यालय परिषद के महासचिव एल.सी. भारतीय का कहना है कि बीएड के प्रति रुझान बनाए रखने के लिए राज्य सरकार को टैट जैसी परीक्षाओं पर एक बार फिर चिंतन करना चाहिए। पीटीईटी के समन्वयक प्रो. ए.के. मलिक बताते हैं कि इस बार करीब डेढ़ लाख आवेदन आए हैं। बच्चों के लिए प्रवेश अपेक्षाकृत आसान रहेंगे। मलिक का कहना है कि कलेक्शन सेंटरों से डाटा एकत्र करने के बाद अधिकृत रूप से वास्तविक डाटा एक-दो दिन में जारी कर दिया जाएगा।


नियमित प्रवेश प्रक्रिया नहीं होने का खमियाजा: पिछले कुछ साल से राज्य सरकार बीएड प्रवेश प्रक्रिया को ही नियमित नहीं कर सकी है। स्थिति यह है कि काउंसलिंग का सिलसिला दिसंबर अंत तक थमता नहीं है। कई छात्रों की मानसिकता यहीं से बदलनी शुरू हो जाती है और वे स्नातक के बाद या तो दूसरे कोर्स की ओर रुख कर लेते हैं या फिर बाहरी विश्वविद्यालयों से डिग्री लेने का रास्ता चुन लेते हैं। इसके अलावा प्रदेश में करीब 9 लाख बीएड बेरोजगार सरकारी नौकरी का इंतजार कर रहे हैं।
(दैनिक भास्कर,जयपुर,22.5.11)
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