मकसद आर्थिक सुधार के मसले पर विपक्ष और घटक दलों पर बाहरी दबाव बनाना है। विदेशी पूंजी किसे नहीं चाहिए और वाशिंगटन से किसके तार नहीं जुड़े हैं?
मुंबई से एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास
कौशिक बसु भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार हैं। कोई ऐरा गैरा नत्थू खैरा नहीं। उन्होंने जो कुछ कहा , उसका मकसद आर्थिक सुधार के मसले पर विपक्ष और घटक दलों पर बाहरी दबाव बनाना है। विदेशी पूंजी किसे नहीं चाहिए और वाशिंगटन से किसके तार नहीं जुड़े हैं? कौशिक बसु और प्रणव मुखर्जी की शास्त्रीय युगलबंदी कोई कलाप्रेमियों को रिझाने के लिए नहीं है। यह कवायद बाहरी दबाव के जरिये घरेलू राजनीतिक बाध्यताओं को निपटाने की बैहद कारगर रणनीति है। बाजार और कारपोरेट इंडिया इस खेल को बखूबी समझ रहा है, जिन्हें वे वाशिंगटन से संबोधित कर रहे हैं।अब डीजल कीमतों पर नियंत्रण खत्म करने की बात करके बसु ने फिर नया ताल दिया है, इसपर जरूर वित्तमंत्री के हाथ पांव थिरकेंगे। आप मंच पर निगाहें जमाये तो रखिये!सरकार अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिश कर रही है। उसे निवेशकों के मन में यह भरोसा पैदा करना चाहिए कि देश में निवेश के अनुकूल और इसमें आने वाली बाधाओं को दूर करने का वातावरण है। आयकर संशोधनों से कारपोरेच इंडिया के लिए पहाड़ टूट पड़ा है और विदेशी निवेशकों की आस्था संकट में है, मीडिया लगातार इसी पर चर्चा कर रहा है। पर डीटीसी, जीएसटी और आयकर संशोधनों से भारत के नागरिकों और खासकर नौकरी पेशा लोगों के ऊपर क्या असर पड़ेगा, इसकी कोई
चर्चा नहीं हो रही है। बसु और प्रणव ने चालाकी से विपक्ष को और घटक दलों को भी लपेट लिया है , जिनकी राज्यों में सरकारें है और विकास कार्यों के लिए जिन्हें विदेशी पूंजी की सखत्त दरकार है। आपको याद होगा कि पहली यूपीए सरकार के समर्थकों में शामिल माकपा के मुख्यमंत्री दिवंगत ज्योति बसु और फिर बुद्धदेव की अगुवाई में कैसे केंद्र की आर्थिक नीतियों का किस बेशर्मी से अनुमोदन किया और भारत अमेरिका परमाणु संधि के खिलाफ समर्थ न तब जाकर वापस लिया, जब इसे रोकने की कोई सूरत नहीं बची थी। विचारधारा और जनता के प्रति प्रतिबद्धता की बस यही कहानी है जो फिर दहाड़ों और हुंकारों के मध्य दोहरायी जानी है।भले ही उद्योग जगत में यूपीए सरकार की छवि नीतिगत अपंगता वाली सरकार की बन रही हो, वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने इसे एक सिरे से खारिज करते हुए कहा कि गठबंधन उंची आर्थिक वृद्धि दर हासिल करने को तैयार है।
सरकार के भीतर और बाहर से आलोचनाओं व आर्थिक सुधारों की गति थमने को लेकर मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु की विवादास्पद टिप्पणियों को नजरअंदाज करते हुए मुखर्जी ने अर्थव्यवस्था में अपनी प्राथमिकताओं पर भरोसा जताया।वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने बस इतना कहा कि वह 'गार' में कुछ सुरक्षा उपायों की व्यवस्था कर सकते हैं, लेकिन उन्होंने पिछली तारीख से किए जाने वाले संशोधन पर अपने रुख से नहीं हटने के संकेत दिए।
जानकारी मिली है कि जीएएआर से परेशान विदेशी निवेशकों को राहत मिल सकती है।सूत्रों के मुताबिक एफआईआई पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस टैक्स हट सकता है। एफआईआई सरकार पर टैक्स हटाने के लिए दबाव बना रहे हैं।माना जा रहा है कि सरकार विदेशी निवेशकों को रोकने के लिए शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस टैक्स हटा सकती है। हालांकि, सिक्योरिटीज ट्रांसजैक्शन टैक्स में मामूली बढ़ोतरी की जा सकती है।7 मई फाइनेंस बिल के जवाब में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी शॉर्ट टर्म एफआईआई पर से कैपिटल गेंस टैक्स हटाने का ऐलान कर सकते हैं।
वित्त मंत्री ने कहा, ' सरकार में नीतिगत अपंगता का कोई सवाल ही नहीं उठता। मैं उनसे सहमत नहीं हूं।' निर्णयों की कमी के बारे में आलोचनाओं का जवाब देते हुए मुखर्जी ने कहा कि सरकार ने हाल के महीनों में कई नीतिगत निर्णय किए हैं।उन्होंने कहा, ' हमने एक नयी विनिर्माण नीति बनाई है। इससे पहले हमने घोषणा की कि हम ढांचागत ऋण कोष का गठन करेंगे। हमने ढांचागत ऋण कोष का गठन किया।' वित्त मंत्री यहां आईएमएफ और विश्व बैंक की वार्षिक बैठक में हिस्सा लेने आए हैं।
मुखर्जी ने कहा, ' हमने घोषणा की कि हम वाणिज्यिक ऋण तक पहुंच आसान करेंगे। इस दिशा में कई कदम उठाए गए हैं। इसलिए मैं तथाकथित नीतिगत अपंगता के उनके नजरिए से सहमत नहीं हूं। सरकार में कोई नीतिगत अपंगता नहीं है।'
इस बीच अपने पुराने बयानों से उलट बसु ने बता दिया है कि अगले छह महीने में बड़े सुधार होंगे। कैसे सुधार होंगे, यह संकेत भी उन्होंने दे दिये हैं। सरकार के फैसले लेने की क्षमता पर सवाल उठा चुके मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने संकेत दिए हैं कि अगले छह महीने में डीजल पर सब्सिडी कम की जा सकती है।कारपोरेट इंडिया तो यहीमांग चीख चीखकर दोपहा रहा है। इसपर वामपंथियों या दक्षमपंथियों की क्या राय है, इससे कुछ होने जानेवाला नहीं है। बाजार को नियंत्रमुक्त करने का संदेश है यह।बहरहाल कौशिक बसु के संकेत का मतलब है कि डीजल महंगा हो सकता है ।कौशिक बसु ने पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ाये जाने के संकेत देते हुये कहा कि डीजल पर आंशिक नियंत्रण पूरी तरह से संभव है। ऐसे में सरकार को इसके लिए दी जा रही सब्सिडी को कम करना चाहिए। कौशिक बसु के इस बयान के निहितार्थ यही निकाले जा रहे हैं कि लोगों को जल्दी ही पेट्रोल-डीजल की बढ़ी हुई कीमतों का सामना करने के लिये तैयार हो जाना चाहिये। कौशिक ने इसका रास्ता भी सुझा दिया है।उनका कहना है कि डीजल पर आंशिक नियंत्रण हो। यानी डीजल पर सब्सिडी तो हो लेकिन बहुत कम, जिससे लोगों पर महंगाई का ज्यादा असर न हो और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अगर तेल के दाम बढ़ें तो उसका असर भी दिखाई दे।कौशिक बसु को अब लगता है कि अगले छह महीनों में देश में 'कुछ महत्वपूर्ण सुधार' देखने को मिलेंगे। इन सुधारों में सब्सिडी कम करने, डीजल को आंशिक तौर पर नियंत्रणमुक्त करने व खुदरा क्षेत्र में एफडीआई को अनुमति देने जैसे शामिल हो सकते हैं। हालांकि, उन्हें लगता है कि 'सबसे बड़ा सुधार' जीएसटी (वस्तु व सेवा कर) लागू करना कुछ कठिन हो सकता है।क्योंकि इस पर कोई आम सहमति नहीं बन पा रही है।अब तो समझिये कि आखिर वाशिंगटन में विपक्ष और घटक दलों को आर्थिक सुधारों में ढिलाई के लिए रगड़ने की रणनीति क्या है मसलन ममता को केंद्र से मदद चाहिए और पुराने कर्ज पर तीन सालों तक ब्याज न देने की मोहलत भी। वे विदेसी पूंजी के दबाव का कैसे सामना करेंगी?बीते बुधवार को बसु ने अमेरिका में एक अध्ययन संस्थान में अपने व्याख्यान के दौरान यह कह कर राजनीतिक गलियारे में खलबली मचा दी थी किदेश में आर्थिक सुधारों का पहिया राजनीति के दलदल में फंसा है।वाशिंगटन में आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक की वार्षिक बैठक में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के साथ गए कौशिक बसु ने कहा कि 2014 के आम चुनावों के पहले देश में आर्थिक सुधारों की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की संभावना नहींहै।उनके इस बयान की देशभर में भारी आलोचना हो रही है।
बसु ने कहा, 'मुझे उम्मीद है कि जो सुधार होंगे उनमें एक सब्सिडी संबंधी सुधार है। वित्ता मंत्री अपने बजट में इस बारे में चर्चा कर चुके हैं। हम विशिष्ट पहचान संख्या [यूआइडी] प्रणाली का इस्तेमाल करने की कोशिश करेंगे, जिससे सब्सिडी का लीकेज बंद हो।'' इससे राजकोषीय घाटे में कमी लाने में मदद मिलेगी। इसलिए यह एक बहुत महत्वपूर्ण सुधार है। मल्टी ब्रांड रिटेल में एफडीआइ को लेकर शत-प्रतिशत आश्वस्त नहीं हो सकते, लेकिन इसके अंजाम तक पहुंचने की बहुत संभावना है। यह भारतीय किसानों व छोटे उत्पादकों के लिए एक बड़ा वरदान हो सकता है। इससे निवेशकों का भरोसा भी बढ़ेगा। डीजल को नियंत्रण मुक्त करना राजनीतिक तौर पर अधिक मुश्किल है। 'आदर्श रूप से हमें यह करना चाहिए कि प्रति लीटर पर एक छोटी सब्सिडी तय की जाए। यह आशिक तौर पर उपभोक्ताओं को राहत देती रहेगी और ग्लोबल कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भारत में दिखाई देगा।'
बाजार में जोश कम होता नजर आ रहा है और सेंसेक्स-निफ्टी में हल्की तेजी बाकी रह गई है।यूरोपीय बाजारों में आई भारी गिरावट की वजह से घरेलू बाजारों में भी घबराहट छाई। सेंसेक्स 277 अंक गिरकर 17097 और निफ्टी 90 अंक गिरकर 5201 पर बंद हुए।यूरोपीय बाजारों की कमजोर शुरुआत ने घरेलू बाजारों का मूड खराब किया। फ्रांस के खराब आर्थिक आंकड़ों की वजह से यूरोपीय बाजार में गिरावट आई। इसके अलावा यूरोजोन के कर्ज संकट को लेकर भी बाजार में चिंता बढ़ी हैं।फ्रांस की मार्च कंपोजिट पीएमआई 48.7 रही है, जो 6 महीनों में सबसे कम है। यूरोपीय बाजारों में गिरावट बढ़ने के साथ-साथ घरेलू बाजार भी लुढ़कते चले गए। सेंसेक्स 310 अंक टूटा और निफ्टी 5200 के नीचे गिर गया।रियल्टी, तकनीकी, आईटी, मेटल, कैपिटल गुड्स शेयर 3 फीसदी टूटे। पावर, बैंक, ऑटो, पीएसयू, एफएमसीजी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 2.5-1 फीसदी गिरे। हेल्थकेयर शेयरों में 0.5 फीसदी की कमजोरी आई। ऑयल एंड गैस शेयर भी फिसले।
वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु ने मनमोहन सिंह के कुनबे की खामियां उजागर करने के साथ ही 2014 के बाद ही आर्थिक सुधार होने का बयान देकर संप्रग सरकार को हिला दिया है,जो अपने सहयोगियों की वजह से पहले ही नीतिगत अनिर्णय की शिकार है। ऐन संसद सत्र से पहले सरकार के इतने बडे़ अधिकारी की अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्वीकारोक्ति व विपक्षी आलोचनाओं से सांसत में आई सरकार और कांग्रेस बसु के बयान की काट और तरीका ढूढ़ने में जूझती रही। सरकार ने सफाई दी तो कांग्रेस ने कहा, देश में नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। वहीं, नुकसान की भरपाई के लिए बसु खुद सामने आए और कहा, बयान सरकार की सोच नहीं उनका व्यक्तिगत विचार है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बसु के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, हालांकि हमारे सामने मुश्किलें हैं, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ हम इनसे पार पा लेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री वी. नारायणसामी ने नीतिगत अनिर्णय के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा, मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए सरकार देश के विकास के सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रही है।
यूपीए-2 के पिछले तीन साल के कार्यकाल में आर्थिक सुधार से जुड़ा उसका हर बड़ा फैसला उसके सहयोगी दलों की वजह से रोकना पड़ा। चाहे वह रिटेल और बीमा क्षेत्र में एफडीआई हो या भूमि अधिग्रहण कानून और पर्यावरण व वन मंजूरी जैसे मुद्दे, सभी फैसलों से उसे कदम वापस खींचने पड़े। इसीलिए, कौशिक बसु के बयान के बाद सरकार अपने कामकाज गिनाकर बस नीतिगत पंगुता के आरोप को गलत साबित करने की कोशिश करती है। वहीं, सरकार की परेशानी को कम करने के लिए मैदान में उतरे कौशिश बसु ने कहा, भारत में लोगों को अपनी राय रखने की आजादी है। वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार के रूप में कारनेगी सम्मेलन में मैंने अपने विचार व्यक्त किए थे, जिनसे वित्त मंत्रालय या भारत सरकार का सहमत होना जरूरी नहीं है। उन्होंने कहा, मेरे दिए गए बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। बसु ने कहा, आर्थिक सुधारों का जिक्र 2014 में संभावित यूरोप के आर्थिक संकट को ध्यान में रखते हुए दिया था। उन्होंने कहा, 2014 से यूरोपीय बैंकों को यूरोप के केंद्रीय बैंक को 1.3 खरब डालर की देनदारी का भुगतान शुरू करना है। उनका मानना है कि यह यूरोप में 2008 और 2011 के बाद तीसरे दौर के आर्थिक संकट की शुरूआत हो सकती है। चूंकि इस दौरान धीमी रफ्तार के बावजूद भारत की आर्थिक विकास दर 6.9 प्रतिशत रही है, 2014 के आर्थिक संकट के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से उभरेगी।
Monday, April 23, 2012
मकसद आर्थिक सुधार के मसले पर विपक्ष और घटक दलों पर बाहरी दबाव बनाना है। विदेशी पूंजी किसे नहीं चाहिए और वाशिंगटन से किसके तार नहीं जुड़े हैं?
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
Followers
Blog Archive
-
▼
2012
(6784)
-
▼
April
(829)
- देखना होगा कि ऐसे कटघरे कहाँ-कहाँ हैं?
- शेखर जोशी की अद्भुत प्रेम कहानी कोसी का घटवार
- टू जी स्पेक्ट्रम की नीलामी सरकार के लिए गले की फां...
- Fwd: Hindimedia सिनेमा में साम्राज्यवाद विरोध का क...
- Fwd: [initiative-india] On this May Day / इस मजदूर...
- Fwd: Prabhat Ranjan shared a link: "वरिष्ठ पत्रकार...
- Aadhaar card fraud exposes registration process er...
- Madhu Limaye's 90th birthday celebrations & book r...
- EWS Admissions - Unaided Minority Schools exempted...
- Report of Convention Against Bathani Tola Aquittal...
- MUSLIM VISION- 37 Muslim specific Rural developmen...
- উচেছদ- প্রতিবাদে আবার সরব নোনাডাঙা
- উত্তপ্ত নোনাডাঙা, লাঠিচার্জ পুলিসের
- রবীন্দ্রনাথের `চার-অধ্যায়` আজকের গল্প জানালেন পরিচালক
- রাষ্ট্রপতি পদে সমর্থন নয় প্রণব-আনসারিকে, ঘোষণা বিজ...
- जश्न की सूरत और सीरत
- साइबर अपराध से निपटने के लिए क्षमता बढ़ाने की जरूरत...
- राहुल ने कार्यकर्ताओं को निराशा से उठकर लोकसभा चुन...
- .अब सचिन, ऐश्वर्या के बाद ‘अखिलेश आम’ की बारी
- बेटी की हत्या के मामले में सलाखों के पीछे पहुंची न...
- ये भी मादरे हिंद की बेटी हैं...
- आईला ! नो राजनीति
- भूतेर भविष्यत् देखी क्या !
- मिलावट की गारंटी देते दुकानदार
- मजदूर वर्ग की नयी एकजुटता के लिए पहल करो !!
- अन्ना हजारे का मनोविज्ञान ——- एक ‘खारिज’ बूढ़े की त...
- आज फासिज्म की पराजय और जनता की विजय का महादिवस है -
- सब तो ठीक है, पर आप खुद क्या कर रहे हैं चेनॉय सेठ?
- हरिश्चंद्र की भूमिका मेरे रचनात्मक जीवन की उपलब्...
- प्लीज प्लीज … विकी डोनर अब तक नहीं देखी तो देख आइए!
- भूत के भविष्य में वर्तमान की नियति!
- Fwd: हस्तक्षेप.कॉम बोफोर्स दलाली कांड सच्चाई है और...
- शाह आलम बनें अमिताभ और रेखा बन जाये समरु बेगम!
- Fwd: 5 मई को लॉन्च होगा हिमाचल दस्तक, एनसीआर से एक...
- ppeal to raise NIBBUSS issues in the Houses of Par...
- 1 lakh seek justice for Manipur youth
- Mamata’s best day in office - Crackdown on trio wh...
- संकट यह विकराल है, कहां बैठे डबराल हैं! [ #Anantar ]
- हाशिया खींचना ठीक नहीं
- प्रेमचंद: अपने अपने राम
- असल दोषी कौन
- खेल नहीं तमाशा
- ‘एक रैंक एक पेंशन’ सिद्धांत पर सहमत है केंद्र
- राष्ट्रपति चुनाव को लेकर करूणानिधि से मिले एंटनी, ...
- हमने उन्हें जासूस समझा था… लेखक : अरुण कुकसाल :: अ...
- शराब को इस नजरिये से भी देखिये लेखक : शंम्भू राणा ...
- हमने तो ढोर डंगरों से अंग्रेजी सीखी! (09:21:05 PM)...
- स्टिंग, सीडी, साज़िश, सज़ा और सियासत
- शिक्षा अधिकार कानून के समझ मुश्किल भरी चुनौतियां
- अधिकारियों ने समाज कल्याण विभाग के १४१६ लाख रुपयो...
- सिनेमा में साम्राज्यवाद विरोध का कारपोरेट तात्पर्य!
- अपने रचे हुए को अपने भीतर जीते भी थे विद्यासागर नौ...
- ‘टाइम’ से नहीं लगाया जा सकता राजनेता की लोकप्रियता...
- सैंया भये कोतवाल
- बोफोर्स दलाली कांड सच्चाई है और बंगारू घूसकांड निर...
- ‘भारत माता रोती जाती निकल हजारों कोस गया’
- सिनेमा में साम्राज्यवाद विरोध का कारपोरेट तात्पर्य!
- Fwd: Prabhat Ranjan shared a link: "आज 'जनसत्ता' क...
- Fwd: वे जो कलक्टर नहीं बन सके
- Fwd: [Dalit Diary] http://www.dailypioneer.com/sun...
- वाशिंगटन से फिर सुधार मुहिम तेज करने के संकेत,अब द...
- Fwd: हस्तक्षेप.कॉम ये भी तो मादरे हिंद की बेटी है!
- Fwd: Prabhat Ranjan updated his status: "'शेखर: एक...
- Fwd: [Young india] Police lathi-charged and lobbed...
- Fwd: [11 मई 2012 को प्रोन्नति एवं ठेकेदारी में आरक...
- NAPM Demands Withdrawal of vindictive cases agains...
- High Court Bench restrains police from arresting l...
- The Spectre Of Fascism By Rohini Hensman
- MAHARASHTRA RTI RULES AMENDMENT passed by Assembly...
- More than one involved in Aadhaar scam: Cops
- Bill extends time limit for quota to SC/ST, OBCs i...
- Minister’s job at Writers’: Tell ‘what kind of wom...
- NGOs for clause exemption - Meghalaya groups conti...
- Fwd: UPDATE - harassment of one tribal man & his m...
- Bangaru Laxman sentenced to 4 years in jail for ac...
- बंगारू लक्ष्मण को चार साल की जेल
- रुश्दी की किताबों को पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने ...
- भ्रष्टाचार से कौन डरता है
- रामदेव ने किया आंदोलन के तीसरे चरण का ऐलान
- पदोन्नति में आरक्षण नहीं: सुप्रीम कोर्ट
- पेट्रोलियम पदार्थों के दाम तर्कसंगत बनाने की जरुरत...
- डीएम की रिहाई के लिये मध्यस्थ पहुंचे जंगल
- फेसबुक का तोड़ भी आया इंटरनेट पर
- बाहरी दबाव का खेल, भाजपा कांग्रेस का मेल! आपकी बात...
- आतंकवाद के नाम हौव्वा खड़ा करके मुस्लिमों को बदना...
- सचिन को मोहरा बनाकर मुद्दों से ध्यान भटकाना चाहती...
- काश मैं बैठक की रिकॉर्डिंग कर लेता तो पूरा देश टीम...
- इस गांव की बेटियां बिकने के लिए मुंबई भेज दी जाती हैं
- अलेकेपन और धर्म का दंश : मेघा उर्फ महजबीं की दर्दन...
- Fwd: Prabhat Ranjan shared a link: "मूलतः डॉक्टर र...
- Fwd: Inauguration of Bhagwan Parshuram Community C...
- What if Parliamentary Panels report that castigate...
- Fwd: हस्तक्षेप.कॉम भारत विभाजन के अपराधी
- गार के दांत तोड़ने की पूरी तैयारी!
- Fwd: Hindimedia
- Fwd: Today's Exclusives - Pratibha Patil gives up ...
- ‘Biometrics are not as perfect as some politicians...
- Case under SC/ST Act against Amity staff-
- Dalit body wants sops for sweepers
- मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नाम नंदीग्राम डायरी के ...
-
▼
April
(829)

No comments:
Post a Comment