Twitter

Follow palashbiswaskl on Twitter

Tuesday, July 13, 2010

Fwd: [Hindi IWP] प्यासी होती सभ्यता



---------- Forwarded message ----------
From: Hindi Water portal <hindi@lists.indiawaterportal.org>
Date: 2010/7/13
Subject: [Hindi IWP] प्यासी होती सभ्यता
To: Hindimedia@lists.indiawaterportal.org, hindi@lists.indiawaterportal.org


करोड़ों के तालाब खुदे, पानी का अता पता नहीं

Source: 
July 07, 2010, नई दिल्ली, अमर उजाला
अमर उजाला टीम के व्यापक सर्वे में यह पाया गया है कि तालाब तो काफी खुदे पर उनमें पानी नहीं है। तालाब का काम एक सामान्य समझ की जरूरत मांगता है कि तालाब तो खुदे पर उसमें पानी कहां से आएगा उसका रास्ता भी देखना होगा। सामान्यतः जो तालाब मनरेगा में खुदे हैं, उनमें कैचमेंन्ट का ध्यान रखा नहीं गया है। उससे हो यह रहा है कि तालाब रीते पड़े हैं। 

केंद्र सरकार की राष्ट्रीय सलाहकार परिषद 'मनरेगा' जैसी महत्वाकांक्षी योजना को दूसरे चरण में शहरों में भी लागू करने के लिए बेताब दिख रही है, लेकिन इसके पहले चरण में जिस तरीके से काम हो रहा है उससे गांवों की दशा में बड़े बदलाव की उम्मीद बेमानी ही लगती है। करोड़ों रुपये के खर्च से सैकड़ों पोखरे एवं तालाब खुदे लेकिन उसमें पानी भरने के लिए महीनों से बरसात का इंतजार हो रहा था। कारण कि पानी भरने का बजट मनरेगा में है ही नहीं। सड़कें बनीं, पर गरीबों के रास्ते अब भी कच्चे हैं। उत्तर प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू के कई जिलों में मनरेगा के कामों की पड़ताल में यही हकीकत सामने आई है। मजदूरों की अहमियत जरूर बढ़ी है, अब दूसरी जगह भी उन्हें डेढ़ सौ रुपये तक मजदूरी मिल जाती है।



"अगले सौ वर्षों में धरती से मनुष्यों का सफाया हो जाएगा।" ये शब्द आस्ट्रेलियन नेशनल युनिवर्सिटी के प्रोफेसर फ्रैंक फैनर के हैं। उनका कहना है कि 'जनसंख्या विस्फोट और प्राकृतिक संसाधनों के बेतहाशा इस्तेमाल की वजह से इन्सानी नस्ल खत्म हो जाएगी। साथ ही कई और प्रजातियाँ भी नहीं रहेंगी। यह स्थिति आइस-एज या किसी भयानक उल्का पिंड के धरती से टकराने के बाद की स्थिति जैसी होगी।' फ्रैंक कहते हैं कि विनाश की ओर बढ़ती धरती की परिस्थितियों को पलटा नहीं जा सकता। पर मैं ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहता क्योंकि कई लोग हालात में सुधार की कोशिश कर रहे हैं। पर मुझे लगता है कि अब काफी देर हो चुकी है।

धीरे-धीरे धरती से बहुत सारे जीव-जन्तु विदा हो गए। दुनिया से विलुप्त प्राणियों की 'रेड लिस्ट' लगातार लम्बी होती जा रही है। इन्सानी फितरत और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन ने हजारों जीव प्रजातियों और पादप प्रजातियों को हमारे आस-पास से खत्म कर दिया है। औद्योगिक खेती और शहरी-ग्रामीण विकास में वनों के विनाश ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अकेले भारत में ही लगभग 1336 पादप प्रजातियां असुरक्षित और संकट की स्थिति में मानी गई हैं।

रेणुका बांध से दिल्ली द्वारा पानी की मांग कितनी जायज?

प्रस्तावित रेणुका बांधदिल्ली सरकार हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में 148 मीटर ऊंचे विवादास्पद बांध को बढ़ावा दे रही है एवं वित्तपोषण कर रही है। यमुना नदी की सहायक गिरी नदी पर यह बांध मूलतः दिल्ली में जल आपूर्ति के लिए बनने वाला है। रुपये 3900 करोड़ (सन 2006 के कीमत स्तर पर) की लागत से बनने वाले इस बांध के लिए 90 फीसदी वित्तपोषण केन्द्र सरकार द्वारा मिलने वाले रकम से किया जाना है। वास्तव में, दिल्ली सरकार रेणुका बांध से संबंधित भूमि अधिग्रहण एवं विस्थापन के लिए हिमाचल प्रदेश पॉवर कारपोरेशन लिमिटेड (एचपीपीसीएल) को रुपये 215 करोड़ पहले ही दे चुकी है, जिससे दिल्ली सरकार 9 गैर 

मानसून पर विशेष
--
Minakshi Arora
Chairperson-Water Community India
hindi.indiawaterportal.org
Delhi-91
91 9250725116

_______________________________________________
Hindi mailing list
Hindi@lists.indiawaterportal.org
http://lists.indiawaterportal.org/cgi-bin/mailman/listinfo/hindi




--
Palash Biswas
Pl Read:
http://nandigramunited-banga.blogspot.com/

No comments:

Post a Comment

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

Welcome

Website counter

Followers

Blog Archive

Contributors