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Saturday, October 22, 2011

Fwd: [NAAGVANSH] शुद्र पहले कौन थे यह ग्रंथ 1942 to1946 मे तयार...



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From: Kuldeep Wasnik <notification+kr4marbae4mn@facebookmail.com>
Date: 2011/10/22
Subject: [NAAGVANSH] शुद्र पहले कौन थे यह ग्रंथ 1942 to1946 मे तयार...
To: NAAGVANSH <naagvansh@groups.facebook.com>


Kuldeep Wasnik posted in NAAGVANSH.
शुद्र पहले कौन थे यह ग्रंथ 1942 to1946 मे तयार...
Kuldeep Wasnik 3:00pm Oct 22
शुद्र पहले कौन थे यह ग्रंथ 1942 to1946 मे तयार किया गया इस ग्रंथ मे बाबासाहब ऐसा नही कहते की आर्य यही के मूलनिवासी है बाबासाहब कहते है की 'आर्य यही के हो सकते है' यह वाक्य इस किताब का मेन मुद्दा नही है यह एक पासिँग रिमार्क है । 2001 मे DNA अनुसंधान से ये प्रमाणित हो गया की आर्य भारत के मूलनिवासी नही है युरेशियन है बाबासाहब के वक्तकोई अनुसंधान नही हुआ था । कुछ लोग सनातनी होने की वजह से वे ज्ञान विज्ञान पर विश्वास नही करेँगे इसलिए बाबासाहब का ही भाषण पढ़ सकते है । बाबासाहब ने जीवन के आखरी क्षणो मे 1956 मे जो चार भाषण दिए है उसमे से काँशिबनारस विश्वविद्यालय जो ब्रामणोका किला है वहा बाबासाहब कहते है की "भारत का इतिहास और कुछ न होकरआर्य और नाग इनके संघर्ष का इतिहास है नाग यही के और आर्य घोड़ेपर आए और इसलिए नागो को पराजित कर सके क्योकी उनके शस्त्र प्रगत थे नागो को पराजित कर आर्यो ने नागोपर अपना वचर्स्व प्रस्थापित किया और हमे गुलाम बनाया" । आप लोग किसी व्यक्ति की कौनसी बातो पर ज्यादा ध्यान दोगे? 1946 की या 1956 की ?। कनफ्युज्ड हो गए ? चलो बाबासाहब के ही शब्दो मे बता देते है 1955 मे बाबासाहब ने भाषावार प्रांतरचना यह किताब लिखी प्रस्तावना मे ही बाबासाहब लिखते है " किसी विषय पर मैने एक से ज्यादा मत रखे होंगे और उस मतोमे कुछ मतभेद हो तो उसमे से कौनसा मत लेना है इसमे कंफ्युजन हो सकता है मै मेरे अनुयायियो को बताना चाहता हू की उनमे से मैने जो बाद मे कहा है उसे ही प्रमाण माने "। बाबासाहब ने ऐसी छोटी छोटी बाते भी लिख कर रखी है परंतु हमारे लोगो की समस्या यह है की बाबासाहब का एक एक ग्रंथ पाँच पाँचसो से लेकर हजार पेज तक है और उतने पेज पढ़ेगा कौन?

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Palash Biswas
Pl Read:
http://nandigramunited-banga.blogspot.com/

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