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Tuesday, August 17, 2010

Fwd: बहसतलब चार : हिंदी साहित्‍य में किचकिच



---------- Forwarded message ----------
From: avinash das <avinashonly@gmail.com>
Date: 2010/8/16
Subject: बहसतलब चार : हिंदी साहित्‍य में किचकिच
To:


मित्रो,

हमने इस बार अपनी बहसतलब को साहित्‍य की पतनशील प्रवृत्तियों पर केंद्रित किया है। हिंदी में जो पत्रिकाएं निकलती हैं, वो अपने समाज को कितना समझ रही हैं या उन्‍हें पढ़ कर समाज कितना समझ में आता है - इस पर बात होगी। साथ ही प्रासंगिक संदर्भ के कुछ बिंदु भी उछलेंगे - मसलन नया ज्ञानोदय और विभूति नारायण राय की बदजुबानी। इस मसले पर पहली बार हिंदी साहित्‍य के नामचीन लोग एक मंच से अपनी बात रखेंगे।

विषय है
हिंदी समाज और हिंदी की साहित्यिक पत्रकारिता

वक्‍ता हैं
राजेंद्र यादव, कथाकार और संपादक, हंस
मंगलेश डबराल, कवि और संपादक, द पब्लिक एजेंडा
पंकज बिष्‍ट, कथाकार और संपादक, समयांतर
अनामिका, कवयित्री और प्राध्‍यापक
मनीषा, पत्रकार, राष्‍ट्रीय सहारा



मॉडरेट करेंगे
संजीव कुमार, युवा आलोचक और प्राध्‍यापक, देशबंधु कॉलेज, दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय


जगह है
गुलमोहर हॉल, इंडिया हैबिटैट सेंटर, नयी दिल्‍ली


वक्‍त और तारीख है
शाम साढ़े छह बजे, 17 अगस्‍त, मंगलवार


उम्‍मीद है, आप आएंगे और इस बहस में हिस्‍सा लेंगे। आपके तीखे और सार्थक हस्‍तक्षेप से बहसतलब को एक मायने मिलेगा।

मोहल्‍ला लाइव, यात्रा बुक्‍स और जनतंत्र की ओर से,
अविनाश





--
Palash Biswas
Pl Read:
http://nandigramunited-banga.blogspot.com/

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