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Monday, September 28, 2015

https://youtu.be/XibeTjOuvnc जनपद के कवि वीरेनदा,हमारे वीरेन दा कैंसर को हराकर चले गये!लड़ाई जारी है इंसानियत के हक में लेकिन,हम लड़ेंगे साथी! आज लिखा जायेगा नहीं कुछ भी क्योंकि गिर्दा की विदाई के बाद फिर दिल लहूलुहान है।दिल में जो चल रहा है ,लिखा ही नहीं जा सकता।न कवि की मौत होती है और न कविता की क्योंकि कविता और कवि हमारे वजूद के हिस्से होते हैं।वजूद टूटता रहता है।वजूद को समेटकर फिर मोर्चे पर तनकर खड़ा हो जाना है।लड़ाई जारी है। Let Me Speak Human! पलाश विश्वास Our friend,guide and one of the best poet Viren Dangwal has left us this morning at 4 AM in a Bareilly Hospital fighting cancer.He fought bravely.and succumbed.As our dear poet and friend Nabarun Bhattacharya fought cancer and succumbed.But their fight contines.We have to continue the fight.


https://youtu.be/XibeTjOuvnc

जनपद के कवि वीरेनदा,हमारे वीरेन दा कैंसर को हराकर चले गये!लड़ाई जारी है इंसानियत के हक में लेकिन,हम लड़ेंगे साथी!

आज लिखा जायेगा नहीं कुछ भी क्योंकि गिर्दा की विदाई के बाद फिर दिल लहूलुहान है।दिल में जो चल रहा है ,लिखा ही नहीं जा सकता।न कवि की मौत होती है और न कविता की क्योंकि कविता और कवि हमारे वजूद के हिस्से होते हैं।वजूद टूटता रहता है।वजूद को समेटकर फिर मोर्चे पर तनकर खड़ा हो जाना है।लड़ाई जारी है।

Let Me Speak Human!

पलाश विश्वास

https://youtu.be/XibeTjOuvnc


Our friend,guide and one of the best poet Viren Dangwal has left us this morning at 4 AM in a Bareilly Hospital fighting cancer.He fought bravely.and succumbed.As our dear poet and friend Nabarun Bhattacharya fought cancer and succumbed.But their fight contines.We have to continue the fight.

    (वीरेन DANGWAL।) - यूट्यूब

    www.youtube.com/watch?v=0VaoOzJBGF4

    10/08/2013 - 4Real News द्वारा अपलोड किया गया

    दिल्ली: हिन्दी भवन में हिन्दी कवि सम्मेलन (वीरेन DANGWAL)।


    हिंदी के सशक्त हस्ताक्षर कवि वीरेन डंगवाल ...

    https://plus.google.com/.../posts/XVvceZxYkxy

    21 मिनट पहले - हिंदी के सशक्त हस्ताक्षर कवि वीरेन डंगवाल का लंबी बीमारी के बाद निधनवीरेन डंगवाल के जाने से हिंदी कविता में एक बड़ा शून्य पैदा हुआ है मुंह के कैंसर से वीरेन डंगवाल ने बेहद लंबी लड़ाई लड़ी नई दिल्ली। हिंदी के सशक्त हस्ताक्षर कवि वीरेन ...

    वीरेन डंगवाल - कविता कोश

    kavitakosh.org/kk/वीरेन_डंगवाल

    18/09/2013 - वीरेन डंगवाल - कविता कोश भारतीय काव्य का विशालतम और अव्यवसायिक संकलन है जिसमें हिन्दी उर्दू, भोजपुरी, अवधी, राजस्थानी आदि पचास से अधिक भाषाओं का काव्य है।

    वीरेन डंगवाल की तबीयत खराब, बरेली में भर्ती ...

    https://plus.google.com/.../posts/3Rg8jfRLoud

    6 दिन पहले - वीरेन डंगवाल की तबीयत खराब, बरेली में भर्ती, गर्दन की क्षतिग्रस्त नस का आपरेशन हुआ

    वीरेन डंगवाल की छह कविताएँ | रचनाकार

    www.rachanakar.org › कविता

    11/05/2007 - चयन एवं प्रस्तुति - शिरीष कुमार मौर्य. भारत की आज़ादी से ठीक 10 दिन पहले जन्मेवीरेन डंगवाल समकालीन हिन्दी कविता में लोकप्रियता और समर्पण, दोनों ही लिहाज से अपना अलग स्थान रखते हैं। उन्होंने मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, कानपुर, ...

    वीरेन डंगवाल की कविता पर - पहल

    www.pahalpatrika.com/frontcover/getdatabyid/44?front=18...9

    आलेख. (वीरेन डंगवाल की कविता पर अपर्याप्त-सा कुछ). एक टूटी-बिखरी नींद थी और एक अटूट ख्वाब था अट्ठारह की नई उम्र का, जब मैं वीरेन डंगवाल के पहले संग्रह इसी दुनिया में की समीक्षा करना चाहता था, स्नातक स्तर की पढ़ाई और वाम छात्र-राजनीति करते ...


    समाचारों में

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    हिंदी के हस्ताक्षर कवि वीरेन डंगवाल का आज सुबह बरेली में लंबी ...

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    अनुनाद: वीरेन डंगवाल की कविताएं

    www.anunad.com/2014/11/blog-post_12.html

    12/11/2014 - वीरेन डंगवाल की कविताएं. परिकल्पित कथालोकांतर काव्य-नाटिका. नौरात, शिवदास और सिरी भोग वगैरह. (दिवंगत अग्रजों शैलेश मटियानी और गिरीश तिवाड़ी 'गिर्दा' को. किंचित क्षमा-याचना के साथ याद करते हुए, सादर). बहुत धुआं है मांऽ.


वीरेन डंगवाल

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से

वीरेन डंगवाल

Virendangwal.jpg

वीरेन डंगवाल

जन्म:

५ अगस्त १९४७

कीर्ति नगरटेहरी गढ़वालउत्तराखंड,भारत

मृत्यु:

२८ सितंबर २०१५

बरेलीउत्तर प्रदेश

कार्यक्षेत्र:

कवि, लेखक

राष्ट्रीयता:

भारतीय

भाषा:

हिन्दी

काल:

आधुनिक काल

विधा:

गद्य और पद्य

विषय:

पद्य

साहित्यिक
आन्दोलन
:

नई कविता,

प्रमुख कृति(याँ):

दुष्चक्र में सृष्टा,

कवि ने कहा,

स्याही ताल

साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत

वीरेन डंगवाल (५ अगस्त १९४७ - २८ सितंबर २०१५) साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत हिन्दी कवि हैं। उनका जन्म कीर्तिनगर, टेहरी गढ़वाल, उत्तराखंड में हुआ। उनकी माँ एक मिलनसार धर्मपरायण गृहणी थीं और पिता स्वर्गीय रघुनन्दन प्रसाद डंगवाल प्रदेश सरकार में कमिश्नरी के प्रथम श्रेणी अधिकारी। उनकी रूचि कविताओं कहानियों दोनों में रही है। उन्होंने मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, कानपुर, बरेली, नैनीताल और अन्त में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने १९६८ में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एम॰ए॰ और तत्पश्चात डी॰फिल की डिग्रियाँ प्राप्त की।

वीरेन १९७१ से बरेली कॉलेज में हिन्दी के अध्यापक रहे। साथ ही शौकिया पत्रकार भी। पत्नी रीता भी शिक्षक। स्थाई रूप से बरेली के निवासी। अंतिम दिनों में स्वास्थ्य संबंधी कारणों से दिल्ली में रहना पड़ा और २८ सितम्बर २०१५ को ६८ साल की उम्र में बरेली में देहांत हुआ।[1]

साहित्य यात्रा[संपादित करें]

बाईस साल की उम्र में उन्होनें पहली रचना, एक कविता, लिखी और फिर देश की तमाम स्तरीय साहित्यिक पत्र पत्रिकाओं में लगातार छपते रहे। उन्होनें १९७०-७५ के बीच ही हिन्दी जगत में खासी शोहरत हासिल कर ली थी। विश्व-कविता से उन्होंने पाब्लो नेरूदा, बर्टोल्ट ब्रेख्त, वास्को पोपा, मीरोस्लाव होलुब, तदेऊश रोजेविच और नाज़िम हिकमत के अपनी विशिष्ट शैली में कुछ दुर्लभ अनुवाद भी किए हैं। उनकी ख़ुद की कविताओं का भाषान्तर बाँग्ला, मराठी, पंजाबी, अंग्रेज़ी, मलयालम और उड़िया जैसी भाषाओं में प्रकाशित हुआ है।

वीरेन डंगवाल का पहला कविता संग्रह ४३ वर्ष की उम्र में आया। इसी दुनिया में नामक इस संकलन को रघुवीर सहाय स्मृति पुरस्कार (१९९२) तथा श्रीकान्त वर्मा स्मृति पुरस्कार (१९९३) से नवाज़ा गया। दूसरा संकलन 'दुष्चक्र में सृष्टा' २००२ में आया और इसी वर्ष उन्हें 'शमशेर सम्मान' भी दिया गया। दूसरे ही संकलन के लिए उन्हें २००४ का साहित्य अकादमी पुरस्कार भी दिया गया।[2] उन्हें हिन्दी कविता की नई पीढ़ी के सबसे चहेते और आदर्श कवियों में माना जाता है। समालोचकों के अनुसार, उनमें नागार्जुन और त्रिलोचन का-सा विरल लोकतत्व, निराला का सजग फक्कड़पन और मुक्तिबोध की बेचैनी और बौद्धिकता एक साथ मौजूद है।

पत्रकारिता[संपादित करें]

वे शौकिया तैर पर पत्रकारिता से भी जुड़े रहे थे और एक लंबे अरसे तक अमर उजाला के ग्रुप सलाहकार और बरेली के स्थानीय संपादक रहे। वर्ष २००९ में एक विवाद के चलते उन्होंने इस पद से इस्तीफा दे दिया था।

प्रमुख रचनायें[संपादित करें]

  • इसी दुनिया में
  • दुष्चक्र में स्रष्टा
  • कवि ने कहा
  • स्याही ताल

पुरस्कार और सम्मान[संपादित करें]

  • साहित्य अकादमी पुरस्कार (२००४)
  • शमशेर सम्मान (२००२)
  • श्रीकान्त वर्मा स्मृति पुरस्कार (१९९३)
  • रघुवीर सहाय स्मृति पुरस्कार (१९९२)

संदर्भ[संपादित करें]

  1.  "नहीं रहे वीरेन दा". यूनीवार्ता. 28 सितंबर 2015. अभिगमन तिथि: 28 सितंबर 2015.
  2.  गौर, महेंद्र (2005) (अंग्रेजी में). Indian Affairs Annual 2005. प॰ 41. अभिगमन तिथि: 28 सितंबर 2015.


    वीरेन DANGWAL।) - यूट्यूब

    www.youtube.com/watch?v=0VaoOzJBGF4

    10/08/2013 - 4Real News द्वारा अपलोड किया गया

    दिल्ली: हिन्दी भवन में हिन्दी कवि सम्मेलन (वीरेन DANGWAL)।

    अनुपलब्ध: kvi


    वीरेनदा के लिए | Strategic Human Alliance Worldwide

    strategichumanalliance.blogspot.com/2013/07/blog-post_282.html

    29/07/2013 - वीरेनदा के लिए. पलाश विश्वास. क्या वीरेनदा ऐसी भी नौटंकी क्या जो तुमने आज तक नहीं की. गये थे रायगढ़ कविता पढ़ने .... पता नहीं बना है। यदि आप इस पन्ने के लिये ऐसा पता चाहते हैं तो kavitakosh AT gmail DOT com पर सम्पर्क करें। Viren Dangwal ...

    My story Troubled Galaxy Destroyed dreams: आनंद ...

    troubledgalaxydetroyeddreams.blogspot.com/2013/.../blog-post_4631.ht...

    07/08/2013 - http://www.janjwar.com/2011-06-03-11-27-26/78-literature/4231-ek-shaam-viren-dangwal-ke-sath-by-deepak-bharti-for-janjwar. ये पंक्तियां हैं सुप्रसिद्ध साहित्यकार और वरिष्ठ पत्रकार वीरेन डंगवाल यानी वीरेनदा की एक कविता की. उनके प्रशंसक और चाहने वाले ...

    BiharWatch: # वीरेनदा की कविताएं अँधेरे के ...

    www.biharwatch.com/.../httptcoi0gspsezop-jsm-poetry-msg2songs.html

    08/09/2015 - वीरेनदा की कविताएं अँधेरे के खिलाफ उजाले की # आकांक्षा की # अभिव्यक्ति हैं http://t.co/I0GspseZOp # JSM ... को दिल्ली के गांधी शांति प्रतिष्ठान में आयोजित हमारे समय के महत्वपूर्ण कवि वीरेन डंगवाल की कविता आवृत्ति और.

    older - My story Troubled Galaxy Destroyed dreams

    destroyed166.rssing.com/chan-26853622/all_p32.html

    03/11/2014 - वीरेनदा सेमिलकर फिर यह यकीन पुख्ता हुआ नये सिरे से किकविता में ही रची बसी होती है मुकम्मल जिंदगी जो दुनिया को खत्म करने वालों के खिलाफ बारुदी सुरंग ...... Abhishek Srivastava added 3 new photos — with Virendra Dangwal Dangwal and 4 others.

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