नौकरशाही ने तबाह कर दी उत्तराखंड में उच्च शिक्षा....
उत्तराखंड की स्कूली शिक्षा के मामले में भले अंग्रेजी राज से ही देश भर में धाक रही हो । लेकिन उच्च शिक्षा के मामले में सूबे के हाल बेहाल हैं । सरकारी विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता छीनने से लेकर शिक्षकों के पदों को मंजूरी नहीं देने पर आमादा नौकरशाह निजी विश्वविद्यालयों को बढ़ावा दे रहे हैं । एक निजी विश्वविद्यालय की मंजूरी में पांच-छह करोड़ की घूसखोरी आम बात है । लेकिन शिक्षा के स्तर को बरकरार रखने वाले सरकारी विश्वविद्यालयों की हालत लगातार बदतर हो रही है ।
राज्य के पंतनगर विश्वविद्यालय की कृषि शिक्षा के मामले में देश में विशेष पहचान रही है । हालांकि यहां दूसरे पाठ्यक्रमों की भी शुरू से ही पढ़ाई होती है । उत्तर प्रदेश का बंटवारा होने से पहले तक भी इस विश्वविद्यालय की अपनी प्रतिष्ठा थी । लेकिन अलग उत्तराखंड बन जाने के बाद सब कुछ बंटाधार हो गया । नौकरशाही ने शिक्षा के इस अहम केंद्र पर कब्जा जमा लिया है । पिछले कई साल से कोई बड़ा कृषि वैज्ञानिक यहां कुलपति के पद पर आने को तैयार नहीं । नतीजतन कुलपति जैसा शैक्षिक कामकाज भी आइएएस अफसर संभाल रहे हैं । पहले यह विश्वविद्यालय सुभाष कुमार के हवाले था । वे सूबे के मुख्य सचिव बने तो दूसरे आइएएस आलोक जैन को सरकार ने कुलपति बनवा दिया ।
उत्तराखंड बनने से पहले इस इलाके में दो सरकारी विश्वविद्यालय गढ़वाल और कुमाऊं में थे । गढ़वाल का मुख्यालय श्रीनगर में और कुमाऊं का नैनीताल में था । पर्वतीय क्षेत्र होने के कारण यहां ज्यादातर डिग्री कालेज सरकारी ही बनाए गए । एक तकनीकी विश्वविद्यालय रूड़की में था जो अब आइआइटी बन चुका है । जबकि गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय शुरू से ही विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की मंजूरी वाला डीम्ड विश्वविद्यालय है । इसका प्रबंधन आर्य प्रतिनिधि सभा करती रही है । वाजपेयी सरकार ने हर राज्य में एक केंद्रीय विश्वविद्यालय खोलने की योजना बनाई तो उत्तराखंड में श्रीनगर स्थित गढ़वाल विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय में तब्दील कर दिया गया । गढ़वाल में चल रहे डिग्री कालेजों के सामने इससे संबद्धता का संकट पैदा हो गया तो सरकार को श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय की स्थापना करनी पड़ी ।
फिलहाल पंतनगर के अलावा नैनीताल स्थित कुमाऊं विश्वविद्यालय और देहरादून स्थित उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय में खलबली है । नैनीताल के कुलपति वीपीएस अरोड़ा से तब की राज्यपाल मार्गरेट अल्वा खफा हो गई थीं । लिहाजा कार्यकाल पूरा हो जाने के बाद अरोड़ा ने नए कुलपति की नियुक्ति का इंतजार किए बिना पद छोड़ दिया था । चार महीने की मशक्कत के बाद नए राज्यपाल अजीज कुरैशी ने यहां जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली के प्रोफेसर राकेश भटनागर को कुलपति नियुक्त कर दिया । भटनागर ने शिक्षा के ढर्रे को पटरी पर लाने के लिए खाली पड़े पदों पर नियुक्तियां शुरू कीं तो उन पर राजनीतिक दबाव पड़ा । सो तीन साल के कार्यकाल के बावजूद वे चार महीने में ही इस्तीफा देकर दिल्ली चले गए ।
आरोप है कि उत्तराखंड सरकार के एक आइएएस अफसर राकेश शर्मा से तमाम कुलपति और शिक्षाविद त्रस्त हैं । 1981 बैच के शर्मा को मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा का खास माना जाता है । पहले उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा दोनों उन्हीं के पास थे । ये वही शर्मा हैं जिनके दिल्ली में हत्या वाले रोज पोंटी चड्ढा के साथ उनके फार्म हाउस पर मौजूदगी की खबर आई थी । हालांकि राज्य सरकार ने इस मामले को दबा दिया । शर्मा की खूबी है कि वे मुख्यमंत्री के खास बन जाते हैं । रमेश पोखरियाल निशंक के वक्त भी प्रशासन में उन्हीं की तूती बोलती थी । विजय बहुगुणा ने भी तमाम शिकवे-शिकायतों के बावजूद उनकी अहमियत नहीं घटाई ।
नैनीताल के विश्वविद्यालय में राकेश भटनागर के इस्तीफा देने के बाद वहां के कमिश्नर को कुलपति बनाया गया । लेकिन उन्होंने भी थोड़े दिन में ही हाथ खड़े कर दिए । फिलहाल प्रति कुलपति इस विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति हैं । जबकि उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति डीएस चौहान ने भी राज्यपाल को पत्र लिखकर खुद को मुक्त करने की इजाजत मांगी है । उनकी प्रमुख सचिव राकेश शर्मा से पटरी नहीं बैठ रही । वे राज्यपाल को अवगत करा चुके हैं कि शर्मा के नाजायज हस्तक्षेप के कारण न केवल विश्वविद्यालय की स्वायत्तता खत्म हो चुकी है बल्कि सूबे में तकनीकी शिक्षा का विकास भी अवरुद्ध हुआ है । राज्यपाल ने उनका इस्तीफा मंजूर करने से इनकार कर दिया है । चौहान को तकनीकी शिक्षा के विकास में महारथ हासिल है । उत्तर प्रदेश में 2000 में जब तकनीकी विश्वविद्यालय की स्थापना हुई थी तो पहले कुलपति चौहान ही बनाए गए थे । वे लगातार दो बार वहां कुलपति थे । उत्तराखंड में भी यह उनका दूसरा कार्यकाल है ।
हैरत की बात है कि राज्य के किसी भी सरकारी विश्वविद्यालय में इस समय कोई महिला कुलपति नहीं है । नैनीताल में जब राकेश भटनागर को कुलपति बनाया गया तो बीना शाह भी यहां दावेदार थीं । वे नैनीताल की हैं और बरेली विश्वविद्यालय में कुलपति व इग्नू में निदेशक रह चुकी हैं । नए बनाए गए मुक्त विश्वविद्यालय की गत भी अच्छी नहीं है । हल्द्वानी स्थित इस विश्वविद्यालय में विनय पाठक पहले कुलपति थे । अब सुभाष धूलिया कुलपति बने हैं । वे लेखक और पत्रकार रहे हैं पर प्रशासनिक दक्षता के मामले में फिसड्डी माने जाते हैं ।
रमेश पोखरियाल निशंक ने उत्तराखंड में जड़ी-बूटियों का खजाना होने का दावा कर देहरादून में देश का पहला सरकारी आयुर्वेद विश्वविद्यालय भी खोल दिया था । लेकिन इस विश्वविद्यालय के मौजूदा कुलपति सत्येंद्र मिश्र नौकरशाही के चक्कर लगाकर थक चुके हैं । न शिक्षकों के पद स्वीकृत किए जा रहे हैं और न विश्वविद्यालय को जरूरी आर्थिक मदद ही राज्य सरकार देने को तैयार है । इसी तरह टिहरी के चंबा में स्थापित किए गए श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय में तो सरकार ने एक रजिस्ट्रार को ही कुलपति बना दिया । यह विश्वविद्यालय भी कागजों तक ही सीमित होकर रह गया है ।
साभार : http://www.jansatta.com/index.php/component/content/article/48506-2013-07-08-03-47-55
Tuesday, July 16, 2013
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
Followers
Blog Archive
-
▼
2013
(6088)
-
▼
July
(870)
- किसानों की आत्महत्याः एक 12 साल लंबी दारूण कथा
- आप कितने सही हैं, डॉ सिंह?
- भ्रष्टाचार की गंगा का मुहाना बंद करना होगा
- साल 2011 में 14 हजार से अधिक किसानों ने की आत्महत्या
- प्रेमचंद की परम्परा और हंस : वरवर राव का खुला खत
- Aamir khan's 'satyameba jayate' team visit kamduni
- राजनीति ने हाल बेहाल किया पोर्ट ट्रस्ट का!
- Govind Raju updated his status: "आप भले ही दिन भर ...
- [Marxistindia] On Telangana State
- Fwd: NEW GOVERNMENT LOGO!
- Fwd: [pmarc] Dalits Media Watch - News Updates 31....
- कल की कैबिनेट बैठक में तेलंगाना पर चर्चा की उम्मीद...
- तेलंगाना आंदोलन का इतिहास
- चलो भाग चलें अमेरिका की ओर
- बांग्लादेश में हिन्दू मंदिरों और घरों पर टूटा जमात...
- परमाणु उर्जा का कोई भविष्य नहीं
- रुपये का तो भगवान ही मालिक
- एक वर्ष में होते एक करोड़ गिरफ्तार
- हिंदी के लेखकों, पत्रकारों, बुद्धिजीवियों, संस्कृ...
- आदिवासी साहित्य पर विस्तृत परिचर्चाओं के साथ संपन्...
- पत्रकार महोदय !
- Ijirupa : the eighth Village council said NO to mi...
- Reyazul Haque क्रांतिकारी कवि वरवर राव और लेखिका अ...
- A new state and a new-look state Congress kickstar...
- Darjeeling bandh ends today, but Siliguri shutdown...
- D Subbarao cussedly took on finance ministry and r...
- Government to further liberalise FDI policy: P Chi...
- Search on for RBI governor's successor, reconstitu...
- जाति ऐसे नहीं टूटेगी उदित राज
- प्रेमचंद और अमर्त्य सेन
- तेलंगाना बनेगा 29वां राज्य, हैदराबाद दस साल के लिए...
- तेलंगाना फैसला : रायलसीमा और आंध्र प्रदेश में बंद
- 'तस्वीर खिंचवाएंगे तो मर जाएंगे'
- हवा के तमाम किस्से हैं : कविता की नदी में धंसान
- प्यारे तसलीम के शिकवे के जवाब में
- Nilakshi Singh कायस्थ जाति में उत्पन प्रेमचंद ब्रा...
- सुनीता भास्कर तहसीलदार ने तो निभायी खनन की दारोगाई...
- वीरेनदा के लिए पलाश विश्वास के संदर्भ में नवीनतम प...
- Mamata Banerjee Panchayat Election results are alm...
- Nobody wants to help us because we are dalits: aci...
- BISWAS-ER CHOBI
- Back issues of Saptaha available
- Paddolochan Biswas दुर्गा शक्ति नागपाल यदि नहीं हो...
- नियामगिरि: 7 ग्राम सभाओं ने वेदांता को खारिज किया।
- Panini Anand कलम उठाओ वीरेन दा. जनता आती है
- Dalits Media Watch - News Updates 30.07.13
- Fwd: Rihai Manch- Verdict on Shahzad, judicial enc...
- CAN INDIA ANNEX NEPAL ? NO WAY] OVERHYPED <लेन्डुप...
- Fwd: CC News Letter 30 July - A Nuclear Free World
- নতুন নিম্নচাপে প্রবল বৃষ্টির আশঙ্কা রাজ্যে
- পঞ্চায়েত সমিতিতেও দাপট তৃণমূলের
- কেউই অজেয় নয় বাদাবনের জেলায়
- জয়ের ধারা বজায় রেখেও সতর্ক করে রাখল নন্দীগ্রাম
- ব্যারাকপুরে একতরফা, ধাক্কা লাগল বসিরহাটে
- এখনও ঘাসফুলেই ছয়লাপ গ্রামবাংলা
- নানুরে আসন হারিয়েও বীরভূমে সবুজ বিপ্লব ঘটালেন অনুব...
- মমতার মুখে গণতন্ত্রের উত্সব
- ১৩টি জেলায় তৃণমূল, বাম-কংগ্রেসের দখলে একটি
- গ্রাম বাংলা ঘাসফুলের
- দক্ষিণে দাপট তৃণমূলের, উত্তরে হাড্ডাহাড্ডি। ১৩টি জ...
- ১৩ জেলা পরিষদ তৃণমূলের দখলে
- Why do we need Reserve Bank of India at all?If any...
- “Fair and Handsome” and Shah Rukh Khan: Take Down ...
- आईएएस दुर्गा के लिए आवाज उठाइए पर पत्रकार धनंजय को...
- विगत 10 जून को लटेरी के कोलुआ पठार पर अतिक्रमण हटा...
- Tehelka Hyderabad will become an Union Territory a...
- Tehelka Despite the government’s highhandedness to...
- Subhash Chandra Kushwaha आखिरकार सर्वोच्च न्यायालय...
- রবীন্দ্রভারতীতে ছাত্রীর শ্লীলতাহানি, অভিযোগ টিএমসি...
- The Chemical Brothers!
- Horrific pictures from Egypt where the army has ma...
- जो निवेशक अभी तक भारतीय अर्थव्यवस्था की ओर हसरत भर...
- Please take this very seriously. People have been ...
- Illegal Mining continues so is dharna demanding ju...
- आखिर मावोवादी गतिविधीयों की ख़बरें कांग्रेस और भाजप...
- आंदोलन से पहले
- वीरेनदा के लिए
- आदिवासी साहित्य को अपने मानकों से न परखें : सुखदेव...
- টাকা-ডলারের উত্থানপতন কি খালি বিদেশি বিনিয়োগের খাম...
- অধীরেই আস্থা মুর্শিদাবাদের
- পঞ্চায়েতে অব্যাহত অগ্রগতি, ১৩ জেলায় এগিয়ে তৃণমূল
- Nasty TribaIs (sic) !
- What Is Striking In India Is The Indifference Of T...
- बहुत कठिन है राह केदार नाथ की! --पैदल मार्ग का नक्...
- नई पंचायतों का कामकाज चलाने के लिए विभाग के पास पर...
- हन्नान मोल्ला बने किसान सभा के महासचिव,रज्जाक सह स...
- न सलप पुल बनेगा और न दुर्घटनाओं का सिलसिला बंद होग...
- গ্রাম পঞ্চায়েতে তৃণমূলের দাপট, ১৩ জেলাতে দারুণ ফল ...
- গ্রাম পঞ্চায়েতে বিপুল জয় তৃণমূলের
- পঞ্চায়েত নির্বাচন ২০১৩ দেখুন এই মুহূর্তের ভোটের ফল
- वैश्वीकरण बनाम आदिवासी हरिराम मीणा
- 100 करोड़ रूपये में खरीद सकते हैं राज्यसभा सीट: कां...
- Ugly face of Tamilnadu's Vanniyar Politics By Vidy...
- Ex DGP Sri R B Sreekumar's letter to the President...
- The ‘death Holes’ of India By Vidya Bhushan Rawat
- Dismantle the dominance of ‘castes’ in our academi...
- Death of Ethics By Vidya Bhushan Rawat
- भूख लगेगी तो लोग नेताओं को चबाएंगे... प्रभात रंजन दीन
- Himanshu Kumar गृह मंत्रालय ने अभी हाल ही मे आदिवा...
- राई आगर ,बेरीनाग ,गणाई और उड्डयारी बैंड के पास के ...
-
▼
July
(870)

No comments:
Post a Comment