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Wednesday, July 10, 2013

सिंगूर भूमि के मामले में टाटा मोटर्स स्थिति स्पष्ट करे: न्यायालय

सिंगूर भूमि के मामले में टाटा मोटर्स स्थिति स्पष्ट करे: न्यायालय

Wednesday, 10 July 2013 16:11

नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने बदले हुये हालात में सिंगूर में भूमि के पट्टे पर अधिकार के बारे में टाटा मोटर्स को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है क्योंकि यह आटोमोबाइल कंपनी ने पहले ही अपना संयंत्र अन्यत्र ले जा चुकी है। 
न्यायमूर्ति एच एल दत्तू और न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की खंडपीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा, ''सिंगूर में कार निर्माण संयंत्र लगाने के लिये यह जमीन अधिग्रहीत की गयी थी। अब यह मकसद तो रहा नहीं क्योंकि आप पहले ही यहां से चले गये हैं। आप अब यह नहीं कह सकते कि इस जमीन में आपकी अभी भी दिलचस्पी है।''    
न्यायाधीशों ने कहा, ''यह जमीन अब किसानों को वापस दी जानी चाहिए और हम पश्चिम बंगाल सरकार से भूमि अधिग्रहण के समय आपके द्वारा किये गये भुगतान की रकम लौटाने के लिये इस मामले में हलफनामा दाखिल करने के लिये कह सकते हैंहम समझते हैं कि यह ठीक रहेगा।''

न्यायाधीशों ने कहा कि वैसे भी न्यायालय को यह कहने का अधिकार है कि पट्टे का उद्देश्य निरर्थक हो चुका है। न्यायलय ने इसके साथ ही टाटा मोटर्स को बदली हुयी परिस्थितियों में इस जमीन पर अधिकार के बारे में स्थिति स्पष्ट करते हुये हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
न्यायालय सिंगूर भूमि अधिग्रहण कानून निरस्त करने के कलकत्ता उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार की अपील पर सुनवाई कर रहा है। उच्च न्यायालय ने पिछले साल 22 जून को सिंगूर भूमि पुनर्वास एवं विकास कानून, 2011 निरस्त करते हुये टाटा मोटर्स को 400 एकड़ भूमि पर दावा करने की अनुमति दे दी थी।
उच्च न्यायालय ने टाटा मोटर्स की याचिका पर अपने फैसले में कहा था कि नैनो कार परियोजना के लिये टाटा मोटर्स को सिंगूर में पट्टे पर दी गयी भूमि वापस लेने संबंधी कानून अवैध है क्योंकि इस पर राष्ट्रपति की संस्तुति नहीं दी गयी थी। 

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