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Tuesday, September 8, 2015

7वें वेतन आयोग ज्यादा न रखें उम्मीद, 15-20 फीसदी ही होगी बढ़ोत्तरी

7वें वेतन आयोग ज्यादा न रखें उम्मीद, 15-20 फीसदी ही होगी बढ़ोत्तरी


Reporter ArunKumarRTI NEWS

नई दिल्ली : केंद्रीय कर्मियों को सातवें वेतन आयोग का बड़ी बेसब्री से इंतजार है. उन्हें उम्मीद है कि उनके वेतनमान में बड़ी बढ़ोत्तरी होगी. लेकिन मीडिया में आ रही खबरों के अनुसार इस वेतन आयोग से केंद्रीय कर्मियों को कुछ खास फायदा नहीं होने वाला है. सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार वेतन में मात्र 15-20 फीसदी की ही बढ़ोत्तरी होगी. लेकिन न्यूनतम मूल वेतन को बढ़ाकर 15 हजार किये जाने की उम्मीद है. 

सूत्रों के अनुसार, वेतन आयोग अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देने में जुटा है और अगले दो महीनों में आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप देगा। रिपोर्टों में बताया गया है कि सातवें वेतन आयोग का मानना है कि छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद कर्मचारियों के वेतन में मिली शानदार बढ़ोतरी के बाद अब वैसी बढ़ोतरी की गुंजाइश नहीं है। वहीं, वेतन आयोग एक महत्वपूर्ण सिफारिश यह करने जा रहा है कि सरकारी कार्मिकों का अधिकतम सेवाकाल 33 साल निर्धारित किया जाए। इसका मतलब यह होगा कि यदि कोई कर्मचारी 20 साल में सरकारी नौकरी प्राप्‍त कर लेता है तो वह 53 साल में सेवानिवृत्त हो जाएगा। बाकी अन्‍य लोगों के लिए सेवानिवृत्त की आयु 60 साल ही रहेगी। इसके अलावा, न्यूनतम मूल वेतन 15 हजार रुपये करने की संभावना है। इससे छोटे कार्मिकों को फायदा होगा। गौर हो कि पिछले वेतन आयोग ने न्‍यूनतम मूल वेतन को 3050 रुपये बढ़ाकर 7730 रुपये किया था।


वहीं, वैश्विक वित्तीय सेवा कंपनी डीबीएस की एक रिपोर्ट के अनुसार सातवें वेतन आयोग का ज्यादातर बोझ आगामी वित्त वर्ष (2016-17) के बजट की ओर से वहन कर लिया जाएगा। डीबीएस का कहना है कि सातवें वेतन आयोग के कार्यान्वयन से कर्मचारियों के वेतन-भत्ते में 16 प्रतिशत तक बढोतरी हो सकती है। इसके अनुसार, अगर लागू किया गया तो सातवें वेतन आयोग का ज्‍यादातर असर (बोझ) वित्त वर्ष 2016-17 के बजट की ओर से वहन कर लिया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार तीसरा मुद्दा न्यूनतम मूल वेतन 15 हजार रुपये किए जाने की संभावना है। पिछले वेतन आयोग ने इसे 3050 से बढ़ाकर 7730 किया था। अब इसे 15 हजार रुपये किए जाने की संभावना है। इस हिसाब से छोटे कार्मिकों को वेतन आयोग की सिफारिशों से ज्यादा फायदा होने की उम्मीद है। 


मूल वेतन का सफर

1946 में पहला वेतन आयोग ने मूल वेतन 35 रुपये तय किया था।
1959 दूसरा वेतन आयोग ने 80 रुपये।
1973 तीसरा वेतन आयोग-260
1986 चौथा वेतन आयोग-950
1996 पांचवा वेतन आयोग-3050
2006 छठा वेतन आयोग-7730
2006 छठा वेतन आयोग-7730


गौरतलब है कि वेतन आयोग जल्दी ही अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगा. आयोग अपनी रिपोर्ट को अंतिम रिपोर्ट देने में जुटा है. कयास यह भी लगाये जा रहे हैं कि आयोग सरकार से यह सिफारिश भी कर सकता है कि अधिकतम सेवाकाल 33 वर्ष कर दी जाये. जिसके कारण कई लोग 60 वर्ष से पहले रिटायर हो जायेंगे. 

छठे वेतन आयोग में न्यूनतम मूल वेतन को 3050 से बढ़ाकर 7730 किया गया था और सातवें वेतन आयोग में इसे 15000 हजार करने की सिफारिश की जा सकती है.
Reference:

Making India without labour laws and rights!

It is Full SCALE War as it in COMPLETE HIRE and Fire in an era of Total PRIVATIZATION.It is Making in!Get ready for SACRIFICE!

Jo kama le vah ban gaya baki chale jayenge Baster ke advasiyo ke sath marne!Says the best news person I have seen ,Amit Prakash Singh!

Productivity linked wage means freedom of retrenchment as it is really.Only thing we could not confirm is that government of India plans to sack anyone at First April,2016 as soon as the seventh pay commission is implemented if the employee is fifty years old and quite odd in the system.

It is going to happen!.

We have seen VRS!

We have seen DISINVESTMENT!

We have seen SELL OFF Outright!

We Have seen Shutters Down!

Employees and Trade Unions concentrated only on Payscales and Allowances!

No problems,whoever survives,would enjoy seven star life.but for others it is doom`s day!


Palash Biswas

http://palashscape.blogspot.in/2015/09/making-india-without-labour-laws-and.html


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