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Monday, September 21, 2015

जो माहौल बन गया है उसमें किसी के ‪#‎स्वतंत्र‬ सोचने, लिखने व मनन करने की गुंजाइश खत्म होती जा रही है। http://www.hastakshep.com/…/we-will-have-to-break-silence-a… ‪#‎Freedomofspeech‬


जो माहौल बन गया है उसमें किसी के ‪#‎स्वतंत्र‬ सोचने, लिखने व मनन करने की गुंजाइश खत्म होती जा रही है। 
http://www.hastakshep.com/…/we-will-have-to-break-silence-a…
‪#‎Freedomofspeech‬


Amalendu Upadhyaya and 2 others shared a link.
सुभाष गाताडे ने कहा जो माहौल बन गया है उसमें किसी के स्वतंत्र सोचने, लिखने व मनन करने की गुंजाइश खत्म होती जा रही है। इसको रोकने के लिए भी हमें...
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