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Friday, March 7, 2014

अरविंद के नहीं,राष्ट्र के सवाल हैं मोदी से।यह केशरिया कयामत हर कीमत पर रोक दी जाये, यह लोक गणराज्य भारत के अस्तित्व का बुनियादी सवाल है।

अरविंद के नहीं,राष्ट्र के सवाल हैं मोदी से।यह केशरिया कयामत हर कीमत पर रोक दी जाये, यह लोक गणराज्य भारत के अस्तित्व का बुनियादी सवाल है।

पलाश विश्वास

अरविंद केजरीवाल ने गुजरात के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्रित्व के दावेदार नरेंद्र मोदी से जो सोलह सवाल पूछे हैं,वे दरअसल अरविंद के सवाल हैं नही,ये सावाल राष्ट्र की ओर से हैं,जो समय समय पर उठाये जाते रहे हैं।मोदी को विकासपुरुष बतौर पेश किया जा रहा है।शेयर बाजार में अभूतपूर्व जोश है। निवेशकों की आस्था अटूट है।तो जिन मतदाताओं के जनादेश पर वे राजकाज के अधिकारी बनने वाले हैं,उन्हें मोदी इन सवालों का जवाब क्यों नहीं देते।अरविंद केजरवाल से मिलने  न मिलने की उन्हें पूरी स्वतंत्रता है।उनसे संवाद न करना चाहे तो भी हर्ज नहीं।लेकिन लोकतंत्र में आस्था है और पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्धता है तो अत्यंत नैतिक मान्यताओं के झंडेवरदार मोदीमय संघपरिवार का मान रखते हुए उन्हें राष्ट्र को संबोधित करके इन सवालों का जबाव हर हाल में देने चाहिए।अगर अरविंद केजरीवाल झूठ का पुलिंदा पेश कर रहे हैं,तो उस झूठ का भी पर्दाफाश होना जरुरी है।सवालों के जववाब नहीं मिलेंगे तो जाहिर है कि भावी प्रधानमंत्री की साख कोई मजबूत होगी नहीं और बाकी देश को लगेगा,हो न हो,अरविंद कुछ न कुछ सच जरुर बोल ही रहे हैं।


आज दिल्ली के पूर्व  मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी से सोलह सवालों का जवाब लेना चाहते थे। लेकिन, उन्हें नरेन्द्र मोदी से मिलने की इजाजत नहीं मिल सकी। जिसके बाद वह वापस हो लिए। अपने गुजरात दौरे पर नरेन्द्र मोदी पर जमकर हमला बोले। साथ ही अरविन्द केजरीवाल ने नरेन्द्र मोदी पर सोलह सवाल भी उछाल दिए हैं।

गुजरात दौरे पर अरविन्द ने नरेन्द्र मोदी सरकार पर जमकर कटाक्ष किये हैं। अरविन्द ने कहा है कि, गुजरात में विकास के बारे में नरेंद्र मोदी जो दावे करते हैं, वे खोखले हैं। केजरीवाल ने कहा कि मोदी के तमाम दावे झूठ की बुनियाद पर टिके हैं। उनके सरकार में किसान आत्महत्या कर रहे हैं। यदि गुजरात को नरेन्द्र मोदी कृषि प्रधान देश बता रहे हैं तो किसानों के सामने ऐसी स्थित क्यों आ जाती है जिसके लिए उन्हें आत्महत्या करना पड़ रहा है। आइये हम आपको बताते हैं उन सोलह सवालों के बारे में जिनके जवाब अरविंद केजरीवाल नरेन्द्र मोदी से जानना चाहते थे।

केजरीवाल के नरेन्द्र मोदी से  सवाल

1.  क्या आप प्रधानमंत्री बनने के बाद केजी बेसिन से निकली गैस के दाम बढ़ाएंगे?

2.  पढ़े-लिखे युवाओं को ठेके पर नौकरी क्‍यों दे रहे हैं और उन्‍हें मात्र 5300 रुपये प्रति महीना दे रहे हैं, इतने में कोई कैसे जिंदगी चलाएगा?

3.  पिछले दस सालों में राज्‍य में लघु उद्योग क्‍यों बंद हुए हैं?

4.  किसानों की जमीनें बड़े उद्योगपतियों को कौड़ियों के भाव क्‍यों दिए जा रहे? आपने किसानों की जमीन छीनकर अडानी और अंबानी को दे दी है।

5.  आपके पास कितने निजी हेलिकॉप्‍टर या प्लेन हैं? आपने ये खरीदे हैं या बतौर तोहफा मिला है? आपकी हवाई यात्राओं पर कितना खर्च आता है और इसके लिए पैसे कहां से आते हैं?

6.  गुजरात के सरकारी अस्‍पतालों में इलाज की सुविधा क्‍यों नहीं है?

7.  आपने हाल में पंजाब में कहा था कि कच्छ के सिख किसानों की जमीन नहीं छीनी जाएगी, तो इस मामले में गुजरात सरकार सुप्रीम कोर्ट क्यों गई है?

8.  गुजरात में विकास के दावे झूठे हैं, मोदी जी आप बताइए कि गुजरात में कहां विकास हुआ है?

9.  आपके मंत्रिमंडल में दागी मंत्री क्यों शामिल है, बाबू भाई बुखेरिया और पुरुषोत्तम सोलंकी जैसे दागी मंत्री सरकार का हिस्सा कैसे बने हुए हैं?

10. मुकेश अंबानी से आपके क्या रिश्ते हैं, आपने अंबानी परिवार के दामाद सौरभ पटेल को मंत्रिमंडल में क्यों जगह दी?

11. गुजरात में सरकारी स्कूलों के हालात बदहाल क्यों है?

12. सरकारी दफ्तरों में बहुत ज्यादा करप्शन है, विभागों में भारी भ्रष्टाचार क्यों है?

13. कच्छ के किसानों को पानी नर्मदा बांध के बावजूद आज तक क्यों नहीं मिला? सारा पानी उद्योगपतियों को दे दिया गया।

14. गुजरात के किसान बेहाल है। किसान खुदकुशी कर रहे हैं। हाल के वर्षों में गुजरात में 800 किसानों ने खुदकुशी की, क्यों?

15. प्रदेश में रोजगार का बुरा हाल क्यों है और बेरोजगारी क्यों बढ़ी है?

16. चार लाख किसानों ने बिजली के लिए कई साल से आवेदन दिया है, उन्हें अब तक बिजली क्यों नहीं मिली है?





हम न आप  के समर्थक हैं और न हम राजनीतिक दलों के दफ्तरों के घेराव का समर्थन करते हैं। लेकिन इन सवालों का जबाव नहीं मिला तो हमें पुनर्विचार अवश्य करना चाहिए। क्या नमोमय भारत ही इस लोकगणराज्य का भविष्य है। जिस नमो की सुनामी है,वह सवालों से भागता है तो देस में लोकतंत्र की क्या हालत होगी। क्या हमें नमोमय भारत बनने देने की मुहिम में शामिल हो जाना चाहिए उनकी जबावदेही से मुकरने के बावजूद,बुनियादी सवाल अब यह है।


अरविंद केजरीवाल के सोलह सवालों का मुख्य स्वर दरअसल यही है।जिसे अनसुना करके संघ परिवार दरअसल अपने ही पांवों में कुठाराघात कर रहा है।


समझ लीजिये कि तीसरा मोर्चे से नरेद्र मोदी का कुछ बनने बिगड़ने वाला नहीं है।अन्ना ममता युगलबंदी की वजह से बनने से पहले ही बिखर गया है तीसरा मोर्चा।हम कहने को मजबूर हैं कि विचारधारा और जनप्रतिबद्धता के मोर्चे पर सिरे से नाकाम वामदलों की न सिर्फ साख खत्म हुई है बल्कि उनका अपना वजूद भी संकट में है।बंगाल में हारकर वाम दल सिर्फ केरल के भरोसे भारत की राजनीति में कोई हस्तक्षेप कर ही नहीं सकते। इसीलिए ममता बनर्जी की जनविरोधी अगंभीर राजनीति के आगे वामदल इतने असहाय हो गये हैं।जिन क्षत्रपों के सहारे वामपहल है,वे भागते चूहों की जमात है और पानियों की हलचल मुताबिक एक जहाज छोड़कर दूसरे जहाज की सवारी करने के वे जन्मजात अभ्यस्त हैं।वाम विचारधारा के मुताबिक अस्मिताओं की यह राजनीति राज्यतंत्र में कोई फेरबदल तो करेगा ही नहीं ,बल्कि उनकी मौकापरस्त राजनीति में धर्मोन्मादी राष्ट्रवाद के विरुद्ध लोकतंत्र और धर्मनिपेक्षता अप्रासंगिक हो गये हैं।


जाहिर है कि कोई धर्मनिरपेक्ष मोर्चा नमोमयभारत को रोकने की हालत में कतई नहीं है।


अगर नमो सुनामी कोई रोक सकता है तो फिलवक्त वह आप है। एनजीओ तत्व तो सभी दलों में हैं।भारत सरकार के सारे कामकाज या तो कारपोरेट कर रहे हैं या फिर एनजीओ। महज इस तर्क से आप को खारिज कर देना इस वक्त भारी राजनीतिक मूर्खता होगी।


अगर वामदल नमोमय भारत के निर्माण के खतरे के प्रति तनिक भी सावधान हैं,तो आप को राजनीतिक दल के बजाय बदलाव के लिए जनआकांक्षाओं के के महाविस्फोट और अस्मिता राजनीति से ऊपर आम भारतवासियों और सामाजिक शक्तियों का मोर्चा समझना होगा,जहां पिटे हुए भ्रष्ट,ढपोरशंख, परंपरागत मौकापरस्त और अस्मिताओं के चेहरों के लिए कोई जगह फिलहाल नहीं है।


वाम दल अगर आप को बिना शर्त समर्थन देते हैं बिना सीटों के तालमेल के तो गजब हो सकता है।यह विकल्प मौकापरस्त क्षत्रपों के महागठजोड़ से हजार गुणा बेहतर ही नहीं होगा,बल्कि दलबदलुओं के सहारे तेज होती जा रही मोदी सुनामी को रोकने का ्ंतिम और निर्णायक प्रयास होगा।


आप के नेता क्या राजी हैं या नहीं,यह सवाल बेमतलब हैं।अगर आर्थिक सुधारों और कारपोरेट राज के खिलाफ आपकी लड़ाई है तो आपको यह समझ ही लेना चाहिए केशरिया राष्ट्र में खुदरा कारोबार को पहले ही हरी झंडी दे चुके मोदी अमेरिकी जायनवादी समर्थन से अगर इस देश का प्रधानमंत्री बने तो भारतीय संविधान जो बदलेगा सो बदलेगा,समता और सामाजिक न्याय का जो होगा सो होगा,धर्मोन्माद से देश जो लहूलुहान होगा सो होगा, बल्कि देश की संघीय ढांचा तहस नहस हो जायेगा और पूरा देश तब गुजरात होगा।


कैसा गुजरात, उसकी छवि अरविंद के सवालों की पृष्ठभूमि में साफ तौर पर उभरही आयी है।


इसके अलावा अर्थव्यवस्था पर अमेरिकी हितों का असर इतना ज्यादा होगा कि गरीबों की क्या कहें,छोटी पूंजी और मंझोली पूंजी वाले काोबरियं का सत्यानाश भी तय है।पीएफ पेंशन तक बाजार में जो जायेगा,सो जायेगा, विनिवेश और निजीकरण का जो तूफान आयेगा,सो आयेगा, लेकिन करप्रणाली का सारा बोझ आम जनता के कंधे पर डालने का जो स्त्रीविरोधी वर्णवर्चस्वी संघी आर्थिक एजंडा है,उसके तहत जाति धर्म निर्विशेष गरीबों का सफाया हो ही जायेगा। फिर आप अस्मिताओं के ठेकेदारों के मुंह ताकते रह जायेंगे जो अंततः घनघर वंशवादी हैं और जिनकी दृष्टि में भारत नहीं है।


कामरेड ज्योति बसु को प्रधानमंत्री न बनाकर कामरेडों ने जो ऐतिहासिक भूल की है, वाम आंदोलन को बंगाल,केरल और त्रिपुरा तक सीमाबद्ध करने का जो महापाप कर दिया है,उसके प्रायश्चित्त का मौका यही है क्योंकि यह केशरिया कयामत हर कीमत पर रोक दी जाये, यह लोक गणराज्य भारत के अस्तित्व का बुनियादी सवाल है।जो तीसरा मोर्चा हरगिज नहीं रोक सकता क्योंकि उसके सारे क्षत्रप या तो केशरिया हो चुके हैं या फिर केशरिया होने को हैं।


हमें आप की सीमाोओं का पूरा ख्याल है,उसके खतरों से भी हम वाकिफ हैं। लेकिन शायद हमारे सामने फिलवक्त आप के साथ मोर्चाबद्ध हो जाने या कम से कम उसके खिलाफ न होने के विकल्प के अलावा कोई दूसरा विकल्प है ही नहीं।


गौरतलब है कि दिल्ली के पूर्व सीएम और आम आदमी पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल ने नरेन्द्र मोदी को चिट्ठी लिखकर उन पर हमला बोला है. केजरीवाल ने मोदी से जवाब मांगते हुए पूछा है कि बीजेपी के उद्योगपति मुकेश अंबानी से क्या रिश्ते है? केजरीवाल ने पूछा है कि मोदी बताएं कि वह मुकेश अंबानी को किस दर पर गैस देंगे? उन्होंने कहा कि मोदी गैस के दाम पर अपना रुख साफ करें.

रैलियों में किसका पैसा?

मोदी से उनकी रैलियों को लेकर भी सवाल पूछा गया है. सवाल है, जनता में चर्चा है कि आपकी रैलियों में करोड़ों रुपये खर्च होते हैं. यह सारा पैसा किसका है? कुछ लोगों का कहना है कि मुकेश अंबानी आपको फंड कर रहे हैं. क्या यह सच है? अरविंद केजरीवाल ने मोदी को लिखी इस चिट्ठी को सार्वजनिक किया.

क्या अंबानी देते हैं हवाई यात्रा का खर्च?

केजरवाल ने सवाल उठाया है कि क्या हवाई यात्रा के लिए नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी को हेलॉकॉप्टर मुकेश अंबानी देते हैं? चिट्ठी में कहा गया है कि जनता के मन में शक है कि आपकी पार्टी और आपके मुकेश अंबानी से संबंध हैं, आप जवाब देकर इस शक को दूर करें. साथ ही राहुल गांधी और मोदी पर मुकेश अंबानी के हेलिकॉप्टरों में घूमने को लेकर भी सवाल किया गया है. केजरीवाल ने चिट्ठी पढ़ते हुए कहा, खबरों के मुताबिक मोदी और राहुल अंबानी के हेलिकॉप्टरों में घूमते हैं. जनता जानना चाहती है कि जहाज आपको फ्री में मिलते हैं या किराया देते हैं?

नहीं लेंगे अंबानी से चंदा

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय मंत्रियों ने मुकेश अंबानी को फायदा पहुंचाया है. उन्होंने आरोप लगाया कि अंबानी बंधुओं का विदेशों में कालाधन है. केजीरावाल ने कहा कि जब हमलोगों ने मुकेश अंबानी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई तो हमारे इस कदम का बीजेपी और कांग्रेस ने मिलकर विरोध किया. उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि मुकेश अंबानी से उनकी पार्टी चंदा नहीं लेगी.


बहरहाल अपने 'आम आदमी' स्टाइल के कारण दूसरे नेताओं से अलग दिखने वाले 'आप' संयोजक अरविंदकेजरीवाल ने आखिरकार विरोधियों को बड़ा हथियार दे दिया है। अरविंद केजरीवाल शुक्रवार को जयपुर से प्राइवेट विमान लेकर दिल्ली पहुंचे। गुजरात से जयपुर पहुंचने के लिए केजरीवाल ने रेलीगेयर के प्राइवेट प्लेन का सहारा लिया। उनके विमान से सफर करने पर उनके विरोधियों ने उनपर जमकर सवाल दागे। लेकिन, केजरीवाल ने साफ कर दिया उनके विमान का खर्चा एक मीडिया ग्रुप ने किया है। क्योंकि, उन्हें मीडिया हाउस के कार्यक्रम में पहुंचना था, लेकिन वहां से कोई फ्लाइट नहीं होने के कारण मीडिया हाउस ने विमान की व्यवस्था की थी। कार्यक्रम में पहुंचने के बाद केजरीवाल ने कहा कि आगामी लोकसभा त्रिशंकु होगी। किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिलेगा। उधर, मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने को लेकर भी मीडिया हाउस के कार्यक्रम में केजरीवाल से सवाल किया गया। लेकिन, केजरीवाल इस मसले पर साफ कर दिया कि वो कहां से चुनाव लड़ेंगे ये बाद में तय किया जाएगा। इससे पहले पार्टी के मनीष सिसौदिया ने कहा था कि मोदी जहां से चुनाव लड़ेंगे केजरीवाल वहीं से चुनाव लड़ेंगे, लेकिन पहले भाजपा ये तय करे कि मोदी को चुनाव लड़ाना कहां से है।

पार्टी का कहना है कि प्राइवेट प्लेन इंतजाम आयोजनकर्ता ने किया है। पार्टी का इस खर्च से कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन, आयोजनकर्ता ने इस मसले पर टिप्पणी करने से इनकार किया है। केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली के लिए कोई फ्लाइट नहीं थी तो आयोजनकर्ताओं ने निजी विमान का इंतजाम कराया। इस दौरान मीडिया हाउस के कार्यक्रम में बोलते हुए केजरीवाल ने अपने विरोधियों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मेरे विमान का खर्चा तो मीडिया हाउस ने किया, जिसे उन्होंने सार्वजनिक भी कर दिया, लेकिन मोदी और राहुल गांधी के विमान का खर्चा कौन उठाता है। उन्होंने कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि दिल्ली में सरकार रहते उनकी पार्टी ने बहुत काम किए। आगामी लोकसभा में भी ऐसा ही करने का प्लान है। लोकसभा में किसी को बहुमत नहीं मिलेगा। लोकसभा भी दिल्ली विधानसभा की तरह त्रिशंकु होने जा रही है।

विरोधियों से पूछा सवाल

केजरीवाल ने अपनी प्राइवेट विमान यात्रा पर उठ रहे सवालों को भी चुनावी हथियार बना लिया। केजरीवाल ने ट्वीट किया कि जिस तरह उन्होंने अपनी यात्रा के खर्च को सार्वजनिक किया है, वैसे ही राहुल और मोदी भी अपने खर्च का ब्योरा दें।

कुछ घंटों पहले मोदी पर उठाया था सवाल

गुजरात में केजरीवाल ने अपने सोलह सवालों में मोदी से यह भी पूछा कि देशभर में वह निजी विमानों पर जो पैसा खर्च करते हैं, उसका खर्च कहां से आता है। ये हेलिकॉप्टर किसके है। जिन निजी विमानों में आप देशभर में घूमते हैं, वे किसने आपको दिए हैं।

राहुल से भी पूछा था यही सवाल

कुछ महीनों पहले अरविंद केजरीवाल ने एक जनसभा में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को चुनौती देते हुए सवाल किया था कि वह राहुल गांधी के हेलिकॉप्टर और अन्य हवाई यात्राओं में आने वाले खर्च का हिसाब दें।

कांग्रेस ने साधा निशाना

कांग्रेस ने केजरीवाल की इस विमान यात्रा पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेता ने कहा कि केजरीवाल केवल दूसरों पर आरोप लगाना जानते हैं।

बीजेपी नेता विजेंद्र गुप्ता ने बोला हमला

बीजेपी नेता विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि केजरीवाल खुद को दबा-कुचला आदमी कहकर जनता को भ्रमित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केजरीवाल यह भी साफ करें कि आयोजनकर्ताओं ने उनकी निजी यात्रा का खर्च क्यों उठाया।



Aam Aadmi Party

about an hour ago

Arvind Kejriwal asks 16 questions to Narendra Modi. He has disclosed these 16 questions in media.


Arvind Kejriwal on the way to meet Narendra Modi to ask these 16 questions. Police stopped him at Gandhinagar giving reason that Arvind is going without appointment.


These 16 questions are common people's problem in Gujarat. Will Narendra Modi answer?


Tweet using #AKasksModiPhoto: Arvind Kejriwal asks 16 questions to Narendra Modi. He has disclosed these 16 questions in media.     Arvind Kejriwal on the way to meet Narendra Modi to ask these 16 questions. Police stopped him at Gandhinagar giving reason that Arvind is going without appointment.    These 16 questions are common people's problem in Gujarat. Will Narendra Modi answer?    Tweet using #AKasksModi

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