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Thursday, January 30, 2014

वरना गरदन पर तो छुरी अब भी तैयार है बस,चुनाव से निपटने की देरी है! लेकिन जब तक इस कारपोरेट जायनवादी खुफिया इंतजाम को पूरी तरह खत्म नहीं कर दिया जाता, कृपया बिन आधार बारह गैस सिलिंडर का जश्न मत मनाइये।

वरना गरदन पर तो छुरी अब भी तैयार है बस,चुनाव से निपटने की देरी है!


लेकिन जब तक इस कारपोरेट जायनवादी खुफिया इंतजाम को पूरी तरह खत्म नहीं कर दिया जाता, कृपया बिन आधार बारह गैस सिलिंडर का जश्न मत मनाइये।


पलाश विश्वास


जैसा कि हम बार बार लिखते रहे हैं,जरुरी नागरिक सेवाओं के लिए आधार बायोमेट्रिक डिजिटल रोबोटिक पहचान जरुरी नहीं है।सब्सिडी का खेल अगले बजट में खत्म है और गैस सिलिंडर के लिए आधार कार्ड जरूरी नहीं है।नाटो,पेंटागन ,कारपोरेटघरानों और माफिया गिरोहों की भारतीय नागरिकों की खुफिया निगरानी का यह चाकचौबंद इंतजाम है।ममता बनर्जी ने दिल्ली में दंगा सरकार को रोकने की युद्धघोषणा कर दी है तो कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस ने कांग्रेस का साथ छोड़ने से साफ इंकार कर दिया है।जयललिता, लालू, मायावती, मुलायम,पासवान,नीतीश कुमार को तरह तरह से साध लेने के रंगबिरंगे दांव के फेल होने से कांग्रेस बैकफुटपर है और लोकलुभावन तमाशा करने में लगी है तो आप को दिल्ली से बेदखल करने की हर कोशिश के बावजूद अगर 350 सीटों पर चुनाव लड़ने में वे कामयाब हो जाये तो इतना आसान भी नहीं होगा नमोमयभारत का निर्माण।दीदी के खुले युद्ध के घोषणा से चायविमर्श को झटका तो लगा है।


गौरतलब है कि इसी बीच तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे. जयललिता को उस समय झटका लगा, जब सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उन्हें और उनकी सहयोगी एस. शशिकला को आरोप मुक्त करने से इंकार कर दिया। इन दोनों पर 1991 से 94 के दौरान इनकम टैक्स रिटर्न नहीं भरने के तीन मामले चल रहे हैं। लोअर कोर्ट में सुनवाई पूरी करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने चार महीने की डेडलाइन तय कर दी। जस्टिस के. एस. राधाकृष्णन की अगुआई वाली बेंच ने जयललिता और शशिकला की मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। मद्रास हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ कार्यवाही रद्द करने से मना कर दिया था।


अब मायावती की घेराबंदी भी तय है।


जरुरत है कि इस देश की जनता अपनी आंखें खुली रखें,कान भी खुला रखें।निष्क्रिय इंद्रियों से काम लें और कारपोरेट राज के खिलाफ पार्टीबद्ध खोमों में बंटने के बजायजनपक्षधर मोर्चा का निर्माण करें वरना गरदन पर तो छुरी अब भी तैयार है बस,चुनाव से निपटने की देरी है।


गौर करें कि अमेरिकी हित कहां दांव पर हैं क्योंकि  अमेरिका के पूर्व राजदूत फ्रैंक विस्नर ने कहा है कि भारत के साथ अमेरिका के संबंध इतने महत्वपूर्ण हैं कि भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के अगले प्रधानमंत्री बनने पर इसे रोका नहीं जा सकता। वैसे भी अमेरिकी कारोबारियों ने स्वीकार कर लिया है कि उन्हें उनके साथ व्यापार करना होगा।

अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के उप मंत्री रह चुके फ्रैंक ने कहा, 'मोदी काबिल व्यक्ति हैं। हमें यह देखना होगा कि अगर वह शीर्ष पर पहुंचते हैं तो किस प्रकार काम करते हैं।' उन्होंने यह बात अमेरिका-भारत संबंधों पर एशिया सोसाइटी पालिसी इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित टेलीक्रांफ्रेंस के दौरान कही।

उन्होंने कहा, 'मैं समझता हूं कि अमेरिकी कारोबारियों और महत्वपूर्ण भारतीय तबके ने स्वीकार कर लिया है कि उन्हें उनके साथ काम करना होगा। भारत के साथ रिश्ते इतने अधिक महत्वपूर्ण हैं कि किसी एक व्यक्ति से जुड़े मुद्दे पर इसे रोका नहीं जा सकता।' गौरतलब है कि अमेरिका ने 2002 के दंगों को लेकर गुजरात के मुख्यमंत्री मोदी को 2005 में राजनयिक वीजा देने से इन्कार कर दिया था। अमेरिका लगातार कहता आ रहा है कि मोदी के संबंध में उसकी लंबे समय से चली आ रही वीजा नीति में कोई परिवर्तन नहीं होगा। हालांकि वह वीजा आवेदन करने के लिए स्वतंत्र हैं और उन्हें किसी भी अन्य आवेदक की तरह समीक्षा का इंतजार करना होगा।



सावधान हो जाइये कि छनछनाते विकास के गाजरों की नय़ी फसल तैयार हैं जैविकी ,जिसके संक्रमण का आप पर पोटाशियम सायोनाइड से ज्यादा असर हो जाने की आशंका है।ध्यान दें कि गरीबी रेखा के नीचे और मध्य वर्ग के बीच फंसे लोगों के पास पहुंचते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने आज कहा कि कांग्रेस इन 70 करोड़ लोगों को बेहतर जीवन और मूलभूत सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करेगी। राहुल लोकसभा चुनाव के घोषणापत्र को लेकर श्रमिकों और पटरी दुकानदारों से सीधी प्रतिक्रिया ले रहे थे। राहुल ने कहा, 'नीति का मतलब यह होना चाहिए कि देश के 70 करोड़ लोगों के पास ठोस आधार हो ताकि वे आश्वस्त हो सकें कि चाहे जो भी परिस्थिति हो उनकी स्थिति उस आधार के नीचे न जाने पाए।' उनकी यह टिप्पणी रायुपर में दिए भाषण के एक दिन बाद आई है ।


इस पर भी ध्यान दें कि   केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने गुरूवार को भारतीय जनता पार्टी से आर्थिक नीतियों और खासकर बहु ब्रांड खुदरा क्षेत्र में एफडीआई पर अपना रूख स्पष्ट करने को कहा। चिदंबरम ने एक बयान जारी कर भाजपा के प्रधामंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी से वित्तीय घाटा, चालू खाता घाटा और मौद्रिक नीति जैसी देश के सामने मौजूद प्रमुख आर्थिक चुनौतियों पर अपना रूख स्पष्ट करने को कहा।


चिदंबरम ने कहा,मेरे पास और भी सवाल हैं, मध्य प्रदेश और गुजरात जीएसटी का क्यों विरोध करते हैं और सहमति नहीं बनने दे रहे हैं। मोदी क्यों प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर खाद्य सुरक्षा कानून का विरोध करते हैं। चिदंबरम ने कहा,यदि भारतीय स्वामित्व वाली बहुब्रांड खुदरा कंपनी से नौकरी नहीं घटती हैं, तो बहुब्रांड खुदरा क्षेत्र में एफडीआई से नौकरियां कैसे घटेंगी। इस सप्ताह के शुरू में समाचार चैनल बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में चिदंबरम ने नरेंद्र मोदी के आर्थिक ज्ञान को चुनौती देते हुए कहा था कि उसे डाक टिकट के पीछे मौजूद जगह में लिखा जा सकता है।


इस पर जवाबी हमला करते हुए भाजपा नेता अरूण जेटली ने बुधवार को कहा था कि वित्त मंत्री सोचते हैं कि सभी आर्थिक ज्ञान के वे ही संरक्षक हैं जबकि देश की आर्थिक स्थिति गर्त में जा रही है। इस पर चिदंबरम ने जवाब में कहा, मुझे उम्मीद थी कि जेटली नरेंद्र मोदी के बचाव में आगे आएंगे। चिदंबरम ने पूछा,उन्होंने हालांकि मेरे दूसरे सवाल का जवाब नहीं दिया है। मोदी ने क्यों वित्तीय घाटा,चालू खाता घाटा और मौद्रिक नीति पर कुछ नहीं कहा है।


जनविरोधी आर्थिक सुधारों की वजह से दिल्ली की सत्ता से बेदखल होने के कगार पर खड़ी कांग्रेस पार्टी,उसके प्रधानमंत्रित्व के दावेदार राहुल गांधी और कांग्रेस की राष्ट्रीय सत्ता को बचाने के खातिर गेम चेंजर वौट बटोरो कैश सब्सिडी महाविध्वंसी आधार परिकल्पना को फिलहाल स्थगित कर दिया है।


लेकिन जब तक इस कारपोरेट जायनवादी खुफिया इंतजाम को पूरी तरह खत्म नहीं कर दिया जाता, कृपया बिन आधार बारह गैस सिलिंडर का जश्न मत मनाइये।


गौरतलब है कि जनता को सब्सिडी के नकद अंतर की संप्रग सरकार की बहुप्रचारित योजना को गुरुवार को एक धक्का लगा। इस योजना को पासा पलटने वाली योजना बताया गया था, जबकि सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर पर दी जाने वाली सब्सिडी के नकद कार्यक्रम को आज स्थगित करने की घोषणा की। पर लोगों के लिए राहत के एक निर्णय में सब्सिडीशुदा गैस सिलेंडर का कोटा सालाना सालाना 9 से बढ़ाकर 12 दिया गया है।


गौरतलब है कि सब्सिडी वाले एलपीजी गैस सिलिंडरों की संख्या 9 से बढ़ाकर 12 कर दी गई है। कैबिनेट की बैठक में गुरुवार को यह फैसला किया गया कि एक अप्रैल से 12 सब्सिडी वाले सिलिंडर दिए जाएंगे और इस वित्त वर्ष के बचे हुए दो महीनों (फरवरी-मार्च) में भी 2 सिलिंडर सब्सिडी वाली दर पर ही दिए जाएंगे। केंद्रीय कैबिनेट ने इस फैसले को मंजूरी दे दी है।


इसी बीच  डीजल पर हर वर्ष हजारों करोड़ रुपये की दी जा रही सब्सिडी के औचित्य पर बहुत ही पुख्ता सवाल उठ खड़े हुए हैं। किसानों और खेती बाड़ी के नाम पर दी जाने वाली इस सब्सिडी का लगभग एक तिहाई हिस्सा कार चलाने वाले और उद्योग जगत ले जाते हैं। सिर्फ चालू वित्त वर्ष 2013-14 के दौरान महंगी एसयूवी और जनरेटर चलाने वाले 28,000 करोड़ रुपये की डीजल सब्सिडी फूंक जाएंगे। जिन किसानों के नाम पर पूरी सब्सिडी का खेल होता है वे महज 13 फीसद डीजल ही इस्तेमाल करते हैं। डीजल खपत को लेकर नए आंकड़े पेट्रोलियम मंत्रालय और शोध एजेंसी नील्सन के ताजा सर्वे से प्राप्त हुए हैं।


बहरहाल  जमीनी हकीकत को नजरअंदाज कर लोकलुभावन नीति लागू करने की संप्रग सरकार की खोखली कोशिश का गुरुवार को पर्दाफाश हो गया। जिस स्कीम को सरकार और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी आगामी आम चुनाव के लिए सबसे बड़ा 'गेमचेंजर' बता रहे थे उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में आधार कार्ड के जरिये देश भर में सीधे ग्राहकों के खाते में एलपीजी सब्सिडी देने की महत्वाकांक्षी योजना को स्थगित करने का फैसला किया गया।


गौर करें कि इस कारपोरेटराज का असली एजंडा दरअसल क्या है।


वित्त मंत्रालय ने कहा है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के क्यूई 3 टैंपरिंग के फैसले से भारतीय बाजारों पर असर नहीं होगा। वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सरकार और रिजर्व बैंक सभी जरूरी कदम उठाएंगे।


वित्त मंत्रालय ने एक बयान में गुरुवार को कहा भारत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक सतर्क रहेंगे और वित्तीय बाजारों में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए हर जरूरी कदम उठाएंगे।


अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने बुधवार को अपनी बॉन्ड खरीद योजना में और 10 अरब डॉलर की कटौती करने का फैसला किया। अब हर माह 65 अरब डालर के बांड खरीदे जाएंगे जबकि पिछले माह 75 अरब डॉलर के बॉन्ड खरीदे गए थे।


बहरहाल सब्सिडी वाले एलपीजी गैस सिलिंडरों की संख्या 9 से बढ़ाकर 12 कर दी गई है। कैबिनेट की बैठक में गुरुवार को यह फैसला किया गया कि एक अप्रैल से 12 सब्सिडी वाले सिलिंडर दिए जाएंगे और इस वित्त वर्ष के बचे हुए दो महीनों (फरवरी-मार्च) में भी 2 सिलिंडर सब्सिडी वाली दर पर ही दिए जाएंगे। केंद्रीय कैबिनेट ने इस फैसले को मंजूरी दे दी है।


गौरतलब है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने हाल में ही एआईसीसी की बैठक के दौरान इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था और आखिरकार कैबिनेट की बैठक में राहुल के मांग पर मुहर लगाई दी गई।


इस फैसले के तहत 2013-14 में सब्सिडी वाले 9 सिलिंडरों के अलावा फरवरी, मार्च में एक-एक और सिलिंडर सब्सिडी पर दिए जाएंगे।


सूचना और प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि अप्रैल 2014 से सब्सिडी पर हर साल 12 सिलिंडर दिए जाएंगे। केंद्र सरकार के मुताबिक एलपीजी सिलेंडरों के करीब 15 करोड़ ग्राहक हैं।


इसी बीच देश के शेयर बाजारों में गुरुवार को गिरावट दर्ज की गई। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 149.05 अंकों की गिरावट के साथ 20,498.25 पर और निफ्टी 46.55 अंकों की गिरावट के साथ 6,073.70 पर बंद हुआ। बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 155.56 अंकों की गिरावट के साथ 20,491.74 पर खुला और 149.05 अंकों या 0.72 फीसदी की गिरावट के साथ 20,498.25 पर बंद हुआ। दिन भर के कारोबार में सेंसेक्स ने 20,528.41 के ऊपरी और 20,343.78 के निचले स्तर को छुआ।

गौर जरुर करें कि कराधान संबंधी मामलों में वैश्विक निवेशकों की आशंका दूर करते हुए वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि भारत में स्थिर और विरोधभाव से मुक्त कर व्यवस्था है। उन्होंने यह भी कहा कि देश में विवाद निपटान की एक निष्पक्ष निपटान प्रणाली भी काम करती है।


रियाद में दो दिन की आधिकारिक यात्रा पर आए चिदंबरम ने कहा कि भारत सरकार द्वारा कराधान के संबंध में उठाए गए कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाई गई सबसे अच्छी परिपाटियों के अनुरूप हैं। उन्होंने अरब न्यूज के साथ साक्षात्कार में कहा कि हर विकासशील देश को संसाधानों, विशेष रूप से कर राजस्व की जरूरत होती है और मैं कह चुका हूं कि हमारी नीति है कि कर की दरों में स्थिरता हो, कानून स्पष्ट हो, कर व्यवस्था विरोधभाव से मुक्त हो और विवाद निपटान प्रणाली निष्पक्ष हो। यह कहे जाने पर कि भारत में निवेशकों से ज्यादा कर वसूलने के लिए नए तरीके ढूंढे जा रहे हैं, चिदंबरम ने कहा कि उन्हें ऐसी चिंता की कोई वजह नहीं दिखती।


वित्त मंत्री ने हालांकि यह भी कहा कि कराधान के संबंध में भारत द्वारा उठाए गए कुछ कदमों को लेकर कुछ चिंताएं व्यक्त की गई हैं जो आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) की चर्चाओं में झलकती हैं।

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रेलवे में एफडीआई को बढ़ाने की तैयारी में सरकार

सरकार अगले महीने द्रुतगामी रेल प्रणालियों तथा माल ढुलाई के लिए समर्पित लाइनों में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की मंजूरी दे सकती है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) ने इस बारे में कैबिनेट के विचारार्थ अंतिम परिपत्र वितरित किया है।


इसमें उपशहरी गलियारों, तीव्र गति रेल प्रणाली तथा बंदरगाहों, खानों व बिजली संयंत्रों को जोड़ने वाली ढुलाई लाइनों में एफडीआई अनुमति का प्रस्ताव है। हालांकि, मौजूदा यात्री व माल ढुलाई लाइनों को विदेशी निवेशकों के लिए नहीं खोला जाएगा।


डीआईपीपी का मानना है कि भारतीय रेलवे नेटवर्क को आधुनिक, मजबूत बनाने और इसका विस्तार करने की आवश्यकता है। इसके लिये इसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी काफी महत्वपूर्ण हो जाती है। पुल पर बनने वाली रेलवे लाइनों, उच्च तकनीक और अधिक पूंजी वाली रेल परियोजनाओं में निजी क्षेत्र की भागीदारी की जरूरत है।


इन क्षेत्रों में 100 प्रतिशत तक एफडीआई को मंजूरी दी जाएगी केवल संयुक्त उद्यम मॉडल को छोड़कर जहां रेलवे की कम से कम 26 प्रतिशत इक्विटी होगी। इस एफडीआई के लिए एफआईपीबी की मंजूरी की जरूरत नहीं होगी। वर्तमान में त्वरित जन परिवहन प्रणाली को छोड़कर रेलवे में किसी भी तरह के एफडीआई की अनुमति नहीं है।


विभाग ने ढांचागत यानी अवसंरचना शब्द की परिभाषा का भी विस्तार करने का सुझाव दिया है ताकि इसमें रेलवे लाइनें और रेलवे साइडिंग को भी शामिल किया जा सके।

12,000 करोड़ की डीजल सब्सिडी निजी कार वालों को!

नवभारत टाइम्स | Jan 30, 2014, 11.29AM IST

नई दिल्ली

देश में हर साल बिकने वाले करीब सात करोड़ टन डीजल में 13.15 प्रतिशत डीजल की खपत निजी कारों में होती है और इससे 12,100 करोड़ रुपये की सब्सिडी का लाभ इन कारों का इस्तेमाल करने वालों को मिलता है।


डीजल की सर्वाधिक 70 प्रतिशत की खपत परिवहन क्षेत्र में होती है, इसमें भी करीब 30 प्रतिशत डीजल की खपत कार, विशेष उपयोगी वाहनों और तिपहिया वाहनों में होती है। कृषि कार्यों में केवल 13 प्रतिशत डीजल ही लगता है। 9 प्रतिशत उद्योगों में तथा करीब दो प्रतिशत खपत मोबाइल टावरों में होती है।


सरकार डीजल की बिक्री नियंत्रित दाम पर करती है और इस समय इसे तेल कंपनियों को प्रति लीटर 8.47 रुपये की कमाई का नुकसान हो रहा है। वर्ष 2012-13 में डीजल पर मूल्य नियंत्रण से कंपनियों को कुल 92,061 करोड़ रुपये का नुकसान रहा जिसकी भरपाई बजट से नकद सब्सिडी तथा अन्य स्रोतों से की गई।



पेट्रोलियम मंत्रालय के पेट्रोलियम विश्लेषण एवं योजना प्रकोष्ठ (पीपीएसी) के लिए मैसर्स नीलसेन इंडिया प्रा. लिमिटेड द्वारा किए गये अध्ययन में यह जानकारी सामने आई है। इसमें कहा गया है कि डीजल की सबसे ज्यादा 70 प्रतिशत खपत ट्रांसपोर्ट सेक्टर में होती है और इसमें भी कार, यूटिलिटी व्हीकल्स (यूवी) और तिपहिया वाहनों में सबसे ज्यादा 28.48 प्रतिशत डीजल खपत होती है।


- कहां कितनी खपत


पेट्रोल के मामले में..


पेट्रोल के मामले में 99.6 प्रतिशत खपत केवल परिवहन क्षेत्र में होती है। इसमें भी सबसे ज्यादा 61.42 प्रतिशत दोपहिया वाहनों में और 34.33 प्रतिशत कारों में होती है। तिपहिया वाहनों में पेट्रोल की खपत मात्र 2.34 प्रतिशत ही है। वर्ष 2012-13 में देश में कुल 6,90,80,000 टन डीजल की बिक्री हुई जबकि 1,57,44,000 टन पेट्रोल की बिक्री हुई। देश में पेट्रोलियम पदार्थों की कुल खपत में 44 प्रतिशत हिस्सा डीजल का है जबकि पेट्रोल का हिस्सा मात्र 10 प्रतिशत ही है। रिपोर्ट के अनुसार ओडिशा, बिहार और राजस्थान में दोपहिया वाहनों में पेट्रोल की खपत 70 प्रतिशत से भी अधिक है।


डीजल के मामले में...


डीजल की सबसे ज्यादा खपत भारी और हल्के वाणिज्यिक ट्रकों के वर्ग में 28.25 प्रतिशत है। उसके बाद निजी कारों और उपयोगी वाहनों (यूवीज) में 13.15 प्रतिशत, वाणिज्यिक कारों तथा ऐसे ही छोटे वाहनों में 8.94 प्रतिशत तथा तिपहिया वाहनों में 6.39 प्रतिशत खपत होती है। बसों में मात्र 9.55 प्रतिशत डीजल खपत है जबकि रेलवे मात्र 3.24 प्रतिशत डीजल खपत करता है। अध्ययन के अनुसार कृषि क्षेत्र भी डीजल का बड़ा उपभोक्ता है। इस क्षेत्र में कुल डीजल खपत में से 13 प्रतिशत का उपयोग होता है। ट्रैक्टरों द्वारा 7.4 प्रतिशत, खेतों के पंपसेट में 2.9 प्रतिशत और दूसरे कृषि उपकरणों के इस्तेमाल में 2.7 प्रतिशत डीजल की खपत होती है।


लोकसभा चुनाव में अकेले उतरेगी तृणमूल

कोलकाता से दैनिक जागरण ने खबर दी है कि लोकसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड मैदान में भारी भीड़ जुटाकर एक बार फिर पश्चिम बंगाल में अपनी ताकत का अहसास करा दिया। उन्होंने बिना किसी दल का सहयोग लिए अकेले दम पर आगामी आम चुनाव लड़ने का ऐलान किया। साथ ही जनता से 'दिल्ली चलो-देश गढ़ो-बंगाल गढ़ो' का नारा भी बुलंद कराया। भाजपा व कांग्रेस दोनों ही पार्टियों को अयोग्य करार देते हुए बंगाल मुख्यमंत्री ने एक को दंगाई तो दूसरे को भ्रष्टाचार में लिप्त दल कहा और दिल्ली में परिवर्तन के तौर पर तृणमूल को सबसे बेहतर विकल्प बताया।

हजारों की भीड़ से उत्साहित ममता ने गुरुवार को कांग्रेस व भाजपा पर एकसाथ निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का विकल्प भाजपा नहीं है और न ही भाजपा का कांग्रेस। दिल्ली को राजतंत्र व भ्रष्टाचार से मुक्त करने और सांप्रदायिक दलों को सत्ता से दूर रखने के लिए फेडरल फ्रंट के नेतृत्व में जनहितैषी गणतांत्रिक सरकार बनानी होगी। जिसमें तृणमूल कांग्रेस बड़ी भूमिका निभाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र से एक पैसे की मदद नहीं मिलने के बावजूद पिछले ढाई वषरें में उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा व रोजगार के क्षेत्र में बहुत कुछ किया है। उन्होंने जनता से तृणमूल को सभी 42 सीटों पर जिताने का आह्वान किया। माकपा पर निशाना साधते हुए कहा कि इस दल ने 34 वषरें में राज्य को पतन के गर्त में ढकेल दिया है। अपने 50 मिनट के भाषण में ममता अधिकतर समय दिल्ली परिवर्तन की बात करती रहीं। इसके लिए वे बंगाल के बाहर भी प्रचार करने जाएंगी और अन्य राज्यों में भी चुनाव की ताल ठोकेंगी। उन्होंने रैली का समापन राष्ट्रगान के साथ किया।

तीन माह बाद मिल सकता है बंगाल को नया नाम

ममता बनें प्रधानमंत्री : महाश्वेता देवी

कोलकाता : प्रसिद्ध लेखिका महाश्वेता देवी ने कमजोरों के लिए बंगाल मुख्यमंत्री के कामकाज को सराहते हुए उन्हें आगामी आम चुनाव के बाद देश का प्रधानमंत्री बनते देखने की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा कि 'मुझे ममता पर पूरा विश्वास है और उन्हें दिल्ली से देश की सत्ता संभालते देखना चाहती हूं।'

बड़ी खबर...बैंकों ने तीन साल में गंवाए 22 हजार करोड़ रुपये


दैनिक हिंदुस्तान की खबर है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को पिछले तीन सालों में 22 हजार 743 करोड़ रुपये का घाटा उठाना पड़ा है। यह घाटा केंद्र सरकार की सर्व शिक्षा अभियान की राशि में फर्जी निकासी के चलते हुआ है।


हिन्दुस्तान टाइम्स को आरटीआई के जवाब में पता चला है कि इस योजना के तहत बड़े पैमाने पर राशि की हेराफेरी हुई है। इंडियन ओवरसीज बैंक को अप्रैल 2010 से सितंबर-2013 के बीच 3033 करोड़ का घाटा उठाना पड़ा है। ये घाटा बैंक के शुद्ध लाभ 2848 करोड़ रुपये से भी ज्यादा है। वहीं एसबीआई को 2712 करोड़ का घाटा हुआ।


इस हेराफेरी में 27 सरकारी बैंकों के 6000 कर्मचारी जांच के घेरे में हैं। कुछ मामलों में तो बैंकों के प्रबंध निदेशक और निदेशक भी शक के घेरे में हैं। उदाहरण के लिए मई 2013 में इंडियन बैंक के पूर्व सीएमडी एम गोपालकृष्णन को सीबीआई कोर्ट के जज ने दोषी पाया।

इन पर बिना पर्याप्त जमानत के अलग-अलग एजेंसियों को राशि जारी करने का आरोप है। सीबीआई जांच से पता चला कि कई बैंकर अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर बिना पर्याप्त कागजी कार्रवाई के लोगों को कर्ज देते हैं। कई बार नकली कागजातों का इस्तेमाल होता है।


Aadhaar-linked LPG subsidy transfer suspended; LPG cylinder cap hiked to 12

The government suspended the transfer until a new committee created to analyse the scheme submits its report

The move comes days after Rahul Gandhi, vice president of the ruling Congress party, had demanded raising the ceiling. Photo: Priyanka Parashar/Mint

New Delhi: The government on Thursday decided to suspend transfer of cooking gas subsidy directly to consumer accounts linked to the Aadhaar unique identity number until a new committee created to analyse the scheme submits its report.



"This is in view of the ground realities and the sentiments that there is a lot of inconvenience with getting the subsidy (through Aadhaar-linked bank accounts)," oil minister M. Veerappa Moily said after a cabinet meeting. "Subsidies will be deposited with the oil marketing companies."

This was decided even as the government raised the cap on the number of subsidized cooking gas cylinders per household per year to 12 from nine. Which means consumers will get two additional subsidized cylinders in the year ending March and 12 subsidized cylinders henceforth. The move comes after sustained pressure to raise the ceiling by the ruling alliance after Congress vice-president Rahul Gandhi demanded that the cap be raised to 12 at the All-India Congress committee meeting on 17 January. Raising the cap would raise the subsidy by Rs.5,000 crore.

"Since there have been representations coming from across the country to the petroleum ministry, it has been decided that the Aadhaar-linked programme for reimbursing the subsidy will be looked into by a committee," said information and broadcasting minister Manish Tewari, adding that this is not an election-related decision.

The scheme to transfer welfare payments directly to bank accounts currently requires accounts linked to Aadhaar numbers so that only a persons identified in beneficiary databases receive the payment.

Where benefits payees don't have Aadhaar numbers or have not linked their numbers to their bank account, the scheme's roll-out slows.

"The entire ambit of the Aadhaar-linked scheme will be analysed and we will revert to the old system where the consumer has to pay the subsidized price. The 1.7 crore (17 million) people linked to the (direct transfer) paradigm will also get cylinders at subsidized prices," Tewari said, clarifying that only the direct transfer of cooking gas subsidy has been put on hold and the scheme will continue for other welfare payments like scholarships that were started on 1 January 2013.

This comes even as the government is facing multiple challenges to its scheme to transfer welfare payments directly to bank accounts of those entitled.

On 23 September, the Supreme Court passed an interim order that was widely seen as challenging the programme that makes Aadhaar-linked bank accounts the only way to receive subsidies and payments after expiry of the grace period.

The court asked government agencies and states to reply to the contention of the batch of petitions filed against the Aadhaar programme's continuance in the absence of a law.

The court had said, "No person should suffer for not getting the Aadhaar card in spite of the fact that some authority had issued a circular making it mandatory and when any person applies to get the Aadhaar card voluntarily, it may be checked whether that person is entitled for it under the law and it should not be given to any illegal immigrant."

To be sure, the interim order has not stopped the phased launch schedule of the scheme in more districts, though it has faced setbacks, with questions raised as to whether the court will strike it down.

On 28 January, the apex court did not entertain a contempt petition filed by some of the parties to the original batch of petitions, said a senior government official on condition of anonymity.

"Sixteen states, including those ruled by opposition parties, have filed affidavits in the court. However, none have said they are unwilling to continue with Aadhaar-linked transfer of benefits," said the official.

The court will hear the case, including the states' affidavits, on 4 February.

http://www.livemint.com/Politics/tN6NwWEqhsuQA65pdZDHWI/LPG-subsidy-cap-raised-from-9-to-12.html


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