Twitter

Follow palashbiswaskl on Twitter

Thursday, June 20, 2013

तालाबों पर घर, नदी किनारे मॉल...तभी तो है ये हालः सुनीता

तालाबों पर घर, नदी किनारे मॉल...तभी तो है ये हालः सुनीता


नई दिल्ली। विकास की जो मानसिकता आज तक रही है, उसी के चलते उत्तराखंड को अभूतपूर्व आपदा से दो चार होना पड़ रहा है। ये कहना है सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट की डायरेक्टर सुनीता नारायण का। पर्यावरण के लिए लंबे समय से काम कर रहीं सुनीता का कहना है कि जून के महीने में बाढ़ आना बेहद चौंकाने वाला है। प्रकृति से खिलवाड़ इसका एक बड़ा कारण है। आज धड़ल्ले से तालाबों के ऊपर घर बनाए जा रहे हैं। नदियों के किनारों पर मॉल खड़े किए जा रहे हैं। इस त्रासदी का एक और बड़ा कारण हाइड्रोपावर है।

सुनीता का कहना है कि अब समय आ गया है कि इस गंभीर विषय पर सरकार सोचे। प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए बांध जरूरी हैं, लेकिन ये बांध कहां बनें इस पर सही फैसला लेना होगा। कुदरत का जो खेल है उसको मनुष्य ने ही अपनी हरकतों से बिगाड़ा है। विकास और पर्यावरण के बीच समन्वय बनाकर चलना होगा।

तालाबों पर घर, नदी किनारे मॉल...तभी तो है ये हालः सुनीता

उन्होंने कहा कि जब दिल्ली में 50 मिलीमीटर की बारिश में दिल्ली एयरपोर्ट का टर्मिनल डूब सकता है तो फिर 200 मिलीमीटर की बारिश में हिमालय में कुदरत का कहर लाजिमी है। उत्तराखंड में टूरिज्म का हब है लेकिन ये सोचना होगा कि किस तरह से धर्म टूरिज्म होना चाहिए। आखिर में उन्होंने कहा कि कुदरत के इस कहर से निपटने का एकमात्र उपाय अच्छी प्लानिंग है।


(IBNkhabar के मोबाइल वर्जन के लिए लॉगआन करें m.ibnkhabar.com पर!)

No comments:

Post a Comment

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

Welcome

Website counter

Followers

Blog Archive

Contributors