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Friday, November 15, 2013

Demise of Sachin Industry! सचिन तेंदुलकर पर लगा है सबसे बड़ा सट्टा अलविदा सचिन इंडिया সচিন তেন্ডুলকরের বিদায়ী টেস্টে আনন্দবাজারে কলাম লিখছেন সৌরভ গঙ্গোপাধ্যায় ‘सचिनने निवृत्तीची घाई केली. त्याने आणखी किमान वर्षभर क्रिकेट खेळायला हवं होतं,’ असे सांगतानाच, ‘सचिनचे कर्तृत्व बघता त्याला ‘भारतरत्न’ हा किताब मिळायलाच हवा. तो त्यासाठी निश्चितच पात्र आहे,’ अशा भावना गानसम्राज्ञी लता मंगेशकर यांनी शुक्रवारी व्यक्त केल्या.

Demise of Sachin Industry!

सचिन तेंदुलकर पर लगा है सबसे बड़ा सट्टा

अलविदा सचिन इंडिया

সচিন তেন্ডুলকরের বিদায়ী টেস্টে আনন্দবাজারে কলাম লিখছেন সৌরভ গঙ্গোপাধ্যায়

'सचिनने निवृत्तीची घाई केली. त्याने आणखी किमान वर्षभर क्रिकेट खेळायला हवं होतं,' असे सांगतानाच, 'सचिनचे कर्तृत्व बघता त्याला 'भारतरत्न' हा किताब मिळायलाच हवा. तो त्यासाठी निश्चितच पात्र आहे,' अशा भावना गानसम्राज्ञी लता मंगेशकर यांनी शुक्रवारी व्यक्त केल्या.


Palash Biswas

'सचिनने निवृत्तीची घाई केली. त्याने आणखी किमान वर्षभर क्रिकेट खेळायला हवं होतं,' असे सांगतानाच, 'सचिनचे कर्तृत्व बघता त्याला 'भारतरत्न' हा किताब मिळायलाच हवा. तो त्यासाठी निश्चितच पात्र आहे,' अशा भावना गानसम्राज्ञी लता मंगेशकर यांनी शुक्रवारी व्यक्त केल्या.

सचिननं आणखी खेळायला हवं होतं!: लतादीदी

15 Nov 2013, 1954 hrs IST

'सचिनने निवृत्तीची घाई केली. त्याने आणखी किमान वर्षभर क्रिकेट खेळायला हवं होतं,' असे सांगतानाच, 'सचिनचे कर्तृत्व बघता त्याला 'भारतरत्न' हा किताब मिळायलाच हवा. तो त्यासाठी निश्चितच पात्र आहे,' अशा भावना गानसम्राज्ञी लता मंगेशकर यांनी शुक्रवारी व्यक्त केल्या.

Must Watch: सचिननेही न पाहिलेले सचिनचे फोटो!

15 Nov 2013, 1507 hrs IST


क्रिकेटच्या नभांगणातील झळाळता तारा असलेल्या सचिन तेंडुलकरचे हजारो फोटो आपण आत्तापर्यंत पाहिलेत, साठवलेत, जपून ठेवलेत... पण, सचिनच्या निवृत्तीच्या निमित्तानं, या क्रिकेटसम्राटाचे अगदीच बालवयातले असे फोटो आम्ही तुम्हाला दाखवतोय, जे कदाचित स्वतः सचिननेही पाहिलेले नसतील...



मास्टर बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर की 74 रन की विदाई पारी के बाद चेतेश्वर पुजारा और रोहित शर्मा के शतक से भारत ने शुक्रवार को यहां वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे और अंतिम क्रिकेट टेस्ट में पहली पारी में 313 रन की विशाल बढ़त हासिल कर क्लीन स्वीप की ओर कदम बढ़ा दिये।


तेंदुलकर के लाखों प्रशंसक उनकी अंतिम पारी का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, जो सुबह बीती रात 38 रन के स्कोर पर मैदान पर उतरे। यह 40 वर्षीय महान बल्लेबाज सुबह 'पाजीटिव फ्रेम' में दिख रहा था और उन्होंने लाजवाब शाट जमाकर खचाखच भरे वानखेड़े स्टेडियम को प्रसन्न कर दिया।


लेकिन यह चैम्पियन बल्लेबाज अपने विदाई मैच में शतक जमाने से चूक गया लेकिन भारतीय टीम ने रोहित शर्मा (नाबाद 111 रन) के लगातार दूसरे सैकड़े और चेतेश्वर पुजारा के 113 रन से पहली पारी में 495 रन का विशाल स्कोर खड़ा कर 313 रन की बढ़त बनायी।


स्पिनर शेन शिलिंगफोर्ड वेस्टइंडीज के लिये सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज रहे, जिन्होंने 43 ओवर में 179 रन देकर पांच विकेट हासिल किये। नरसिंह देवनारायण ने दो विकेट प्राप्त किये।


स्टंप तक वेस्टइंडीज की टीम दूसरी पारी में 43 रन पर तीन विकेट खोकर जूझ रही थी और वह अब भी 270 रन से पिछड़ रही है, उसके सात विकेट बाकी हैं। मैच के अभी तीन दिन बाकी हैं, मेहमान टीम को मैच बचाने क लिये कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी।


लेकिन दूसरे दिन तेंदुलकर ही आकर्षण का केंद्र रहे, जिन्होंने अपनी पारी में कुछ ट्रेडमार्क शाट लगाये जिससे दर्शक और कई वीवीआईपी काफी खुश हुए जिसमें कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, राज्य के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण और बालीवुड सुपरस्टार आमिर खान और रितिक रोशन शामिल थे।


जब तेंदुलकर वेस्टइंडीज के गेंदबाज देवनारायण की गेंद पर पहली स्लिप में डेरेन सैमी को कैच देकर आउट हुए तो पूरा स्टेडियम खामोश हो गया। लेकिन जल्द ही दर्शकों ने खुद को संभाला और तेंदुलकर का खड़े होकर अभिवादन किया। तेंदुलकर के विदाई मैच में हालांकि पुजारा और रोहित के शतक फीके पड़ गये।


रोहित ने 11वें नंबर के खिलाड़ी मोहम्मद शमी (11) के साथ मिलकर 80 रन जोड़कर अपना शतक तो पूरा किया ही, भारत को विशाल बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभायी।


तेंदुलकर ने 38 रन से शुरुआत की और आज 68 मिनट तक क्रीज पर टिके। उन्होंने 118 गेंद का सामना करते हुए अपनी पारी में 12 चौके जड़े जो क्लासिक शाट थे।


उन्होंने पुजारा के साथ दूसरे विकेट के लिये 148 रन जोड़े, जिन्होंने अपने पांचवें टेस्ट शतक में 167 गेंद का सामना करते हुए 12 चौके लगाये। रोहित ने अपनी नाबाद शतकीय पारी में 127 गेंद में 11 चौके और तीन छक्के लगाये।


अपने मैदान पर पहला टेस्ट खेल रहे रोहित ने दिखाया कि पुछल्ले बल्लेबाजों के साथ किस तरह बल्लेबाजी की जानी चाहिए और लगातार दूसरा टेस्ट शतक पूरा किया। उन्हें 85 रन पर जीवनदान मिला था, जब डीप में शेन शिलिंगफोर्ड उनका कैच नहीं लपक सके।


शमी तब बल्लेबाजी करने उतरे जब रोहित 46 रन पर थे और इन दोनों ने अंतिम विकेट के लिये 80 रन की साझेदारी निभायी। रोहित ने मालरेन सैमुअल्स की गेंद पर लांग आन पर छक्का जड़कर अपना सैकड़ा पूरा किया।ज़ी मीडिया ब्यूरो


नई दिल्ली : मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में जहां अपना अंतिम टेस्ट मैच खेल रहे हैं। वहीं, उन्हें भारत रत्न दिए जाने की मांग जोर पकड़ती जा रही है। केंद्रीय कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा है कि अगर इस तरह की कोई मांग है तो सरकार उस पर विचार करेगी।


ज़ी मीडिया से बातचीत में केंद्रीय कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने शुक्रवार को कहा, 'किसे भारत रत्न दिया जाना है, इसके बारे में चर्चा टेलीविजन चैनल पर नहीं की जा सकती। अगर सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न देने की मांग देश में उठ रही है तो सरकार उस पर विचार करेगी।'


गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न देने की मांग उठती रही है। सचिन मौजूदा समय में राज्यसभा के सदस्य हैं।


सचिन तेंदुलकर मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में अपना अंतिम टेस्ट मैच खेल रहे हैं। यह उनका 200वां टेस्ट मैच है।


Hindustan Times

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Tendulkar scores 74 in farewell Test; India eye big win over WI

Hindustan Times

- ‎37 minutes ago‎







West Indies were 43 for three in their second innings against India at stumps on day two of the second cricket Test at Wankhede stadium in Mumbai on Friday.

Opinion:Sachin Tendulkar is a true living legend: B-TownTimes of India

In-depth:2nd Test, Day 2: India vs West Indies - Statistical highlightsZee News

Live Updating:Live coaching from Sachin is Cheteshwar's biggest gain: FatherBusiness Standard

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The Times of India

3 hours ago  -  Google+

t's the end of a journey that has seen records smashed, bowlers humbled and even a desert storm tamed. Such a historic occasion demands a tribute as monumental as the Sachin's presence in worl…

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Getty Images

Bharat Ratna and legendary singer Lata Mangeshkar has said that cricket great Sachin Tendulkar also deserves India's highest civilian award.


"Whatever he (Sachin) has done for the country, very few people can. He deserves the honour. He has made all of us proud," Lata told television channels Friday. She received the honour in 2001. Lata felt that the master blaster could have carried on playing for at least one more year.


"The way he played in the first innings, it seemed he could have played for another year or two," she said of the 40-year-old who made a fine 74 in his farewell Test against the West Indies. Asked what Sachin should do post-retirement: "I think Sachin should open a cricket academy. He should impart his amazing knowledge to the youngsters. That way Sachin will be around through them."

Waqar said it was frustrating to see the courts interfere in cricket.

"I am deeply disappointed by that, but it's because of poor administration that courts had to take matters into their hands," said Waqar, who took 373 wickets in 87 Tests for Pakistan.

"If we do not make our cricket administration stable, accurate and proficient, then I fear cricket will suffer badly. I wish the government would leave it to technocrats to run the game and there should be no meddling."

The International Cricket Council (ICC) has been taking steps to end the political interference that has long dogged the game in certain countries.

It was at the governing body's insistence that the PCB ended the traditional practice in which the Pakistani president appointed the board chairman, replacing it with an election process.

"We have enormous talent but through our bad administration we are spoiling everything," said Waqar.

"We are not having 'A' team tours, we are not concentrating on Under-19 and the blame goes to poor administration."

Waqar suggested former ICC president Ehsan Mani to head the PCB.

"I think Mani has the experience to lead Pakistan cricket into prosperity," said Waqar.

"I sincerely hope that the government let cricket run as an autonmous body, like it has always been and not take cricket under any sports board."


৭৪-এ শেষ অন্তিম যুদ্ধ, শতরান রোহিত-পূজারার

দেওনারায়ণের বলে স্যামির তালুবন্দি হলেন তিনি। আম্পায়ারের সিদ্ধান্তের অপেক্ষা না করে প্যাভিলিয়নের দিকে হাঁটা শুরু করল ছোটোখাটো চেহারাটা। সম্ভবত শেষবারের মতো। আর সঙ্গে সঙ্গেই যেন বজ্রাহত হল ওয়াংখেড়ে-সহ আপামর ক্রিকেটবিশ্ব। সচিন তেন্ডুলকরের বড় রান দেখতে আজ ওয়াংখেড়ের দিকে তাকিয়ে ছিল আট থেকে আশি। সচিনকে দেখতে আজও মাঠে উপস্থিত গোটা তেন্ডুলকর পরিবার। মাঠে এসেছেন সস্ত্রীক আমির খান, হৃত্বিক রোশন, যুবরাজ সিংহ, হরভজন সিংহ, দিলীপ বেঙ্গসরকর, রাহুল গাঁধী-সহ একাধিক ব্যক্তিত্ব।


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রাজকীয় আপারকাট। ছবি: পিটিআই।

শতরানের পথে পূজারা। ছবি: পিটিআই।


শুরুটা রাজকীয় ভঙ্গিতেই করেছিলেন 'ক্রিকেট ঈশ্বর'। শিলিংফোর্ডের প্রথম ওভারেই মেরেছিলেন দু'টি অসাধারণ বাউন্ডারি। টিনো বেস্টের বলে সকলের হৃদ্স্পন্দন বাড়িয়ে জোরালো কট বিহাইন্ডের আবেদন নাকচ করেন আম্পায়ার। সেই বেস্টের বলেই বাউন্ডারি মেরে অর্ধশতরান পূর্ণ করেন তিনি। প্রত্যাশার পারদ যখন ঊর্ধ্বমুখী তখনই শতরান থেকে ২৬ রান দুরে থেমে গেলেন লিটল মাস্টার। শেষ হল ২৪ বছরের রূপকথার।

এ দিকে চেতেশ্বর পূজারা ও রোহিত শর্মার শতরানে ভর করে রানের পাহাড়ে ভারত। টেস্টে পূজারার এটি পঞ্চম শতরান। রোহিতের দ্বিতীয়। পর পর দু'টি টেস্টে শতরান করলেন তিনি। অর্ধশতরান করেছেন বিরাট কোহলিও। সচিন-পূজারার ব্যাটে ভর করে মধ্যাহ্নভোজের আগেই ওয়েস্ট ইন্ডিজের ১৮২ রানের গণ্ডি টপকে যায় ভারত। এর পর বিরাট কোহলি ও চেতেশ্বর পূজারা এগিয়ে নিয়ে যেতে থাকেন ভারতকে। ব্যক্তিগত ৫৭ রানে শিলিংফোর্ডের বলে আউট হন কোহলি। ১১৩ রানে সেই শিলিংফোর্ডের বলেই আউট হন পূজারা। বেস্টের বলে ফিরে যান ধোনিও। ৩০ রানে গ্যাব্রিয়েলের বলে আউট হন অশ্বিন। চা বিরতির পরেই শিলিংফোর্ডের বলে আউট হন ভুবনেশ্বর কুমার। পাওয়েলের থ্রোতে রান আউট হন ওঝা। ভুবনেশ্বরের ক্যাচ নিয়ে ওয়েস্ট ইন্ডিজের প্রথম ক্রিকেটার হিসাবে এক ইনিংসে পাঁচটি ক্যাচের রেকর্ড করেন স্যামি। সিলিংফোর্ড পাঁচ উইকেট নিয়েছেন। দশম উইকেটে রোহিত-সামি জুটি যোগ করেন ৮০ রান। ওয়াংখেড়েতে এটি দশম উইকেটে রেকর্ড পার্টনারশিপ। সামি ১১ রানে দেওনারায়ণের বলে বাউন্ডারি লাইনে ধরা পড়তেই ৪৯৫ রানে শেষ হয় ভারতের প্রথম ইনিংস। রোহিত শর্মা ১১১ রানে অপরাজিত থেকে যান। জবাবে দ্বিতীয় ইনিংসে ব্যাট করতে নেমে ফের স্পিনের সামনে ধরাশায়ী ওয়েস্ট ইন্ডিজ। দিনের শেষে পাওয়েল, বেস্ট ও ব্রাভোর উইকেট হারিয়ে তারা তুলেছে মাত্র ৪৩ রান। অশ্বিন দু'টি ও প্রজ্ঞান ওঝা একটি উইকেট নিয়েছেন।


सचिन तेंदुलकर की विदाई श्रृंखला के अंतिम टेस्ट मैच के पहले दिन गुरुवार को उनका पूरा परिवार वानखेड़े स्टेडियम पहुंचा।


अपना 200वां और अंतिम टेस्ट खेल रहे भारत के आइकन बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का बल्ला गुरुवार को नये ही रूप रंग में दिख रहा था। सचिन के बल्ले पर इसके निर्माता का स्टीकर, जबकि ग्रिप पर तिरंगे के रंग थे।


सचिन वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने करियर का अंतिम टेस्ट मैच खेल रहे हैं। यह उनका 2००वां टेस्ट है। इसके बाद वह क्रिकेट को अलविदा कह देंगे।


सचिन की पत्नी अंजलि तेंदुलकर अपने दोनों बच्चों के साथ सुबह ही वानखेड़े पहुंच गईं। साथ ही उनकी मां रजनी भी थीं। रजनी पहली बार सचिन का कोई मैच देखने स्टेडियम पहुंची हैं।


अंजलि ने लिफ्ट के जरिए गरवार क्लब पवेलियन एंड का रुख किया। उनके हाथ में एक बैटिंग ग्ल्ब्स था। सम्भवत: वह सचिन के लिए था।


इसके अलावा मुम्बई इंडियंस फ्रेंचाइजी टीम की मालिकन नीता अंबानी भी सचिन का अंतिम मैच देखने पहुंचीं।


तेंदुलकर मुंबई में अपने घरेलू मैदान में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना 200वां टेस्ट मैच खेल रहे हैं। आम तौर पर वह काले रंग की रबड़ की ग्रिप लगाते थे, लेकिन आज इस पर उनके प्रायोजक का प्रतीक चिन्ह था जो उनके अंतिम मैच के लिये विशेष रूप से डिजाइन किया गया था।


एडिडास इंडिया के ब्रांड निदेशक तुषार गोकुलदास ने कहा कि मैदान पर सचिन का बल्ला ही बोलता है और हर स्ट्रोक भारत के लिये उनके जुनून से लबालब होता था और वह भारत को प्रत्येक मैच जीतने की इच्छा से खेलते हैं। सचिन अपना करियर देश को समर्पित करना चाहता है और अपने एडिडास एसटी का इस्तेमाल अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाने के लिये इस्तेमाल करना चाहता है।


एडिडास एसटी के सीमित बल्ले प्रशंसकों के लिये देश में एडिडास के चुनिंदा स्टोर में उपलब्ध कराये जायेंगे।

सचिन तेंदुलकर पर लगा है सबसे बड़ा सट्टा

देवनाथ


सचिन तेंदुलकर अपनी जिंदगी का आखिरी और करियर का दो सौवां टेस्ट मैच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेलने वाले हैं। पूरी दुनिया को उनके इस मैच का बेसब्री से इंतजार है। आखिरी टेस्ट में सचिन को खेलते हुए देखने के लिए भारी संख्या में लोग वानखेड़े स्टेडियम के बाहर जुट रहे हैं लेकिन सचिन के इन प्रशंसकों से भी ज्यादा अगर किसी को मास्टर ब्लास्टर के इस आखिरी मैच का इंतजार सट्टेबाजों को भी हैं।


हर खेलप्रेमी सचिन से वानखेड़े में एक यादगार पारी खेलने की उम्मीद लगाये हुए है। सबको इस बात का इंतजार है कि वो सेंचुरी जड़कर वानखेड़े में अपने 16 साल के शतक के सूखे को समाप्त करेंगे लेकिन खेलप्रेमियों के साथ ही सचिन के एक एक रन पर टिकी है सट्टेबाजों की भी नजर। सट्टेबाजों को इस बात से मतलब नहीं है कि सचिन शतक जड़ते हैं या फिर शून्य पर ही आउट होकर पेवेलियन लौट जाते हैं क्योंकि सट्टेबाजी की दुनिया में सचिन के डक के लिए रेट तय हो गया है. उनके शतक पर भी भाव लगा हुआ है। क्रिकेट के इस भगवान के एक एक रन को सटोरियों ने बना दिया है अपनी बाजी का मोहरा.।


सचिन के एक एक रन पर लगाया है सटोरियों ने सट्टा तो उनके आउट के तरीके पर भी होने पर लगा है सट्टा। सटोरियों ने सचिन के विकेट लेने पर भी लगा दिया है सट्टा.यानी सचिन ने बॉलिंग की तो कितने रन देंगे और कितने विकेट लेंगे। इतना ही नहीं सचिन के कैच लेने पर भी लगा हुआ है सट्टा। माना जा रहा है कि सचिन के आखिरी टेस्ट मैच पर लगने वाला सट्टा सट्टाबाजार के सारे रिकॉर्ड तोड़ देगा। दिवाली की रात से खुला सट्टे का भाव दिन दूनी रात चौगुनी तेजी से बढ़ रहा है। सट्टेबाज भी पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतर चुके हैं। अब सिर्फ इंतजार है क्रिकेट के भगवान बन चुके सचिन के मैदान में उतरने का। आखिरी मैच में मास्टर ब्लास्टर का इस्तकबाल करने के लिए तैयार है मुंबई का वानखेड़े स्टेडियम। उनके साथ ही तैयार हैं देश भर के सट्टेबाज और उनका विशाल नेटवर्क मुंबई-दिल्ली और कोलकाता जैसा बड़ा शहर हो या फिर कोई छोटा शहर सचिन के आखिरी मैच को लेकर सट्टेबाज हर शहर में एक्टिव हो गये हैं। सट्टेबाजों के मुताबिक सचिन के आखिरी मैच को लेकर मुंबई, जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, नागपुर, इंदौर, दिल्ली, कानपुर के साथ-साथ विदेशों में सट्टा लग रहा है।


अनजान जगह पर गुमनाम रहकर सटोरिये लगातार लैपटॉप, आईपॉड और स्मार्टफोनों से चिपके हुए हैं। सचिन के आखिरी मैच से जुड़े हर मूवमेंट के भाव तय हो रहे हैं और उन पर दांव लगाने वालों की कोई कमी नहीं हैं क्योंकि सट्टेबाजी के इस खेल से नाम जुड़ा है क्रिकेट के भगवान का। सबको यकीन है कि क्रिकेट का भगवान जब खेल के मैदान में उतरेगा तो कोई ना कोई चमत्कार जरूर होगा। वहीं सटोरियों को भरोसा है कि सचिन का आखिरी मैच उन्हें मालामाल कर देगा।


क्रिकेट के भगवान का जादू वैसे भी सट्टा बाजार में सिर चढ़कर बोलता है। इसका ताजा सबूत है उनके 200वें टेस्ट को लेकर सट्टेबाजों की बेसब्री और सचिन के एक-एक मूवमेंट पर लग रहे बड़े-बड़े दांव। सटोरियों के मुताबिक सट्टाबाजार में सचिन के आखिरी मैच को लेकर अब तक 23 हजार करोड़ रुपये का सट्टा लग चुका है।


शुरुआत में सट्टाबाजार से जुड़े लोगों ने अंदाजा लगाया था कि मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेले जाने वाले मास्टर ब्लास्टर के आखिरी टेस्ट में उनकी पारी पर 8 से 9 सौ करोड़ रुपये तक का सट्टा लगेगा लेकिन जैसे-जैसे मैच की तारीख पास आ रही है वैसे-वैसे सट्टा बाजार तेंदुलकर के बुखार से तपता जा रहा है।


मौका बड़ा है लिहाजा सट्टेबाज़ भी इस मौके का बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहे है वो किसी भी कीमत पर कमाई का ये सुनहरा मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहते।


सट्टेबाज़ों के मुताबिक मुंबई में खेले जाने वाले इस मैच पर अब तक 23 हजार करोड़ रुपये का सट्टा लग चुका है और जब तक मैच की तारीख करीब आएगी तब तक ये आंकड़ा 30 हज़ार करोड़ को भी पार कर जाएगा। देश के कुछ बड़े बुकीज का दावा है कि सचिन के आखिरी टेस्ट पर अंत तक सट्टे पर लगी रकम का आंकड़ा अभी की तुलना में कई गुना ज्यादा हो सकता है।


माना जा रहा है कि देश में पिछले वर्ल्ड कप के बाद किसी भी मैच में इतने बड़े पैमाने पर सटोरियों ने दांव नहीं खेला है और किसी टेस्ट मैच पर तो कभी भी इतनी बड़ी रकम दांव पर लगी ही नहीं है।


सचिन के एक-एक रन पर तो सटोरियों की नजर है ही,उनके खेल से जुड़ी हर चीज पर लगा हुआ हैं दांव। बैटिंग और बॉलिंग से लेकर फील्डिंग तक हर जगह उनकी कामयाबी या नाकामी के लिए भी लग चुका है भाव। यानी अपने आखिरी मैच की हर बॉल पर बिकेंगे सचिन। तमाम विवादों के बावजूद क्रिकेट और सट्टेबाजी का नाता ऐसा है कि दोनों एक दूसरे का साथ नहीं छोड़ते। आलम ये है कि एक तरफ जहां क्रिकेट के मैदान में रन बरसते हैं तो दूसरी तरफ सट्टाबाजार में हर बॉल और हर रन पर पैसों की बरसात होती है। ऐसे में अगर कोई खास मैच होने वाला हो तो वो सट्टाबाज़ार के धुरंधरों के आकर्षण का केंद्र बन जाता है। उसके बाद तो उस मैच से जुड़ी बड़ी से लेकर छोटी-छोटी चीजों तक पर सट्टा लगता है। ऐसा ही हो रहा है मास्टर ब्लास्टर के आखिरी मैच में.सटोरियों के मुताबिक इस मैच से जुड़ी हर चीज फिक्स हो चुकी है। आखिरी टेस्ट मैच में सचिन किस दिन बल्लेबाजी करने उतरेंगे इस पर भी सट्टा लग चुका है। लिटिल मास्टर आखिरी टेस्ट में एक पारी खेलेंगे या फिर दोनों इस पर भी सट्टाबाजार में दांव खेला जा चुका है।


-अगर सचिन दो पारियां खेलते हैं तो उनका कुल स्कोर कितना होगा इस पर भी अलग-अलग स्कोर के हिसाब से तय हो चुकी है सट्टे की रकम।

-सचिन अपनी आखिरी पारी में कितने रन बनाएंगे इस पर भी सट्टेबाजों ने सट्टा लगा रखा है।.

-तेंदुलकर अपनी आखिरी पारी की शुरूआत एक या दो रन लेकर करेंगे या चौके-छक्के से इस पर भी सट्टाबाजार के भाव तय हो चुके हैं।

-मास्टर ब्लास्टर को आउट करने में कौन सा बॉलर कामयाब होगा इस पर भी लगा है सट्टा।

-सचिन अपनी आखिरी पारी में रन आउट होंगे, एलबीडब्ल्यू होंगे। कैच आउट होंगे, क्लीन बोल्ड होंगे या फिर स्टंप,इस पर भी सट्टा है।

-सचिन कुल कितने रन बनाकर पेवेलियन लौटेंगे इस पर भी सट्टा है।

-आखिरी पारी में सचिन शतक बनाएंगे या अर्धशतक या फिर डबल सेंचुरी इस पर भी सट्टा है।

-अगर सचिन नाबाद पारी खेलते हैं तो सट्टेबाजों ने उसके लिए भी दांव खेल रखा है।

-सचिन बॉलिंग करेंगे या नहीं अगर बॉलिंग करेंगे तो कितने विकेट हासिल कर पाएंगे इस पर भी सट्टा है।

-इतना ही नहीं, अगर सचिन बिना कोई रन बनाए यानी जीरो पर आउट हो जाते हैं तो उस पर भी सट्टा है।


सट्टेबाजों की मानें तो सचिन के आखिरी टेस्ट पर सट्टा लगाने वालों की भारी भीड़ है और ज्यादातर दिग्गज सचिन के ज़ीरो पर आउट होने पर बड़े-बड़े दांव लगा रहे हैं। सचिन के इस टेस्ट में जीरो पर पेवेलियन लौटने का अंदाजा लगाने वालों की बड़ी तादाद है। इसकी वजह ये भी है कि महान डॉन ब्रैडमैन भी आखिरी टेस्ट पारी में जीरो पर ही आउट हुए थे। बुकीज सचिन के शतक बनाने या शून्य पर आउट होने के सट्टे पर दोगुनी रकम देने की पेशकश कर रहे हैं। ये सबसे रिस्की दांव माने जा रहे हैं और इसी वजह से इन पर ज्यादा रकम मिल रही है। बुकीज का कहना है कि इस टेस्ट पर सट्टा लगाना अपने आप में बड़ा अट्रैक्शन बन गया है।


सचिन के नाम पर वैसे तो ढेरों रिकॉर्ड हैं लेकिन 200वां टेस्ट मैच खेलने के साथ ही एक और रिकॉर्ड उनका इंतजार कर रहा है वो है किसी खिलाड़ी के एक मैच पर लगाए जाने वाले सबसे बड़े सट्टे का। सट्टाबाजार के जानकार बताते हैं कि सचिन के ऊपर अब तक के इतिहास का सबसे बड़ा सट्टा लग चुका है और इस रकम में हर पल हर दिन इजाफा होता जा रहा है। सचिन के आखिरी मैच पर जितनी तेजी से सट्टे की रकम बढ़ रही है उससे भी ज्यादा तेजी से बढ़ रही है सट्टा लगाने वालों की तादाद। लैपटॉप और स्मार्टफोन से चिपके सट्टेबाज़ लगातार लगा रहे हैं दांव। आपको बताते हैं कि सट्टेबाजी के इस खेल में कैसे होगा मुनाफे और नुकसान का हिसाब-किताब। अगर मास्टर ब्लास्टर अपने आखिरी टेस्ट की दोनों पारियों में कम से कम 25-25 रन बनाते हैं तो उनके स्कोर पर 12 पैसे का भाव होगा, सचिन 50 रन बनाते हैं तो 18 पैसे का भाव होगा, अगर तेंदुलकर शतक बनाते हैं तो 1 रुपये 40 पैसे का भाव होगा, वहीं अगर सचिन डबल सेंचुरी बनाने में कामयाब हो जाते हैं तो उसके लिए 8/1 भाव रखा गया है। यानी अगर सचिन ने वानखेड़े स्टेडियम की दो पारियों में से एक में भी दोहरा शतक ठोक दिया तो सटोरियों को हर एक रुपये पर आठ गुना मुनाफ़ा होगा।


सटोरियों के मुताबिक पहले के भाव में और बाद के भाव में काफी फर्क होता है। मैच शुरू होने के बाद सट्टाबाजार के भाव तेजी से बदलने लगते हैं। सट्टेबाज़ों के मुताबिक अगर सचिन पहली पारी में बेहतर प्रदर्शन करते हैं तो दूसरी पारी के लिए भाव तकरीबन डेढ़ गुना बढ़ जाएगा।


सट्टेबाज़ी में सक्रिय इंटरनेशनल कंपनी स्काई बेट ने सचिन के आखिरी टेस्ट पारी में नाबाद रहने पर 11/4 का भाव रखा है। आखिरी टेस्ट मैच में सचिन का विकेट कौन लेगा इस पर भी स्काई बेट ने 11/4 का भाव रखा है। यानी चार रुपए के दांव पर 11 रुपये का मुनाफा।


सचिन किस तरह आउट होंगे उसपर भी जमकर सट्टा लगाया गया है। मसलन अगर सचिन कैच आउट होंगे तो 38 पैसे का भाव होगा, अगर लिटिल मास्टर क्लीन बोल्ड होंगे तो 16 पैसे का भाव होगा, सचिन के एलबीडब्ल्यू आउट होने पर 54 पैसे का भाव रखा गया है।


गेंदबाज के तौर पर भी सट्टाबाजार में सचिन हॉट बने हुए हैं। आखिरी मैच की दो पारियों में अगर सचिन 5 विकेट लेने में कामयाब हो गए तो 1 रुपये 10 पैसे का भाव होगा। सचिन अपना आखिरी टेस्ट मैच 14 नवंबर से 18 नवंबर तक मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेलेंगे। टीम इंडिया का मुकाबला वेस्टइंडीज से है और मास्टर ब्लास्टर पर लाखों का दांव खेल रहे सटोरियों को पूरा भरोसा है कि जीत किसी की भी हो मैच तो सचिन का ही होगा।




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শেষ যুদ্ধে ডনকে

পেরোলেন সচিন

গৌতম ভট্টাচার্য • মুম্বই


চাপ দাড়ি। নীল স্ট্রাইপড শার্ট। দোহারা চেহারা। মন দিয়ে এত ক্ষণ সূক্ষ্ম টেকনিক্যাল ব্যাখ্যা করছিলেন শিখর ধবন আর সৌরভ গঙ্গোপাধ্যায়ের স্ট্রোক খেলার সময়ে শরীরের পজিশন কতটা আলাদা। হঠাৎই ভারতের প্রথম উইকেট পড়ল আর জনতার তুমুল হর্ষধ্বনি। চাপ দাড়ি সবিস্ময়ে ঘাড় ঘোরালেন, "এ কী, পাবলিক ইন্ডিয়ার উইকেট পড়াতে উল্লাস করছে কেন?" আসলে কুড়ি বছর বাদে বিষ্যুদবার প্রথম ওয়াংখেড়েতে ঢুকছেন। তাঁর কোনও আন্দাজই নেই যে, আধুনিক ভারতীয় ক্রিকেট-দর্শকের রিংটোনটা এখন কী দাঁড়িয়েছে? ভারতীয় ক্রিকেট জঙ্গলের দীর্ঘ দিনের আইন, টেস্ট ম্যাচে দেশের প্রথম উইকেট পড়া থেকেই তীব্র চিৎকার শুরু হবে। ওয়ান ডাউন যে নামল, তার প্যাডে লাগামাত্র বিদেশি বোলারের সঙ্গে জনতাও অ্যাপিল করবে। যে করে হোক ইন্ডিয়ার দু'টো উইকেট চাই। তবেই না প্যাভিলিয়ন থেকে ওই বেঁটেখাটো ছায়াটা বেরোবে!

আরব সাগর-ধারে ওয়াংখেড়ে মাত্র তিরিশ হাজার লোক নিয়েও চিৎকারটাকে এ দিন সমুদ্র গর্জনে নিয়ে গিয়েছিল। কোনও কোনও সময় ভ্রম হচ্ছিল, এক লাখের পুরনো ইডেন! মুরলী বিজয় যখন ফরোয়ার্ড শর্ট লেগের হাতে ক্যাচ দিয়েও দাঁড়িয়ে আছেন, আম্পায়ার নো বল ডাকলে আবার ফিরবেন বলে, জনতা তাঁকে তীব্র তিরস্কার শুরু করে দিল: চলো, নিকলো। আম্পায়ারকে নির্দেশ দিচ্ছিল: ডোন্ট ওয়েট। রেইজ ইওর ফিঙ্গার। মাঠের দক্ষিণ-পূর্বে দিভেচা প্যাভিলিয়নের সব চেয়ে টঙে বসে থাকা চাপ দাড়ি দেখেশুনে আশ্চর্য হয়ে পড়ছেন। ক্রিকেটমহলে তিনিই একমাত্র মনুষ্য, যিনি গত দেড় দশকেরও বেশি সময় সচিন তেন্ডুলকরকে লাইভ ব্যাট করতে দেখেননি। না মাঠে, না টিভিতে। সচিনের ম্যাচ থাকলে তিনি হয় বাড়ি বন্ধ করে টেনশনে ঘুমিয়ে পড়েন। কেউ বেল বাজালেও খোলেন না। অথবা গাড়ি নিয়ে যে দিকে দু'চোখ যায়, চলে যান। বহু বহু বছর বাদে তেন্ডুলকরের শেষ ম্যাচ বলে বাধ্য হয়ে এসেছেন। আর থেকে থেকে আধুনিক ক্রিকেট মাঠের ব্যবহারে আশ্চর্য হয়ে যাচ্ছেন। এই সব কাজ-কারবার তো জীবনে দেখেননি। তাঁর সব প্রশ্ন করার ধরন দেখলে মনে হবে, আরে এ তো ক্রিকেটের রিপ ভ্যান উইঙ্কল। নির্ঘাৎ এত দিন ঘুমিয়ে ছিল। চাপ দাড়ির সঙ্গে এ বার পরিচয়ের সময় হয়েছে— অজিত তেন্ডুলকর। দু'শোতম টেস্টের তাজমহল গড়া মনুষ্যের দাদা, ফ্রেন্ড, ফিলোজফার এবং চিরকালীন পথপ্রদর্শক।

মুরলী বিজয়কে আম্পায়ার আউট দিতেই চাপ দাড়ির চেহারা আমূল বদলে গেল! ঝুঁকে পড়লেন রেলিং ধরে সামনের দিকে। বাইশ গজে ভাইয়ের অন্তিম অগ্নিপরীক্ষা। গ্যালারিতে তাঁর! গান্ধারীর চোখ বেঁধে রাখার মতো তাঁরও তো এত বছরের ব্রত ছিল যে, নিজের চোখে ভাইয়ের ব্যাটিং দেখবেন না। দেখলে ভাইয়ের চরম অকল্যাণ হবে। অথচ এখন এই দুপুর ৩টে বেজে ৩২ মিনিটে তো তাঁর ভাই গোটা মাঠ এবং ভারতবর্ষকে স্পন্দিত করে নেমে পড়লেন। প্রতিটা মিনিটে মনে হচ্ছে বাজ পড়ছে মাঠে। টিভি ক্যামেরার আক্রমণ থেকে বাঁচতে অজিত এই টঙে উঠে এসেছেন। সঙ্গে নিয়ে এসেছেন সচিনের ঘনিষ্ঠ দুই বন্ধু সমীর দিঘে এবং প্রশান্ত বৈদ্য-কে। একটু দূরে অতুল রাণাডে। সামনে সচিনের মেয়ে সারা। দু'টো গ্যালারি পরে প্রেসিডেন্ট'স বক্সে সচিনের স্ত্রী অঞ্জলি। ছেলে অর্জুন। শাশুড়ি। এবং জীবনে প্রথম মাঠে আসা হুইলচেয়ারে বসা তাঁর মা। প্রেসিডেন্ট'স বক্সে দ্বিতীয় একটা হুইলচেয়ারও আনা হয়েছে। সেটাতে বসে আছেন রমাকান্ত আচরেকর। ঠিক উল্টো দিকের টিভি বক্সে সৌরভ, রাহুল, লক্ষ্মণ, কুম্বলে। আরও একটা বক্সে ক্লাইভ লয়েড, শেন ওয়ার্ন। কী অসাধারণ একটা মহাভারতীয় সমাবেশ!

অর্জুন যেন তাঁর তিরন্দাজ জীবনকে আজই স্বেচ্ছায় সমাপ্ত করে দিচ্ছেন। ওয়েস্ট ইন্ডিজের যা হালচাল, এক ইনিংসের বেশি পাওয়া যাবে বলে মনে হয় না। গাণ্ডীব সমর্পণ হয়তো আজই হয়ে যাবে। আর সেই সমর্পণের মুহূর্ত দেখতে হাজির বাকি পাণ্ডবেরা। হাজির কুন্তী, দ্রৌপদী, অভিমন্যু। হাজির কৌরবপক্ষও। ওয়ার্নরূপী কর্ণ। লয়েডরূপী কৃপাচার্য। সকলে। আজ শৌর্যের দিন। পৌরুষত্বের দিন। আবার বিষাদের দিন। চোখের জল অবাধ্য হওয়ার দিন! অর্জুনের বীরগাথাই যে চিরকালের মতো স্তব্ধ হয়ে যেন কর্ণের নিয়তি আহ্বান করছে!

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চেনা ছন্দে। বৃহস্পতিবার ওয়াংখেড়ে স্টেডিয়ামে।

ব্র্যাডম্যানের শেষ ইনিংসে শূন্য সম্পর্কে এ রকম জোরদার চোখের জলের তত্ত্ব রয়েছে। ডন নাকি আবেগে এত আপ্লুত হয়ে গিয়েছিলেন যে, চোখ ছলছল করে এসেছিল। ওভালের ব্যাটিং উইকেটেও হোলিসের বলটা ঠিকমতো দেখতে পাননি। ডন আবেগপ্রবণ হয়ে গিয়েছিলেন জনতার সংবর্ধনা আর ইংল্যান্ড অধিনায়কের টিমকে জড়ো করে তাঁকে গার্ড অব অনার দেওয়ায়। সচিন— সচিন কী করবেন? তাঁকে সকালে টিমমেটরা আবেগে ভিজিয়ে দিয়েছে ২০০ লেখা বিশেষ কাউন্টি ক্যাপ উপহার দিয়ে। হাডলে তাঁকে টিম টক দিতে দিয়েছে। আর ব্যাট করতে এসে শুধু তো ডারেন স্যামির দল নয়, দুই আম্পায়ারও একধারে দাঁড়িয়ে তাঁকে সম্মান জানাচ্ছেন। বিশ্বের কোথাও কখনও আম্পায়াররা ব্যাটসম্যানকে গার্ড অব অনার দিয়েছেন? নাকি ভেবেছেন? তারই মধ্যে নতুন উপদ্রব— সচিনের পিছুপিছু টিভি ক্যামেরাম্যান। উইকেটের কাছাকাছি টিভি ক্যামেরার যাওয়া— এই সমস্ত খেলো ব্যাপার টি-টোয়েন্টিতে হয়। গম্ভীর টেস্ট ম্যাচে কী করে চার নম্বরে ব্যাট করতে যাওয়া মানুষের সঙ্গে ক্যামেরা ঢোকে? গাওস্কর হলে নির্ঘাত বার করে দিতেন। সচিন তাকালেনই না। হাতের ব্যাটটাও আজ নতুন। ওটা অ্যাডিডাস শেষ ম্যাচে ত্রিবর্ণরঞ্জিত করে দিয়েছে। চিরকালীন দেশপ্রেমিকের শেষটা যেন হয় জাতীয় পতাকায় রাঙিয়ে। সব মিলিয়ে কী অসম্ভব চাপ!

প্রথম দিনের খেলা শেষ হতে তখনও তেইশ ওভার। গ্যালারিতে অজিতের দিকে তাকিয়ে কেউ একটা বলল— "চিন্তা হয়ে গেল খুব, তেইশটা ওভার আজ কাটাতে হবে।" অজিতের মুখ ফ্যাকাশে। ভাবলেশহীন ভাবে তাকালেন। ধুকপুক তো করারই কথা। সেই শিলিংফোর্ড! সেই ইডেনের ফিল্ড প্লেসিং। ফরোয়ার্ড শর্ট লেগ, সিলি পয়েন্ট আর লেগ স্লিপ। তা-ও আবার অফস্পিনার বল করছেন নাইজেল লং-এর প্রান্ত থেকে— ইডেনের সেই ঘাতক আম্পায়ার! এই সময় এত চিৎকার শুরু হল যা প্রত্যক্ষদর্শীর জীবনের শেষ দিন অবধি মনে রাখা উচিত। টেনিসে যখন নাদাল বা ফেডেরার গেম, সেট ও ম্যাচের জন্য সার্ভ করেন, তাঁদের মনঃসংযোগে নীরবতা পাওয়ার সুযোগ আছে। টেনিস এক বলের খেলা নয়। কিন্তু সেখানে, ব্যাডমিন্টনে, ভলিবলে বা টেবল টেনিসে কোথাও দর্শক-চিৎকারে প্রতিযোগীর মনঃসংযোগ নষ্টের সুযোগ নেই। ক্রিকেট এক বলের কঠিনতম টেকনিক্যাল স্পোর্ট। ভদ্রলোকের অভিজাত খেলা হিসেবে পরিচিত। কিন্তু সেখানে জীবনের শেষ ইনিংসেও এক চিলতে নীরবতার সুযোগ নেই। অন্তত ব্যাটসম্যানের আদ্যক্ষর যদি হয় এসআরটি।

বিসিসিআই থেকে সচিনের ওপর যাঁদের বিশেষ ফিল্ম তৈরি করতে বলা হয়েছিল, তাঁরা ক'দিন উত্তেজিত অনুযোগ করছিলেন, একটুও যদি সচিন আমাদের সময় না দেন, আমরা কী ডকুমেন্টারি তুলব? কলকাতায় ওর ঘরের বাইরে অতক্ষণ দাঁড়িয়ে ঘরেই ঢুকতে পারলাম না। বিষ্যুদবার বিকেলে মনে হচ্ছিল ছবির অখুশি পরিচালককে গ্যালারিতে খুঁজে বার করে বলি, ভাই, এখন যা ঘটছে সেটাই তুলে রাখো। এর চেয়ে ভাল ফিল্ম কোথাও দেখবে না। এই জিনিস ক্রিকেট মাঠে জীবনে কখনও ঘটেনি। আর ঘটবে বলেও মনে হয় না।

আবেগের এমন তীব্রতা যে, সঙ্গী ব্যাটসম্যান চেতেশ্বর পূজারা-কে মনশ্চক্ষে সবাই অদৃশ্যই করে দিয়েছে। যেন তিনি এক অপটিক্যাল ইলিউশন। আছেন— আসলে নেই। পূজারা ব্যাট করার সময়ও কি না তারা 'স্যা-চি-ন স্যা-চি-ন' করে আওয়াজ তুলছে। যেন উইকেটের দু'দিকেই সচিন ব্যাট করছেন। গ্যালারির উত্তর দিকে ঝুলছে পোস্টার, তাতে লেখা 'লেজেন্ড'। ভিডিও স্ক্রিনে অনবরত ভেসে উঠছে টুইট এখন ঈশ্বর স্বয়ং ক্রিজে। কোনও টুইটে লেখা, আমার জীবনে ভগবান তিন জন। বাবা, মা আর সচিন। এমনকী দু'দিকের সাইটস্ক্রিনও সচিন নিয়ে সপ্রশংস। গোটা বৃত্তই যেন তাঁর ক্যাপটিভ অডিয়েন্স। আর তার মধ্যিখানে স্বয়ং তিনি।

দিভেচা আর গাড়ওয়াড়ে— দু'টো প্যাভিলিয়ন মিলে বসেছেন সচিনের শ'দুয়েক বন্ধু। একটা করে বল খেলছেন সচিন, আর তাঁদের নার্ভাসনেস বাড়ছে। বিশেষ করে অজিতের চোখমুখে ক্রমাগত জমছে উৎকণ্ঠা। এমন উইকেট বানিয়েছেন সুধীর নায়েক, যেখানে বাউন্স তো আছেই। এমন টার্ন আছে যে, তিনটে ক্যাচ ফেলেও ভারত বিপক্ষকে এত কম রানে নামিয়ে দিতে পেরেছে। শিলিংফোর্ড এক ইঞ্চিরও বেশি বল ঘোরাচ্ছেন দেখে প্রশান্ত বৈদ্য দেখলাম টেনশন কাটাতে মোবাইল নিয়ে ঘেঁটে যাচ্ছেন। সমীর দিঘে— ভারতের প্রাক্তন উইকেটকিপার পাশে বসা বন্ধুকে বলছেন, "সচিন কত লোকের জীবনে যে উপকার করেছে, কেউ খোঁজ রাখে না। আজ বিদায়বেলায় এইটুকু ওকে ঈশ্বর দেবেন না? অন্যায় হবে।" এ দিকে অজিত কার্যত মুখে হাত দিয়ে বসা। গ্যালারি চিৎকার ক্রমশ বাড়িয়ে যাচ্ছে। এই ওয়েস্ট ইন্ডিজ আক্রমণ মুম্বইয়ের চলতি ভাষায় 'পোপটওয়ারি'। মোস্ট ফালতু। পরিস্থিতি বিচারে সেটাই হয়ে যাচ্ছে লয়েডের ওয়েস্ট ইন্ডিজ!

তখনও বোঝার উপায় নেই যে, সচিন বিরাশি মিনিট পরেও অক্ষত ৩৮ নিয়ে ড্রেসিংরুমে ফিরতে পারবেন! তখনকার মতো বরং মনে হচ্ছিল, যে কোনও সময় আউট হলেন বলে। প্রথম সিঙ্গলসটা আসতেই তো অজিতের দিকে মুখ ঘুরিয়ে এক বন্ধু বললেন, যাক ডনের চেয়ে বেশি হল!

যে পরিমাণ চাপ দর্শক আর পরিস্থিতি তৈরি করে রেখেছিল, তাতে একমাত্র মৃত মানুষের পক্ষেই অবিচলিত থাকা সম্ভব! জীবিতের নয়। সচিন এই সময় ফ্রন্টফুটে একটা ফ্লিক আর দারুণ ব্যাকফুট পাঞ্চ করলেন। অজিতকে সাহস জোগাতে বললাম, "সৌরভ বলে থাকেন, যে দিন সচিন শুরু থেকে ফ্রন্টফুটে ঠিকঠাক আসে, সে দিন জানবেন ও বড় রান করবে।" কিন্তু বাক্যটাই শেষ করা গেল না। কারণ অজিত অন্য জগতে। ফ্যালফ্যাল করে তাকিয়ে থাকলেন। বোঝা গেল কিছু শোনেননি। পাশ থেকে ওঁর বন্ধু সতর্ক করলেন, "খবরদার, কথা বলতে যাবেন না। সচিন ব্যাট করার সময় ও নিজের জোনে চলে যায়। কেউ ওকে বিরক্ত করে না।" সচিনের বন্ধুদের জন্য দুপুর থেকে জল, খাবারদাবার আর বিশেষ টি-শার্ট আসছিল নীচ থেকে। আপাতত সবাইকে বলে দেওয়া হল, এখন এ দিকটা একদম মাড়াবেন না। অজিতের দিকে ধেয়ে আসা অটোগ্রাফ শিকারিদের তীব্র ধমকে থামিয়ে দেওয়া হল।

আমরা যেখানে বসে খেলা দেখছি, তার ঠিক পেছনে চার্চগেট স্টেশন। লোকাল ট্রেনগুলো পরের পর যাচ্ছে। একটা করে শট খেলছেন সচিন আর গোটা মাঠে তার রেশ আছড়ে পড়া দেখে মনে হচ্ছে তিনিই যেন আধুনিক ভারতের আশা ও আকাঙ্ক্ষার শেষ স্টেশন! নইলে এই যা ঘটছে, কোন খেলায় কোন ক্রীড়াবিদকে ঘিরে তাঁর বিদায়বেলায় ঘটেছে! এ তো কলোসিয়ামে জীবনের মহানাটক!

শ্রদ্ধা

জীবনের শেষ টেস্টে ব্যাট করতে নামছেন। ক্রিস গেইলদের গার্ড অফ অনার।

এত চিৎকারের মধ্যে মানুষ কনসেনট্রেট করবে কী করে? আওয়াজই তো তাকে খেয়ে ফেলবে! সচিন এই সময় পা ঝাড়া দিয়ে বারবার উইকেটের দু'ধারে হাঁটতে শুরু করলেন। তাঁর ঘনিষ্ঠ বন্ধু বললেন, জোন-এ যাচ্ছে আরও বেশি করে। শুনলাম একলা প্রতিদিন আধ ঘণ্টা করে এই 'জোন'-এ যাওয়ার মানসিক ট্রেনিং রপ্ত করেছেন সচিন। অন্তত পাঁচ-সাত বছর ধরে ট্রেনিংটা নিয়মিত করে আসছেন। কৌশলটা হল, মনের অ্যান্টেনা এমন ভাবে অনুশীলনে-অনুশীলনে সেট করা থাকবে যে, সে বাইরের চিল-চিৎকারের সিগন্যাল রিসিভই করবে না। শুধুই বোলার আর বল দেখবে। নিজেকে বিচ্ছিন্ন করে নিতে পারবে পারিপার্শ্বিক থেকে। এটা দু'টো কানকে ট্রেন করার কৌশল যে, ভারতে খেলা হলে ব্যাট করতে নামার সময়ই দ্রুত শাটার টেনে দেবে।

কিন্তু চোখ? চোখের ট্রেনিং কী ভাবে সম্ভব? সচিন যখন দিনের শেষ ওভার ব্যাট করছেন, গোটা তেন্ডুলকর পরিবার এবং বন্ধুরা আতঙ্কিত— শেষ ওভার বিষ বয়ে আনবে না তো! ঠিক এই সময় হোস্ট ব্রডকাস্টার ভিডিও স্ক্রিনে সচিনের মা-কে বারবার দেখানো শুরু করল। সুপারহিট সোপ অপেরাতেও এই সব দেখার সুযোগ নেই। বিদেশি রাষ্ট্রের বিরুদ্ধে জনতার মাঝে ছেলে ব্যাট করছে। চাদর জড়ানো মা সামনে বসে সেটা দেখছেন। ভিডিও স্ক্রিনে তাঁর ছবি সরছে না। যখন সরলো, তখন এল কোচ আচরেকরের মুখ। এর পর আমির খান, নীতা অম্বানীরা। গ্যালারিতে সচিনের বন্ধুরা প্রচণ্ড উত্তেজিত— এটা কী করছে স্টার স্পোর্টস? বেচারা মা-কে বারবার দেখলে তো আরও উইক হয়ে যাবে। তা-ও কি না দিনের শেষ ওভার! এটা কী হচ্ছে?

অজিতকে তাতানোর চেষ্টা হল। উত্তরে তিনি কিছুই বললেন না। নাকি শুনতেই পেলেন না! তেন্ডুলকর প্যাভিলিয়নে ফেরার সময় প্রথম তাঁর দাদার মুখে শব্দ শুনলাম, "যাক"। ওটা অবশ্যই তাঁদের গোটা পরিবারের সমবেত আশ্বস্ত কণ্ঠস্বর। যাক, কাল একটা স্বপ্নের সুযোগ থেকে গেল।

কোনও কোনও ক্রিকেটপ্রেমীর আবার হয়তো মনে হবে, নতুন করে স্বপ্ন কী দেখব? বিষ্যুদবারেরটাই তো দিবাস্বপ্ন ছিল! হতে পারেন ব্র্যাডম্যান তাঁর ৯৯.৯৪ নিয়ে তর্কাতীত ভাবে সর্বোত্তম। সচিন সেখানে ৫৩। অন্তত ব্যাটিং গড়ে তুলনাই হয় না। কিন্তু বিদায়বেলার যুদ্ধে তিনি পরিষ্কার হারিয়ে দিয়েছেন ডনকে! শুধু ৩৮ রানে এগিয়ে নেই। ইতিহাস বলবে, টিভি স্পনসরের বাণিজ্যিক অভিসন্ধি, সমর্থক হয়েও কার্যত বিরোধী দর্শক এবং কুতুবমিনারোচিত চাপের সঙ্গে শেষ ইনিংসে মোটেও ব্র্যাডম্যানকে যুঝতে হয়নি। সচিন যা সামলালেন, তার চেয়ে প্রাচীন যুগের অরক্ষিত উইকেটে হেলমেটহীন খেলা সহজ।

স্কোরবোর্ডে রানটা হয়তো মাত্র ৩৮ ব্যাটিং। কাল তিন অঙ্ক হবে কি না, বিন্দুমাত্র স্থিরতা নেই। কিন্তু রূপকথার তেন্ডুলকর সিরিজে ওয়াংখেড়ের বিরাশি মিনিট অবধারিত উঠে গেল। মরুঝড়, ওয়ার্ন-নিধন আর সেঞ্চুরিয়নের পাশে।

এটা যে নিছক ক্রিকেট-যুদ্ধ জেতা বা রানে সীমাবদ্ধ ছিল না। মানুষের নিজেকে অবিশ্বাস্য অতিক্রম করার সংগ্রাম ছিল। ঘটনাচক্রেই কেবল ক্রিকেট মাঠে ঘটল!





ছবি: উৎপল সরকার।


পুরনো খবর: নয়া প্রজন্ম নিয়ে চর্চা সরিয়ে আজ মুম্বইয়ে সচিন-উৎসব

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আনন্দবাজার এক্সক্লুসিভ


আরও এক বছর

খেললেই পারত: দিলীপকুমার

গৌতম ভট্টাচার্য • মুম্বই


বিশ্বে ছড়ানো সচিন তেন্ডুলকরের কোটি কোটি অনুরাগীর মতো তিনিও সকাল থেকে টিভি-র সামনে! যদি ভারত প্রথম ব্যাট করে আর আজই সচিনকে দেখতে পান। টস জিতেও ধোনি ব্যাট করেননি। তবু সচিনকে দেখার নেশায় টিভি বন্ধ করে দেননি। বরঞ্চ দুপুরের ঘুমটা বিসর্জন দিয়েছেন।

সচিনের ভক্ত অগণিত। কিন্তু এত বেশি বয়সি উৎসাহী নিশ্চয়ই হাতে গোনা যাবে। তা-ও আবার যিনি নিজে এত বিখ্যাত!

এনার নাম ইউসুফ খান। বয়স ৯১। লোকে চেনে অন্য নামে— দিলীপকুমার!

দিলীপ এতই সচিনভক্ত যে, কোনও আড্ডায় বা মহল্লায় সচিনকে দেখতে পেলেই টেনে নিয়ে আড্ডা মারেন। বৃহস্পতিবার বেগম সায়রা বানু এবিপি-কে জানালেন, গত বকরি ঈদে শেষ বার মুখোমুখি হয়েছেন দিলীপকুমার আর সচিন। শাহরুখ খানের বাড়ির পার্টিতে। সে দিনও আড্ডা হয়েছিল। মাসখানেক আগের ঘটনা।


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সিনেমার প্রবাদপুরুষ বয়স ৯১

সেই বার্তা

সচিনকে আমি মনে করি মায়েস্ত্রো...ওর পেশার জাদুকর। আমি মোটেও চাইনি ও এখন খেলা ছাড়ুক!

আমার মতো অগুন্তি, কোটি কোটি ক্রিকেটপ্রেমীর কাছে সচিনের অন্তিম ভাবমূর্তি থেকে গেল যে,

কঠোর সংকল্পবান, একমনা, মর্যাদাব্যঞ্জক আর প্রতিটি গৌরবজনক মুহূর্তে তার স্রষ্টার কাছে সব সময়

কৃতজ্ঞতায় অবনত। বাকি যে দিনগুলো এই পৃথিবীতে আছি, সচিনের এই স্মৃতিটাই বুকে নিয়ে থাকব।


ফিল্ম ইন্ডাস্ট্রিতে সবাই দিলীপকুমারের ভক্ত আর তিনি হলেন কি না অকৃত্রিম সচিন ভক্ত। দিলীপ বেঙ্গসরকর একটা মজার ঘটনা বলেন। প্রয়াত শাম্মি কপূরের সেটা পঁচাত্তরতম জন্মদিন। ২০০৫ সালের কথা। সস্ত্রীক নিমন্ত্রিত বেঙ্গসরকর হোস্টকেই জিজ্ঞেস করে বসলেন, শাম্মিজি আপনাকে কী দেব ভেবে পাচ্ছি না। আপনার তো সবই আছে। শাম্মি তখন বলেন, আমার সেরা বার্থ ডে গিফ্ট হবে যদি তেন্ডুলকরকে আমার বাড়িতে এনে দিতে পারো। বেঙ্গসরকর ফোনে ধরলেন সচিনকে। তিনি বলছেন, আমার তো একটা কাজ রয়েছে। দিলীপ একেবারে দাদাস্থানীয় সচিনের। বললেন, এটা না করিস না। যে করে হোক সময় দে। অন্তত ১০ মিনিট ঘুরে যাস। শাম্মি কপূর তো যে সে লোক নন।

পরের দিন জন্মদিনে ঢুকে বেঙ্গসরকর আবিষ্কার করলেন, সচিনকে নিয়ে বসে আছেন দিলীপকুমার। পরের দিন ফের জিজ্ঞেস করলেন, কী শাম্মিজি, বার্থ ডে গিফটে খুশি তো?

শাম্মি বলেন, "খুব খুশি। কিন্তু হ্যাঁ আমি আর পেলাম কোথায় ওকে! দিলীপ তো ওকে প্রায় একচেটিয়া নিয়ে নিল।"

এ হেন দিলীপকুমারের ভাইপো রেহান ছোটবেলার বন্ধু সচিনের। কিন্তু তাঁর মুখ থেকে বা শাহরুখের বাড়িতে দেখা হওয়ার দিনও দিলীপ বিন্দুমাত্র আভাস পাননি সচিন যে খেলা ছেড়ে দিচ্ছেন! আশা ভোঁসলের মতো তিনিও মনে করেন, আরও কিছু দিন খেললে ভাল হত। অন্তত আর একটা বছর।

*

ক্রিকেটের প্রবাদপুরুষ বয়স ৪০

আনন্দবাজারকে দেওয়া তাঁর বক্তব্যে একানব্বই বছরের বৃদ্ধ এ দিন বললেন, "সচিনকে আমি মনে করি মায়েস্ত্রো… ওর পেশার জাদুকর। আমি মোটেও চাইনি ও এখন খেলা ছাড়ুক! আমার মতো অগুন্তি, কোটি কোটি ক্রিকেটপ্রেমীর কাছে সচিনের অন্তিম ভাবমূর্তি থেকে গেল যে, কঠোর সংকল্পবান, একমনা, মর্যাদাব্যঞ্জক আর প্রতিটি গৌরবজনক মুহূর্তে তার স্রষ্টার কাছে সব সময় কৃতজ্ঞতায় অবনত। বাকি যে দিনগুলো এই পৃথিবীতে আছি, সচিনের এই স্মৃতিটাই বুকে নিয়ে থাকব।"

গোটা বলিউড যাঁর প্রতি শ্রদ্ধায় অবনত। যাঁর সম্পর্কে গত কালও সেলিম খান বলছিলেন, দিলীপ সাবকে কপি না করে ওর পরবর্তী অধ্যায়ে সুপারস্টার হয়েছে এমন এক জনের নাম বলুন! হিন্দি বাণিজ্যিক সিনেমার টার্ম অব রেফারেন্স উনি।

সেই মানুষটা ওয়েস্ট ইন্ডিজ অল আউট হয়ে গেল শুনে বিকেলের দিকে সচিনের ব্যাট আসতে পারে এমন সম্ভাবনায় আজও ছটফট করেন, ভাবাই যায় না! রাতে সায়রা বানু বললেন, "সেই বসে পুরো খেলাটা দেখল। সচিনের ব্যাটিং দেখে খুব খুশি।"

http://www.anandabazar.com/15khela4.html


..तब अंजलि ने राहत की सांस ली

शुक्रवार, 15 नवंबर, 2013 को 11:54 IST तक के समाचार

सचिन तेंदुलकर ने जब अपने आख़िरी यानी 200वें टेस्ट मैच में अर्द्धशतक पूरा किया तो उनकी पत्नी अंजलि तेंदुलकर ने राहत की सांस ली.

मुंबई के वानखेडे स्टेडियम में वेस्टइंडीज के ख़िलाफ़ दूसरे टेस्ट के दूसरे दिन सचिन सुबह से ही रंग में थे. आते ही उन्होंने जल्दी-जल्दी दो चौके लगाए.

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फिर टीनो बेस्ट की गेंद पर बाउंड्री लगाकर 92 गेंदों पर अपनी 68वीं हाफ सेंचुरी पूरी कर ली. जैसे ही वह इस खास पड़ाव तक पहुंचे, स्टेडियम में बैठी पत्नी अंजलि ने राहत की सांस ली.

अंजलि ने आंखें बंद की. सिर झुकाया. सीने पर हाथ रखा. फिर क्लिक करेंसचिनकी ओर देखकर हाथ हिलाया.

पहली बार स्टेडियम में मैच देख रही उनकी मां के चेहरे पर भी राहत साफ झलक रही थी.

वहीं दोस्तों के साथ बैठे बेटे अर्जुन और बेटी सारा के चेहरे भी खिल गए. अर्जुन बॉल ब्वॉय की भूमिका में थे.

आमिर ने टाले सारे कार्यक्रम

पूरा क्लिक करेंतेंदुलकरपरिवार पहली बार एक साथ वानखेडे पर बैठकर सचिन का मैच देख रहा है.

वानखेडे में बॉलीवुड ही नहीं राजनीति जगत की हस्तियां बड़ी संख्या में उमड़ी हुई हैं.

इसमें कांग्रेस नेता क्लिक करेंराहुल गांधी से लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण तक शामिल थे.

आमिर ख़ान को अपनी आने वाली फ़िल्म धूम-3 के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने जाना था. लेकिन उन्होंने इसे टाल दिया.

क्लिक करेंसचिन की हॉफ सेंचुरी पूरी होते ही वह खुशी के मारे खड़े हो गए और देर तक ताली बजाते रहे.

आमिर अब बड़ी स्क्रीन पर सचिन तेंदुलकर की भूमिका निभाना चाहते हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए क्लिक करेंयहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें क्लिक करेंफ़ेसबुकऔर क्लिक करेंट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

http://www.bbc.co.uk/hindi/sport/2013/11/131115_sachin_halfcentury_ssr.shtml

Emotional cries of 'Sachin, Sachin' echo across India

India's favourite cricketing icon Sachin Tendulkar is playing his 200th and final Test match in Mumbai against West Indies


PTI

Mumbai: Delirious crowds greeted India's Sachin Tendulkar as he walked out to bat in his last Test match on Thursday, an emotional farewell game for a national hero whose 24-year career has made him a cricketing legend.

Crowds at the Wankhede stadium in his home town of Mumbai erupted as Tendulkar headed for the crease on the first day of the match, walking through a guard of honour created by his West Indian opponents, television pictures showed.

Each run was greeted with raucous applause and cheering, with several textbook cover drives exhibiting the elegant strokeplay that has marked Tendulkar out since his international debut in 1989.

He finished the day unbeaten on 38, having hit six boundaries off 73 balls, setting the scene for further excitement on Friday.

The 40-year-old is ending an international career during which he became the all-time leading Test and one-day batsman and the only man to score 100 international centuries.

Ahead of the match, he said the last 20 years had been "marked by some of the most challenging, exhilarating, poignant and memorable moments of my life".

"The game has seen so much change over the last two decades - from advances in technology, new formats, yet the basic spirit and passion surrounding the game remains the same," he wrote in a newspaper article.

The end of the "Little Master", who has almost god-like status in his cricket-mad country, has been met with nationwide nostalgia for his sporting feats.

As he strode to the crease, acknowledging the applause with a modest raising of his bat, Indians all over the country huddled around television sets and Twitter exploded with messages wishing him luck.

Tendulkar led the team out onto the field at the stadium in the morning and the toss took place with a specially minted coin bearing his image on one side, footage showed. Cries of "Sachin! Sachin!" echoed throughout the day.

Excitement around the game has been building since last month, when he announced his intention to retire. Highlights of his innings and interviews have been looping on news channels.

"He's not just a cricketer. For me he's an ideal son, an ideal friend. The biggest thing about him is his humility," said fan Himanshu Kapadia, queuing for entry to the stadium with his two sons.

Among the spectators was Sudhir Gautam, Tendulkar's celebrity fan, who travels across the world to watch him while painted in the colours of the Indian flag - with his idol's name written across his chest and back.

The star's wheelchair-bound mother Rajni was also watching him bat for the first time after a special ramp was built for her at the south Mumbai stadium. She normally stays away out of fear of bringing bad luck.

Along with Indian politicians, businessmen and Bollywood stars, cricketing greats Brian Lara andShane Warne flew in for the game at Wankhede, where a huge security force has been deployed.

Many followers expressed disappointment that only 5,000 out of 32,000 seats were for the general public, with the rest reserved for VIPs such as sponsors and cricket club members.

"We will be very fortunate if we get another Sachin," Indian captain Mahendra Singh Dhoni said at the toss. "So it is important that we learn from the great man."

Since 16-year-old Tendulkar made his debut in Karachi in 1989, he has racked up an astonishing15,847 runs in 199 Tests, helping India win the 2011 World Cup and reach the top of the world rankings.

Along with murals, banners and billboards that have sprung up ahead of his last match, Mumbai's tattoo parlours have reportedly seen a surge in requests for designs of the sporting icon.

On a beach in the eastern state of Odisha, an artist created a huge sand sculpture of 200 cricket bats and Tendulkar's face.

"Sachin Tendulkar was the best batsman of my generation and it will be a privilege to be in Mumbai," wrote Australia's Warne, who is commentating on the match.

British Prime Minister David Cameron, on a visit to New Delhi, called him "absolutely an all-time great" and said he was an example and inspiration to cricket-lovers.

Despite his glowing status, Tendulkar's cricketing powers have waned in recent years and some suggested he should have retired earlier. The latest of his 51 Test centuries was back in January 2011 against South Africa.

Reuters, 11/10/2013

Sachin retires: Depressed India bids adieu to its favourite son

Scroll down to see what the newspaper headlines looked like, a day after Tendulkar announced his retirement

Fri, 15 Nov 2013 11:15:00 GMT | By PTI

Sachin Tendulkar is Time magazine's 'Person of the Moment'

The 'tribute-list' for Sachin Tendulkar continues to grow with the Time magazine calling him 'Person of the Moment'


Reuters

New York: Accolades continued to pour in for Sachin Tendulkar with the 'Time' magazine naming the legendary Indian batsman its "Person of the Moment" as he plays his last Test in Mumbai.

"The world's greatest cricketer plays his last match...much to the disappointment of throngs of adoring fans," the magazine said of the 40-year-old, who will bid adieu to cricket after playing his 200th Test against the West Indies in Mumbai.

"India's top cricket player, Sachin Tendulkar, is regarded one of the greatest batsman of all time. The only player to score 100 international centuries, Tendulkar leaves the sport as the greatest player of his generation," the magazine said.

Tendulkar's stellar 24-year cricketing career boasts of innumerable records and milestones which would be hard to surpass.

He has been showered with adulation not only in India but across the world with leading US dailies paying rich tributes to the master blaster for his "supreme batsmanship" and "unwavering modesty".

The magazine also put out a special online feature highlighting Tendulkar's 10 greatest moments, including his first 100 in 1990 against England, his 2001 game against Australia when he became the first player ever to score 10,000 runs in the one-day format, his unprecedented 200 runs in a single innings in a one-day international game against South Africa in 2010 and the 2011 World Cup win.

Another Time article said that as the Little Master played his last Test, there was "as much a celebration of a great batsman as a poignant meditation on the vacuum he will leave behind".

When Tendulkar's last match is over, "a nation will have to be content with its memories," the magazine said.

Fri, 15 Nov 2013 09:00:00 GMT | By Saket Parekar, India Syndicate

Live Blog: Day 2 of Sachin's final Test

Live updates from the second day of the 2nd Test between India and West Indies in Mumbai


IANS photo

1:10 pm: Captain MS Dhoni is out in the middle in place of Pujara, who is gone after a fine innings. Meanwhile, Shillingford is heading for another five-wicket haul against India.

1:07 pm: Pujara is gone. Caught and bowled by, guess who? Shane Shillingford gets his fourth victim. Pujara out on 113, India 354 for 5. Live Scorecard

1:00 pm: 350 comes up for India. Starting the day at 157 for 2, the hosts have made a fast progress. With just over an hour to go till Tea, Dhoni couldn't have asked for more from his top order. Or as Ravi Shastri would say, 'this is just what the doctor ordered!' Live Scorecard

12:55 pm: Rohit Sharma at the other end has made a very aggressive start, having hit two boundaries and a six already. He has to be careful though, as he was nearly caught out during Shillingford's last over.

12:50 pm: There it is! Pujara gets to his 5th Test hundred. He has been rock solid today and has played a typically composed knock. Take a bow, Che!

12:43 pm: In-form local boy Rohit Sharma is the new man in. Meanwhile, let's not forget that Pujara is inching towards a deserving hundred

12:40 pm: Oops and Kohli is gone! He was looking so good, and yet one lapse of concentration has cost him. It's inevitably Shane Shillingford again to West Indies' rescue. Kohli edges it straight to Sammy at first slip. Kohli out on 57 and India are 315 for 4. Live Scorecard

12:35 pm: "I don't play for records, I play for enjoyment and play with lots of passion. That's how cricket started. I didn't start playing cricket to break all the records; it's happened along the way. The dream was to play for India and do my best." Tendulkar's attitude has been key to his success. Here are some of the best Sachin Tendulkar quotes

12:30 pm: It may seem that Sachin was out only a few moments ago. But believe it or not, Pujara and Kohli have already put up 86 runs for the fourth wicket. That's how fast they have been playing. Or perhaps that's how hard it is to get over the fact that Tendulkar is out.

12:22 pm: Kohli gets his half-century. He has taken only 53 balls to get there. It's Virat's 7th Test fifty and he has looked extremely confident today. Live Scorecard

12:15 pm: And we're back after Lunch. Pujara is fast approaching his fifth Test hundred while Kohli is quickly nearing his fifty here. Both batsmen look in good touch and West Indies need a few wickets very quickly before they take the game beyond their reach.

12:00 pm: This tweet from Sachin Tendulkar on Nov 13: "I am really touched with #ThankYouSachin messages. Your support all these years have inspired me to give my best."  is now officially the most retweeted tweet of all time in India. It has been retweeted more than 9000 times and the number is still rising.

11:55 am: Mahesh Bhupathi on Twitter: "Been to 2 world cup football finals but the atmosphere and the emotion at the stadium today was second to none, glad I went #ThankYouSachin"

Live Scorecard | Pics: Sachin's swansong in Mumbai | Match pics: Mumbai Test | Farewell Sachin

11:30 am: India ahead by 100 runs. And it's time for lunch here in Mumbai. Despite Sachin Tendulkar's heartbreaking dismissal on 74 this morning, the session has totally belonged to India. Pujara (85) and Kohli (36) are still at the crease with India leading by 100 runs. We'll be back after the lunch break to bring you the live updates from the second session. Stay with us. Live Scorecard

11:25 am: So many would have thought that Sachin would go on to make his 101st hundred here today. But it was not to be. Unless he gets to play in the 2nd innings and adds to his tally, we'll just have to make our peace with his ton of tons.

11:20 am: Paying tribute to Sachin Tendulkar, the US media likened his retirement to Mahatma Gandhi's death. Give us your thoughts on that.

11:15 am: Aakriti Mehta on Twitter: "#ThankYouSachin for everyone you kept off the Bombay roads.You're not the only one creating history today, I reached andheri east in 20 mins"

11:10 am: Big call by the umpire there! Pujara is the set batsman and his dismissal soon after Tendulkar would have surely put some pressure on the Indians. But he survives and we get on with the game.

11:05 am: Oh and a big shout for a catch against Pujara here off Shillingford's bowling. The umpires don't seem sure and they've asked the third umpire to check if the fielder at short leg has taken it cleanly. And after looking at many, many replays from many angles, Vineet Kulkarni gives it not out. Windies are extremely unhappy.

11:00 am: Meanwhile, Pujara and Kohli have kept the runs coming at a good pace. India get to 250. Live Scorecard

10:55 am: "India should declare... #thankyousachin"-- Russel Arnold on Twitter.

10:50 am: Virat Kohli is the new man in. It would be hard to concentrate now with all the lumps in our throats.

Live Scorecard | Pics: Sachin's swansong in Mumbai | Match pics: Mumbai Test | Farewell Sachin

10:45 am: Is that the last we have seen of the Little Master? Quite a few Indians would surely become West Indies supporters for the next few hours in the hope to see Sachin bat again.

10:39 am: Oh dear, Tendulkar is gone. It's hard to believe. It's such a soft dismissal. Pin drop silence for a moment in the crowd. It was the first over after drinks and Tendulkar edged Deonarine straight to Sammy at slips. After a brief silence every single person in the stadium stands and applauds the Master's every step back to the pavilion. Tendulkar falls on 74.

10:30 am: It's time for drinks with India 216 for 2 after 47 overs. Sachin on 71, Pujara on 58. Live Scorecard

10:25 am: Tendulkar and Pujara have gone about it very swiftly so far today. With nearly sixty runs within the opening hour, they have put India in complete control.

10:22 am: And now, Pujara completes his fifty. Almost completely overlooked so far due to the limelight on Tendulkar. But a typical Pujara innnings of quality and patience.

10:20 am: India past 200 now. Tino is replaced by Gabriel. Live Scorecard

10:16 am: Ayaz Memon tweets: "Tendulkar standing on his toes, driving a fast bowler through cover off the back-foot is a sight for the gods".  We couldn't agree more, Mr Memon!

10:15 am: Aakash Chopra on Twitter: "Straight Drive-Check, Cover drive-Check, Square Cut-Check, Sweep-Check...can we pl have a pull too :) Greedy. #ThankYouSachin"

10:10 am: Sachin is treating the audience with some sumptuous strokes now. Hits Tino Best for a spectacular push on backfoot through the covers. Best responds with a bouncer, like he has done on multiple occasions today.

10:07 am: India into lead. They have gone past 182 in no time this morning. And from the look of things, they seem to be heading for a big first innings lead. Live Scorecard

10:03 am: To be fair to Tino, he has bowled fairly well this morning and him vs Tendulkar promises to be an interesting battle. Meanwhile, now that he's past 50, do you think he will score a hundred? Let us know here

10:00 am: 100-run partnership between Sachin and Pujara. Superb stuff from both batsmen. Sachin meanwhile, cuts Shillingford away for a four to move to 56.

9:55 am: And there it is! Sachin's gets's his 68th Test fifty with a trademark straight drive off Tino Best, who has been acting a bit cocky since that shout against the Master in the last over.  Live Scorecard

9:48 am: Tendulkar moves on to 48 with a single off Shillingford's last delivery. It means he will face Tino Best again in next over.

9:45 am: All sorts of drama in the middle as Tino Best goes for a huge shout for a caught behind against Tendulkar. Nigel Llong says no. The entire stadium must have missed a heartbeat there. Best follows up with an excellent bouncer which Tendulkar ducks.

9:42 am: It would really please the fans here if Tendulkar gets past his fifty early on today.

9:40 am: Well, Tendulkar has calmed the early nerves with a couple of confident fours off Shillingford, who is into the attack from the other end. He races to 47.

9:34 am: Pujara's single gets Tendulkar on strike and Wankhede goes berserk. You can wish Sachin good luck in his final test here

9:30 am: We're just about to get started here. Sachin and Pujara are out in the middle. Let's hope we're in for something special from the Little Master today. Tino Best will bowl the opening over for West Indies with Pujara on strike.

Full Scorecard | Pics: Sachin's swansong in Mumbai | Match pics: Mumbai Test | Farewell Sachin

9:23 am: Also, here are the match pictures from day 1

9:20 am: While this being Sachin's final Test is already history in the making, this day is already marked as an iconic day in cricketing chronicles. On this day in 1989 the Little Master made his Test debut vs Pakistan in Karachi. 24 years on, he's doing it for one last time for his country. Here's the Sachin Tendulkar timeline

9:18 am: Savour every moment of this folks, because this is the last time you're going to see the greatest of them all in action. Here are the best pictures from Sachin's swansong in Mumbai

9:15 am: India won the toss yesterday and asked West Indies to bat first. Pragyan Ojha's 5-40 and Ashwin's 3-45 helped India skittle them out for 182 before they managed to post 157 for 2 in reply. Most importantly and perhaps fittingly, Sachin Tendulkar looked in good shape and was unbeaten on 38 at stumps on day one. In case you missed all the action, here's the day 1 match reportand the full scorecard

9:10 am: We brought you every little detail along the way in our live blog from day 1. Have a look at ithere.

9:05 am: Hello and welcome to MSN India's live blog of the 2nd day of this historic match at the Wankhede Stadium in Mumbai, which happens to be Sachin Tendulkar's 200th and final Test.

PTI, 13/11/2013

The beginning of the end

Sachin Tendulkar's 200th and final Test match gets underway this Thursday at the Wankhede stadium in Mumbai

Live Image

Without doubt the most enduring phenomenon in modern cricket and India's biggest sporting icon, Sachin Tendulkar is all set for an epic curtain call starting on Thursday when he steps on the field against the West Indies for his 200th and final Test where emotions will weigh heavy.

For once, an individual would be the focus even though it is a clash of two teams and why not, given that the individual in question is a man who successfully transformed from a prodigal talent to a living legend in 24 glorious years.

Tendulkar has been synonymous with the game in India for more than two decades and held in awe and admiration all over the cricket-playing world.

As a curly-haired teen with unbelievable talent, he walked in to the cricket field and the hearts of his fans quite effortlessly ever since his debut in 1989. And Such has been his domination in both the places that the vaccum he would leave seems unfillable.

Having won the first Test by an innings and 51 runs, Team India and their seniormost statesman will be focussed on inflicting another humiliating defeat on a mediocre Caribbean outfit at the Wankhede Stadium.

But the scores and statistics will certainly take backseat for the next few days as a nation gets ready to bid farewell to arguably its greatest and most revered sporting icon.

When Sir Don Bradman retired at the Oval in 1948, there were tributes but celebrations of a fantastic career were much muted.

But now as world cricket's most celebrated No 4 batsman bids adieu to the game, there is a silent prayer on everyone's mind -- let it be a farewell to remember.

While the onus will be on Mahendra Singh Dhoni to control on-field proceedings, it will also be difficult for the players not to feel overwhelmed by the occasion and emotions associated with the great man's farewell.

For the legend himself, he would like to sign off on a high in front of his friends and family with a knock that will be etched in everyone's memory in the years to come.

Having got a raw deal from umpire Nigel Llong in his penultimate Test match in Kolkata, the highest run-scorer in Test history would expect that a Shane Shillingford or Tino Best do not 'do an Eric Hollies' on him as he walks out to bat at his beloved Wankhede for the last time.

Legend has it that Sir Don's eyes became moist and he failed to spot Hollies' googly in his last Test innings to get out for a duck. It will be interesting how the 40-year-old Tendulkar keeps his emotions under check during the last few days of his glittering career.

May be he would like to finish with a flourish like Greg Chappell, who scored a century in his final knock before calling time on his career.

A bowling attack which has one quality spinner and some really average medium pacers (injured Kemar Roach is already on his flight back home) is something that Tendulkar can still negotiate playing from memory.



सचिन तेंदुलकर का क्रिकेट करियर 24 साल के लंबे सफ़र के बाद थमने वाला है. आंकड़ों में देखें सचिन के सचिन 'रिकॉर्ड' तेंदुलकर कहना क्यों उचित होगा.

http://www.bbc.co.uk/hindi/indepth/sachin_retirement_200_tests.shtml


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सोलह बरस की उम्र में सचिन तेंदुलकर ने पाकिस्तान में अब्दुल क़ादिर के छक्के छुड़ा दिए थे. सलिल अंकोला बता रहे हैं सचिन के शुरुआती कारनामे.

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क्रिकेट पत्रकार अयाज़ मेमन का कहना है कि सचिन ने क्रिकेट प्रेमियों में जो भरोसा पैदा किया उसकी तुलना सिर्फ़ ब्रैडमैन से ही की जा सकती है.

हीरो जो बना उभरते भारत का प्रतीक

सचिन तेंदुलकर के क्रिकेट करियर के दौरान ही भारत एक आर्थिक ताक़त के रूप में उभरा और सचिन स्वयं इस उदय के प्रतीक बन गए.

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मुंबई में आखिरी मैच से पहले मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन ने सचिन तेंदुलकर का सम्मान किया है. सचिन ने भी पुराने दिन याद किए और हर स्तर पर सुविधा मिलने के लिए धन्यवाद दिया.

क़ादिर की गेंदों पर छक्कों की बौछार

गेंदबाज़ अब्दुल क़ादिर ये भूल गए कि उनके पास गेंद है तो सचिन के पास भी बल्ला है. उस ऐतिहासिक मैच के गवाह थे अब्दुररशीद शकूर.

सचिन महानतम क्रिकेटरः ब्रायन लारा

क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ों में से एक ब्रायन लारा मानते हैं कि सचिन को इतिहास में महानतम क्रिकेटर के रूप में याद किया जाना चाहिए.

सचिन सही मायनों में हीरो

भारत में खेलों में ब्रांड की शुरुआत ही सचिन से होती है. खेल प्रबंधन सलाहकार लतिका खनेजा नज़र डाल रही हैं ब्रांड सचिन पर.

पुरानी शराब की तरह हैं सचिन

सचिन को किसने ये सलाह दी थी कि 'तुम एक उम्दा लेग-स्पिनर बन सकते हो.' पढ़िए मनिंदर सिंह की ज़ुबानी....

तस्वीरों में:

बीबीसी अर्काइव से

सचिन के रिकॉर्ड्स

गावस्कर की नज़र में सचिन

सेवाएँ

अन्य वेबसाइटें

http://www.bbc.co.uk/hindi/indepth/sachin_retirement_200_tests.shtml


सचिन 74 रन बनाकर आउट

शुक्रवार, 15 नवंबर, 2013 को 11:24 IST तक के समाचार

सचिन की मां पहली बार उनका मैच देखने स्टेडियम आई हैं.

मुंबई के वानखेड़े में अपने करियर का आख़िरी टेस्ट मैच खेल रहे सचिन तेंदुलकर शतक लगाने से चूक गए हैं. वह 74 रन बना कर आउट हो गए.

वेस्टइंडीज़ के नरसिंह देवनारायन की गेंद पर डैरेन सैमी ने पहली स्लिप पर सचिन का कैच लिया.

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उनके आउट होते ही मानो पूरे स्टेडियम में सन्नाटा छा गया.

इससे पहले उन्होंने गुरुवार के अपने 38 रन के स्कोर से आगे खेलना शुरू किया. शुक्रवार को भी उन्होंने कुछ शानदार शॉट्स लगाए जिसे देखकर दर्शक मंत्र मुग्ध हो गए.

क्लिक करेंसचिन ने 118 गेंदों पर 12 चौकों की मदद से 74 रन बनाए.

सचिन का आखिर मैच देखने के लिए स्टेडियम खचाखच भरा हुआ है. हज़ारों की संख्या में दर्शक क्लिक करेंस्टेडियम के बाहर खड़े हैं.

शतक की उम्मीद टूटी

आज सुबह जब उन्होंने बल्लेबाजी शुरू की तो सभी को लग रहा था कि वो अंतिम मैच में शतक लगाकर विदा होंगे.

उन्होंने कुछ शानदार स्ट्रोक भी लगाए. इससे दर्शकों में ज़बर्दस्त जोश देखा गया.

सचिन के आउट होने के वक़्त भारत का स्कोर तीन विकेट पर 221 रन था.

उन्होंने तीसरे विकेट के लिए क्लिक करेंचेतेश्वर पुजारा के साथ 144 रनों की साझेदारी की.

इससे पहले मुरली विजय 43 और क्लिक करेंशिखर धवन 33 रन बनाकर गुरुवार को आउट हुए थे.

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First Published: Thursday, November 14, 2013, 08:15

http://zeenews.india.com/hindi/news/crime-reporter/punters-bet-heavily-on-sachin-tendulkar-s-first-innings/194936

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India v West Indies, 2nd Test, Mumbai, 1st day

Tendulkar 38* after West Indies fold for 182

The Report by Siddarth Ravindran

November 14, 2013

ndia 157 for 2 (Vijay 43, Tendulkar 38*) trail West Indies 182 (Powell 48, Ojha 5-40, Ashwin 3-45) by 25 runs

Scorecard and ball-by-ball details


*

Pragyan Ojha took his sixth five-for to skittle out West Indies© BCCI

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Teams: India | West Indies


Rarely have fans of a team in as dominant a position as India were at the Wankhede Stadium felt this tense. In the first two sessions, West Indies had served up another dose of inept batting to roll over for 182, and then India's openers battered 77 at nearly a run-a-ball. That's when Shane Shillingford struck twice in an over, to the delirious cheers of the home fans, and brought Sachin Tendulkar to the batting crease, perhaps for the final time.

The knowledge that one false stroke could mark the end of the career of India's best-loved cricketer made it a nerve-wracking experience, even for the lucky few who had managed to wrangle hard-to-find tickets. Whether Tendulkar felt a similar anxiety or not, he produced an innings of such composure that some fans wondered why he had announced his retirement. In about 100 minutes in the middle, he showed off some of his signature strokes including the classical cover drive and the effortless punch down the ground.

The day began with a series of tributes to Tendulkar - the BCCI president N Srinivasan handed him a memento, a painted portrait was presented to him, the West Indies side gave him a framed autographed shirt, the coin at the toss was specially minted in his likeness - and ended with fans euphoric over having watched him bat one more time. And, as has always been the case with Tendulkar, they were hoping for one more century from the man who already has 51 of them in Tests.

West Indies were hoping for a century from at least one of their batsmen as well. Every Darren Sammy press conference is littered with talk about sensible batting, the need to shelve rash strokes and for the team to grind out overs. No one seems to be getting the message, least of all the captain himself, as for the third innings in a row this series, West Indies made a reasonable start before utterly collapsing.

After being asked to bat by MS Dhoni - a decision that surprised the experts - West Indies had progressed to 93 for 2 at lunch, and having played out the traditionally difficult early hours and the new ball, should have been looking for a substantial score. Instead, they slid from 140 for 3 to 182 all out as India's spin pair of R Ashwin and Pragyan Ojha ripped through the batting.

It wasn't an easy surface to bat on, with Ashwin extracting bounce and turn in the first session itself. The new-look opening pair of Bhuvneshwar Kumar and Mohammed Shami constantly attacked the stumps and had the ball swerving both ways. Still, it doesn't excuse a shocking batting display from the visitors though the fans absolutely loved it and the chants of 'We want Sachin' became deafening as the wickets tumbled.

Though Chris Gayle was undone by a rearing delivery early, Kieran Powell survived a nervy start and a straightforward chance at slip and put together the only substantial partnership of the West Indies innings with Darren Bravo. Bravo had a torrid time against Bhuvneshwar, nearly lbw twice after not offering shots to successive deliveries. He decided the best way out was to attack, and produced a couple of gorgeous hits off Ashwin, but the bowler won their battle with a delivery that spun and bounced which had Bravo caught-behind.

After lunch, there were a couple of rare sights. First, an Indian quick was operating with four slips and a gully as Shami tried to induce Marlon Samuels to drive outside off. Samuels played a bunch of loose strokes, eventually nicking a flighted delivery from Ojha to slips.

Then, in another surprise, Chanderpaul - the man known more for his crease-occupation skills than his big hitting - came out looking to attack. He slammed his second ball for six over midwicket, and was always on the lookout for the quick single. He was dismissed by perhaps the ball of the innings from Bhuvneshwar, who got it to pitch around middle and zip across, forcing Chanderpaul to play, resulting in a nick to the slips.

That was followed by the worst shot of the innings. Sammy, already facing plenty of criticism over his place in the side, tried to slog across the line on his second delivery to hole out for a duck. After that, it was only a matter of time as Ashwin and Ojha made use of the helpful conditions to slice through West indies' brittle tail. The only blemish in the innings for India was the three regulation chances put down at slip.

M Vijay made amends for one of those misses with a stroke-filled innings. Shikhar Dhawan continued to find international cricket easy, hitting boundaries at will as India's openers made the pitch and bowling look docile. Dhawan holed out attempting to sweep a ball from outside off and two balls later Vijay was caught at bat-pad - cue possibly the loudest cheer for a home team losing a wicket, as Tendulkar walked out to a guard of honour and events of the first five hours of play were largely forgotten.

Siddarth Ravindran is a senior sub-editor at ESPNcricinfo Feeds: Siddarth Ravindran

http://www.espncricinfo.com/india-v-west-indies-2013-14/content/current/story/688353.html

ক্রিজে নামছেন সচিন। বৃহস্পতিবার ওয়াংখেড়েতে।

এই সময় ডিজিটাল ডেস্ক - মুম্বইয়ের জীবনের শেষ টেস্ট ম্যাচে প্রথম দিনের শেষে ৩৮ রানে অপরাজিত সচিন তেন্দুলকর। তাঁর সঙ্গে ক্রিজে রয়েছেন চেতেশ্বর পুজারা। ৪৯ বল খেলে তাঁর সংগ্রহ ৩৪, দ্বিতীয় টেস্টের প্রথম দিন থেকেই চাপে ক্যারিবিয়ান বাহিনী। মাত্র ৫৫.২ ওভারেই দশ উইকেট হারিয়ে ফেলে ওয়েস্ট ইন্ডিজ। তখন স্কোরবোর্ডে মাত্র ১৮২ রান। জবাবে দুই উইকেট হারিয়ে ৩৪ ওভার খেলে ভারতের সংগ্রহ ১৬৭। প্রথম ইনিংসে এখনও পর্যন্ত ওয়েস্ট ইন্ডিজের থেকে ২৫ রানে পিছিয়ে রয়েছে ভারত।



ওয়েস্ট ইন্ডিজের বিরুদ্ধে দ্বিতীয় টেস্টে দিনের শুরুতে আজ টসে জিতে প্রথমে ফিল্ডিং করার সিদ্ধান্ত নেয় ভারত। কিন্তু ভারতীয় বোলারদের সামনে দাঁড়াতে পারেননি ক্যারিবিয়ান দলের কোনও ব্যাটসম্যানই। ওয়েস্ট ইন্ডিজ দলের তরফে সর্বোচ্চ স্কোর ৪৮ রান করা পাওয়েলের। প্রজ্ঞান ওঝা নিয়েছেন পাঁচটি উইকেট। রবিচন্দ্রন অশ্বিন নিয়েছেন তিনটি উইকেট। ভুবনেশ্বর কুমার ও সামি আহমেদ একটি করে উইকেট নিয়েছেন।


ভারতের হয়ে ওপেন করেন মূরলী বিজয় ও শিখর ধাওয়ান। মূলরী বিজয় করেছেন ৪৩ রান। শিখর ধাওয়ানের সংগ্রহ ৩৩, দুই ওপেনার প্যাভিলিয়নে ফিরে যাওয়ায় প্রথম দিনের শেষে ক্রিজে রয়েছেন অপরাজিত সচিন তেন্দুলকর ও চেতেশ্বর পুজারা। তাঁর জীবনের শেষ টেস্টে সচিনের পারফরম্যান্সের দিকেই এখন তাকিয়ে সবাই।




*

বাজি ধরছি, সচিনের কাছেও

ম্যাচটা বিরাট চ্যালেঞ্জ

সচিন তেন্ডুলকরের বিদায়ী টেস্টে আনন্দবাজারে কলাম লিখছেন সৌরভ গঙ্গোপাধ্যায়


ভীষণ ভীষণ কঠিন একটা টেস্ট ম্যাচ নিজের শহরের মাঠে খেলতে নামছে সচিন তেন্ডুলকর। এবং সেটা অবশ্যই মুম্বইয়ে দেশের হয়ে জীবনে শেষ বারের মতো ব্যাট হাতে ক্রিজে নামবে বলে। আবেগের মাত্রাটা প্রচণ্ড রকমের বেশি থাকবে। চাপের মুখে বড় মঞ্চে সচিনের জ্বলে ওঠার ক্ষমতা নিয়ে স্বভাবতই কোনও প্রশ্ন নেই। কিন্তু ওয়াংখেড়েতে এ বার ওর মনে একটা চিন্তা সর্বদা ঘুরপাক খাবে, যেটা এর আগে কোনও দিন হয়নি।

চিন্তাটা হল: এই টেস্টের পর আমি আর কোনও দিন ভারতের হয়ে ব্যাট ধরব না! এ রকম একটা স্মরণীয় মুহূর্তে সফল হওয়ার চ্যালেঞ্জ আমি যেন নিতে পারি। সফল হওয়ার সুখ নিয়ে যেন ক্রিকেটজীবন শেষ করতে পারি। 'যেহেতু এত বছর ধরে সেরাদের বিরুদ্ধে সফল হয়ে এসেছি, সে জন্য আমি ভীষণ ভীষণ ভাল'—এ ধরনের চিন্তায় নিজেকে নিজে উদ্দীপিত করে তোলার ভাবনাও এ রকম সময়ে সচিনের মনের ভেতর থাকবে। আসলে যারা চ্যাম্পিয়ন, যারা নিজেদের পেশায় চূড়ান্ত সফল, তাদের কাছে অবসরের সময়টা একটা অদ্ভুত মুহূর্ত! এই সময় তাদের সবচেয়ে দরকার গোটা পরিস্থিতির মধ্যে নিজেকে থিতু করে তোলা।

কোনও সন্দেহ নেই যে, সচিনের বিদায়ী ম্যাচ ঘিরে মুম্বইয়ের আবহ দুর্ধর্ষ থাকবে। পুরো ক্রিকেট বিশ্বের চোখ বৃহস্পতিবার থেকে ওয়াংখেড়ে স্টেডিয়ামের দিকে থাকবে। গ্যালারির প্রতিটা আসন ভর্তি তো থাকবেই। ক্রিকেটের ইতিহাসে অন্যতম গ্রেট প্লেয়ারকে সম্মান জানানোর যাবতীয় উৎসব ইতিমধ্যেই এমসিএ শুরু করে দিয়েছে। যে উৎসব আগামী কয়েক দিনও চলবে। ইডেন তার প্রিয় সচিনের জন্য যে উৎসব গত সপ্তাহে করেছে, ওয়াংখেড়েতে আগামী ক'দিন তার দ্বিগুণ মাতামাতি হলেও আমি অবাক হব না। সত্যি বলতে কী, ভারতের বিখ্যাত সন্তান সচিন তেন্ডুলকরের অসাধারণ কেরিয়ারকে যে রকম ভাবে ক্রিকেটবিশ্ব সম্মান জানিয়ে এসেছে, তার জন্য আমি গোটা ক্রিকেটমহলের পিঠ চাপড়ে দিতে চাই। এত এত বছর ধরে সচিন যা-যা অর্জন করেছে, তার প্রতিটি কণা অর্জনের পুরোপুরি যোগ্য ও। এবং যেটা ভাবীকালের পক্ষে ভাঙা প্রচণ্ড কঠিন।

*

জাতীয় দলের হয়ে শেষ নেট প্র্যাকটিসে।

বুধবার ওয়াংখেড়েতে। ছবি: উৎপল সরকার।


"চব্বিশ বছর আমার পাশে থাকার জন্য আপনাদের আন্তরিক ধন্যবাদ।

আমার জন্য আপনাদের প্রত্যেকের বার্তা হৃদয় ছুঁয়ে গিয়েছে। এত বছর ধরে

আপনাদের এই সমর্থনই আমাকে প্রেরণা দিয়েছে।"—সচিন তেন্ডুলকর (টুইটারে)


সচিন-উৎসবের মধ্যেই অবশ্য মনে রাখতে হবে যে, ওয়াংখেড়েতে একটা টেস্ট ম্যাচ আজ শুরু হচ্ছে। যেখানে প্রত্যেকের মনে প্রশ্ন থাকবে, সচিন কি পারবে, ওকে ঘিরে যাবতীয় উৎসব থেকে মন সরিয়ে নিয়ে ব্যাটিংয়ের সময় ঈগলের দৃষ্টিতে প্রতিটা বল দেখতে? যে কাজ ও এত বছর ধরে করে এসেছে! ওয়াংখেড়ে ড্রেসিংরুম থেকে সচিন যখন শেষ বারের মতো ব্যাট হাতে বেরিয়ে আসবে তখন কি নিজের বুকের ধুকপুকুনি স্বাভাবিক রাখতে পারবে ও? আমি বাজি ধরছি, সচিনের কাছেও ব্যাপারটা বিরাট চ্যালেঞ্জিং হবে!

এই ভারতীয় দল অবশ্য কলকাতায় দেখিয়েছে যে, হাজারো হইচইয়ের মধ্যেও ওরা খেলাটার দিকে ফোকাসড্ থাকে। আমি নিশ্চিত, ওয়াংখেড়ের পিচে ভারতীয়রা আরও এক বার ওয়েস্ট ইন্ডিজের অবস্থা খারাপ করে ছাড়বে। ওয়াংখেড়ের পিচ কবে কেমন থাকে সেটা দেখতে আমি আগ্রহী থাকব। মনে হচ্ছে, গ্রেট ম্যানের জন্য ওয়াংখেড়ে কিউরেটর একটা পাটা উইকেট দেবে। যে পিচে হয়তো তৃতীয় দিন থেকে টার্ন পাওয়া যাবে। তবে প্রথম দিন থেকেই টার্ন করলে ক্যারিবিয়ান ব্যাটসম্যানদের সমূহ বিপদ। কারণ মুম্বইয়ের লাল মাটির বাউন্স কলকাতার পলিমাটির পিচের তুলনায় বেশি থাকে।

কোনও চোটটোট বাদে ভারতের প্রথম এগারোয় কোনও পরিবর্তন ঘটবে বলে মনে হয় না। কলকাতায় দুর্দান্ত টেস্ট আবির্ভাবের পর মহম্মদ শামির বোলিং ওয়াংখেড়েতে দেখার জন্য আমি মুখিয়ে আছি। খুব কম সময়ের ব্যবধানে আবার ভাল পারফরম্যান্স করার মতো মানসিকতা শামির মধ্যে তৈরি হয়েছে কি না সবাই বুঝতে চাইবে। কারণ ওই মানসিকতাই ঠিক করে দেবে যে, শামি কত দিন দেশের হয়ে খেলবে! সব রকম চাপ সামলে সর্বোচ্চ পর্যায়ের ক্রিকেটে টিকে থাকার খিদেই বা ওর ভেতর ঠিক কতটা আছে!


ওয়াংখেড়েতে মাস্টার ব্লাস্টার

(প্রথম শ্রেণির ম্যাচে)

রঞ্জি

১৯৮৮, ১০ ডিসেম্বর: গুজরাতের বিরুদ্ধে অভিষেকে ১০০*

১৯৯১-৯২: সেমিফাইনাল। দু'বছর পর সচিনের প্রত্যাবর্তন। দুই ইনিংসে সচিনের রান ৭০ আর ৮০।

১৯৯১-৯২: ফাইনাল। দ্বিতীয় ইনিংসে সচিনের ৭৫ বলে ৯৬ রান। হরিয়ানার কাছে ২ রানে হারে মুম্বই।

১৯৯৪-৯৫: ফাইনাল। পঞ্জাবের বিরুদ্ধে দুই ইনিংসে সচিনের সেঞ্চুরির দাপটে (১৪০ ও ১৩৯) ড্র করেও চ্যাম্পিয়ন মুম্বই।

১৯৯৯-'০০: ২৩৩ আর ১৩* রান। মুম্বই ফাইনালে।

১৯৯৯-'০০: ফাইনালে সচিনের ৫৩ আর ১২৮ রানের ইনিংস। মুম্বই ২৯৭ রানে হারায় হায়দরাবাদকে।

২০০৬-'০৭: প্রায় ছ'বছর পর রঞ্জিতে নেমে ১০৫ আর ৪৩ রান। ফাইনালে মুম্বই ১৩২ রানে হারায় বাংলাকে।

ইরানি ট্রফি

১৯৮৯- '৯০: রঞ্জির মতো সেঞ্চুরিতেই অভিষেক। দু'ইনিংসে রান ৩৯ ও ১০৩।

ফেব্রুয়ারি ২০১৩: ১৪০* রান।

ওয়াংখেড়েতে সচিনের ইরানি ট্রফি রেকর্ড: ম্যাচ ৩। রান ২৯৫। সর্বোচ্চ ১৪০*। গড় ১৪৭.৫০। সেঞ্চুরি ২।

টেস্ট

১৯৯৩: অভিষেকে ইংল্যান্ডের বিরুদ্ধে ৭৮।

১৯৯৭-'৯৮: শ্রীলঙ্কার বিরুদ্ধে ১৪৮।

১৯৯৯-'০০: দক্ষিণ আফ্রিকার বিরুদ্ধে ৯৭ আর ৮।

২০০০-'০১: অস্ট্রেলিয়ার বিরুদ্ধে ৭৬ আর ৬৫ রান।

২০০৪-'০৫: অস্ট্রেলিয়ার বিরুদ্ধে সচিনের ৫ আর ৫৫ রান।

২০১২-'১৩: ইংল্যান্ডের বিরুদ্ধে দুই ইনিংসেই ৮ রান।



পুরনো খবর: পনেরো বছরেই আমাকে পেটানো দেখে ওর জাত বুঝেছিলাম: মনিন্দর

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নয়া প্রজন্ম নিয়ে চর্চা সরিয়ে

আজ মুম্বইয়ে সচিন-উৎসব

গৌতম ভট্টাচার্য • মুম্বই


য়াংখেড়েতে গোটা কংক্রিটের ছাদ জুড়ে বৃত্তাকারে তাঁর ছবি। পাশে ফেয়ারনেস ক্রিমের বিজ্ঞাপন। যার মডেল তিনি।

সচিন তেন্ডুলকর তো? আজ্ঞে না। ফেয়ার অ্যান্ড লাভলির বিজ্ঞাপন তো করেন না সচিন। স্টেডিয়ামের ছাদজোড়া ছবিতে তাঁর থাকার সম্ভাবনাও তাই উধাও হয়ে যাচ্ছে। ওটা বিরাট কোহলি!

বুধবার ওয়াংখেড়েতে ঢুকে খুব প্রতীকী মনে হল দৃশ্যটা। সচিনের সম্মানে গোটা মাঠ জুড়ে মুম্বই ক্রিকেট সংস্থা একশোটা বিলবোর্ড লাগিয়েছে। এক-একটা বোর্ডে এক-একটা সেঞ্চুরির হিসেব। এগুলো রাখা জমিতে। জমি থেকে এগুলো গুছিয়ে নিয়ে তিনি অদৃশ্য হয়ে যাবেন। আর তাঁর উত্তরসূরি ক্রমশ আরও বড় উড়ানে ভাসমান হতে থাকবেন। তোমার হল শুরু, আমার হল সারা। শুধু অক্ষত থেকে যাবে ভারতীয় ক্রিকেটের ব্যাটিং পরম্পরা।

আর পাঁচটা দিন হলে ছবিটা এমনই হত। সচিন রমেশ তেন্ডুলকরের দু'শোতম টেস্ট মনে হচ্ছে অপ্রত্যাশিত নানান মুহূর্ত ভাঙবে-গড়বে। বিকেলের দিকে কাঁচুমাচু ভাবে এগিয়ে এলেন বিজ্ঞাপন সংস্থার কর্মী। দেখি তাঁর মক্কেলকে বলছেন, সব বিরাটের ছবি নামাতে হবে। এমসিএ আপত্তি করছে। কারা নাকি লিখে দিয়েছে, ছাদটা দেখে বোঝা যাচ্ছে না— ফেয়ারওয়েল কার? বিরাটের? না সচিনের?

অন্তত চল্লিশখানা ছবি বিরাটের। রুফটপ লেভেল থেকে সেগুলো সরাতে হলে তো অনেক জায়গা ফাঁকা হয়ে যাবে। সেই জায়গাটা ভরাট হবে কী করে? কর্মীটি বললেন, "যুক্তি-টুক্তি এখন চলবে না। যা বলছে করতে হবে।" ফোনের এক দিকটা শুনে আবছা মনে হল মক্কেলও কোনও আপত্তি করবেন না।

এটা একেবারে অন্য রকম টেস্ট ম্যাচ। পুরুষালি কর্কশতার নয়। জিঘাংসার নয়। এ হল সেন্টিমেন্টের মায়া মাখানো ম্যাচ। যেখানে যুক্তিকে নো নেটওয়ার্ক করে দিয়ে বারবার আবেগ লগ-ইন করবে।

*

শেষ বেলায়। বুধবার মুম্বইয়ের ওয়াংখেড়ে স্টেডিয়ামে অনুশীলন। ছবি: উৎপল সরকার।

সকালে ভারতীয় নেট প্র্যাকটিসে এক অপ্রত্যাশিত অতিথি। দূর থেকে তাঁকে দেখে নিঃসন্দেহ হওয়া যাচ্ছিল না, তিনিই কি না। একেবারে ন্যাড়া যে। আর আজ অবধি টিম ট্রেনিং করার সময় তাঁকে কেউ মাঠের ধারে পাশেও দেখেনি। সেই নারায়ণস্বামী শ্রীনিবাসন এত সকালে! চুলটা মনে হল নির্ঘাত ক্রিকেট বোর্ড সংক্রান্ত কোনও মানত-টানত ছিল, তিরুপতিতে বিসর্জন দিয়ে এসেছেন। টিম যেখানে প্র্যাকটিস করছে এর পর সে দিকে চলে গেলেন। কিছু পরে বোঝা গেল সরেজমিন তদারকিতে এসেছিলেন। প্রচুর গণ্যমান্য অতিথি ক্রিকেট ইতিহাসের অসম্ভব তাৎপর্যপূর্ণ এই মাইলফলক দর্শনে আসবেন। সব চেয়ে বড় কথা, এই প্রথম গোটা তেন্ডুলকর পরিবার মাঠে বসে তাদের 'আপলা সচিন'-কে দেখবে। সংগঠনে কোনও খুঁত রাখলে চলবে না। বিকেলে আবার ওয়েস্ট ইন্ডিজ প্র্যাকটিসে পাওয়া গেল শরদ পওয়ারকে। এমসিএ আর বোর্ড একসঙ্গে নয় পওয়ার আর শ্রীনি দুই ক্রিকেট প্রতিদ্বন্দ্বী কি না একজোট হয়েছেন ভারতীয় ক্রিকেটের সর্বকালীন শ্রেষ্ঠ রোমান্সের শেষ দৃশ্যের সুষ্ঠু পরিচালনায়!

কী কী ঘটবে টেস্ট ঘিরে? সচিনের ওপর একটা ব্যতিক্রমী ভিডিও তৈরি হয়েছে। সেটা কোনও দিন নিশ্চয়ই দেখানো হবে। জাতীয় পতাকায় রঞ্জিত বিশেষ টি-শার্ট তৈরি হয়েছে সচিন ও তাঁর পরিবারের জন্য। সেটা উপহার দেওয়া হবে। কিন্তু ভারতীয় দল তাঁকে কী দেবে? টিম ম্যানেজার বললেন, প্লিজ ওটা গোপন থাক। ডারেন স্যামি— তিনিই বা কী দেবেন? আটচল্লিশের ওভালে ব্র্যাডম্যান যখন ব্যাট করতে নামেন, নর্ম্যান ইয়ার্ডলি গোটা ইংল্যান্ড টিমকে পিচের কাছে জড়ো করে থ্রি চিয়ার্স দিয়েছিলেন। স্টিভ ওয়-কে সিডনি মাঠে একই ভাবে গার্ড অব অনার দিয়েছিলেন সৌরভরা। ওয়েস্ট ইন্ডিজ তেন্ডুলকরের জন্য কী ভেবে রেখেছে? ধোনিই বা তাঁকে কী ভাবে সম্মান জানাবেন? নাগপুরে সৌরভের শেষ টেস্টে তাঁকে অতর্কিত ক্যাপ্টেন্সি করতে দিয়েছিলেন অস্ট্রেলীয় ইনিংসের কয়েক ওভারে। এখানে কি সচিনকে টস করতে পাঠাতে পারেন? ভারত অধিনায়ক বললেন, "কিছু জিনিস সাসপেন্স থাক না!" ধোনির সাংবাদিক সম্মেলনে দশটার মধ্যে পৌনে দশখানা প্রশ্ন হল সচিনের ওপর।

টেস্ট ক্রিকেটের একশো ছত্রিশ বছরের ইতিহাসে কখনও একটা আস্ত টেস্ট ম্যাচ আর তাতে অংশগ্রহণকারী একুশ জন প্লেয়ার এমন গুরুত্ব হারিয়ে এক জন ব্যক্তিকে ঈশ্বরোচিত মর্যাদায় বসিয়ে দেয়নি। কারও জন্য হয়নি। ব্র্যাডম্যান না।

ভিভ না। লারা না। ওয়ার্ন না।

*

ওয়াংখেড়ের সচিন-মেজাজ। ছবি: উৎপল সরকার।

আজ পর্যন্ত হোস্ট ব্রডকাস্টিং চ্যানেলও কখনও বাইশ জন ভাষ্যকারকে নিয়ে একটা টেস্ট ম্যাচ কভার করতে নামেনি। সাধারণত নয়, সব সময়ই তাদের প্যানেল ঠিক থাকে। এমনকী প্রথম দিনে কে কে কখন বলবেন, সেই রুটিনও ঠিক হয়ে যায়। এ বার হচ্ছে না। নিয়মিত ভাষ্যকারদের বাইরেও আসলে স্টার স্পোর্টস নানান অতিথি আনছে। এক দিন শেন ওয়ার্ন। এক দিন স্টিভ ওয়। প্রথম দিন হিন্দিতে হয়তো হরভজন সিংহ। এক দিন অল্প সময়ের জন্য ভিভ। এক দিন স্টিভ ওয়! পুরো টেস্ট ওয়াসিম আক্রম।

দর্শকদের জন্যও আধুনিক প্রযুক্তি বিশেষ ব্যবস্থা রেখেছে। বিদেশের বড় বড় ম্যাচে যার প্রচলন রয়েছে, সেই গিগা-পিক্সেল পদ্ধতি অনুযায়ী প্রতিটি দর্শককে ক্যামেরা ধরে রাখছে। একটা বিশেষ ওয়েব অ্যাড্রেসে লগ-ইন করে প্রতিটি দর্শক, সে তিনি মাঠের যে প্রান্তেই থাকুন না কেন, নিজের ছবির প্রিন্ট-আউট বার করতে পারবেন। ছবিটা রেখে দিতে পারবেন নিজের নাতি-নাতনিদের জন্য যে, সচিনের ফেয়ারওয়েল ম্যাচে আমিও ছিলাম!

সচিনের এই বিশেষ মুহূর্তটায় আমিও ছিলাম— এটা যেমন সংগ্রহ করে ফেলেছেন টেস্ট ম্যাচ কভার করতে আসা যাবতীয় সাংবাদিক। ওয়াংখেড়ের ভেতর দলে দলে এ দিন সচিনের সঙ্গে ছবি তোলার হুড়োহুড়ি। বিকেলে শিবনারায়ণ চন্দ্রপল যখন দ্বিতীয় বারের জন্য নেটে ব্যাট করতে ঢুকলেন, মনে হচ্ছিল সত্যি কী বৈপরীত্য। চন্দ্রপল দেড়শোতম টেস্টে নামার প্রাক অনুশীলনে, আর তাঁকে দেখার জন্য কি না নিজের দেশের সাংবাদিকেরাও নেই। আর সচিনের দু'শো ঘিরে গ্রুপ ছবি তোলার জন্য সাংবাদিক আর ফোটোগ্রাফারদের মধ্যে এমন ধাক্কাধাক্কি, গুঁতোগুঁতি আর চিৎকার যে, একটু হলেই সচিনের চোট লেগে যেত।

টেস্ট ম্যাচের আগের দিন তেন্ডুলকরের সঙ্গে টানা দু'মিনিট কথা বলেছেন, এমন সাংবাদিক ভূ-ভারতে খুঁজে পাওয়া যাবে না। ম্যাচের আগের দিন মানে তেন্ডুলকর উধাও হতে শুরু করেন নিজের জগতে। তাঁর ভুরু কুঁচকে যায়। মুখচোখ থাকে টেনসড। নখ খুঁটতে দেখা যায়। শরীরী ভাষা অত্যন্ত পরিষ্কার থাকে যে, আমি কথা বলতেই চাইছি না। বুধবার যে তেন্ডুলকরকে দেখলাম তিনি বোধ হয় চব্বিশ বছর ক্রিকেট খেলা পূর্ণ করার লগ্নে মনোভাব সামান্য শিথিল করেছেন। নইলে জীবনের বিদায়ী ম্যাচ শুরুর চব্বিশ ঘণ্টা আগে এত স্বাভাবিক আর হাসিখুশি রয়েছেন কী করে?

মনে হচ্ছে শেষ কয়েকটা দিন আর টেনশন না নিয়ে তিনি টেস্ট ক্রিকেট বস্তুটাকে উপভোগ করতে চান। আর তো এই সুযোগ জীবনে আসবে না। নইলে রাতে অনিল কুম্বলের দেওয়া টাইগার পটৌডি স্মারক বক্তৃতায় উপস্থিত থাকবেন কেন? চির কাল তো এ সব ম্যাচের আগের রাতের পার্টি আর সংবর্ধনার প্রস্তাবকে তিনি শক্তিশালী ব্যাকফুট পাঞ্চের মতো বাইরে পাঠিয়েছেন।


অতীত ও বর্তমান। সবিস্তার...

*

"দেখো কী পেয়েছি। আমার জীবনের সেরা কিংবদন্তি হয়ে থেকে যাওয়ার জন্য সচিনকে ধন্যবাদ।

সব সময় তোমাকে দেখে শিখে যাব," বিশ্বকাপ জয়ের রাতের এক মুহূর্তের ছবির উপর সচিন তেন্ডুলকরের

বার্তাসহ ডিজিটাল অটোগ্রাফ টুইটার মারফত পেয়ে ধোনির প্রতিক্রিয়া। এই বার্তায় ধোনির উদ্দেশে সচিন

লিখেছেন, "প্রিয় মাহি, আমাদের যাত্রার মুহূর্তগুলো চিরকাল আমার সঙ্গে থাকবে।" নীচে তাঁর সই।


গোটা পরিবার ছাড়াও বিশ্বের বিভিন্ন জায়গা থেকে দু'শো বন্ধু আসছে সচিনের। একাই টিকিট নিয়েছেন পাঁচশো। সেগুলো বণ্টনের দায়িত্ব অঞ্জলিকে দিলেও কোথা থেকে পাস তুলব, কখন যাব এ সব টেক্সট মেসেজ তো তাঁর কাছেই আসছে। ওয়েস্ট ইন্ডিজ বোলিংয়ের চেয়েও বোধহয় সেই টিকিটপ্রার্থীদের ঠিকঠাক বন্দোবস্ত করাটা বেশি চাপের! এই ওয়াংখেড়েতেই কি না সচিনের মতো শেষ ম্যাচ খেলেছিলেন সুনীল গাওস্কর। ডেফ্রিটাসের বলে কম রানে বোল্ড হয়ে ক্রিকেটজীবন শেষ করেন। সমাপ্তি মোটেও সুখের হয়নি। যেহেতু ভারত ম্যাচ হেরে বিশ্বকাপ থেকে ছিটকে গিয়েছিল। তার বহু বছর পর কপিল দেব দুঃখের সঙ্গে বলেছিলেন, "বন্ধুদের কমপ্লিমেন্টারি টিকিটের চাহিদা মেটাতে গিয়ে ম্যাচের মনঃসংযোগ থেকে আমি অনেকটা সরে গেছিলাম। সতেরোটা ওয়ার্ল্ড কাপ সেমিফাইনালের টিকিট তোলা কী প্রচণ্ড ঝকমারি।" সচিনের সেখানে পাঁচশো। কপিলের মতো কোনও শোকগাথায় তিনিও পড়বেন না তো?

এমনিতে যত সময় যাচ্ছে, ততই শাদির মেহফিলকে ছাপিয়ে বিস্তৃত হয়ে পড়ছে বিষণ্ণতার চোরা স্রোত। বিখ্যাত চিত্রনাট্যকার আর অখণ্ড ক্রিকেটপ্রেমী সেলিম খান বলছিলেন, "এত বড় প্লেয়ার চলে যাচ্ছে, যার সঙ্গে বলিউডে দিলীপকুমার বাদে কারও তুলনা হয় না। দিলীপসাব সেই ১৯৪২ সালে আবির্ভাব থেকে শেষ দিন পর্যন্ত পয়লা নম্বর। সচিনও তাই। ওর জন্য বিদায়বেলায় সবার পক্ষ থেকে একটাই সংলাপ— তুম য্যায়সা কোই জিন্দেগি মে দোবারা আয়েগা নেহি।" স্বয়ং দিলীপকুমার। পালি হিলের বাড়িতে ফোন করে জানা গেল, প্রিয়তম ক্রিকেটারের বিদায়ে তিনিও মর্মাহত। নব্বই প্লাস বয়সেও সচিন সংক্রান্ত বিদায়ী খবর খুঁটিয়ে খুঁটিয়ে পড়ছেন।

প্রশ্ন হল, বিদায়ী শোকের চিতা কত দিন জ্বলবে? বিনোদন বা স্পোর্টসের দুনিয়ায় কি কারও জন্য চিরকালীন জ্বলে? জাভেদ মিয়াঁদাদ যেমন বলে দিয়েছেন, ভারতীয় দলে এত সব নতুন ছেলে এসে গিয়েছে যে, সচিনকে তারা মানুষের স্মৃতি থেকে সরিয়ে দেবে।

সচিন সাধারণ ভাবে মিয়াঁদাদের পঙক্তিতে পড়েন না। তিনি নিছক প্রবাদপ্রতিম ক্রিকেটার নন, চলমান আধুনিক ভারতও। সচিনের এক-একটা সেঞ্চুরি ভারতবাসীর জীবনে এক-এক রকম তাৎপর্যের। শুধু তাঁর জন্যই বিহারের সুধীর নামক এক সমর্থক সারা গায়ে ভারতীয় জার্সি এঁকে পিঠের পিছনে লিখে রাখে দশ নম্বর। আর সারা পৃথিবী ঘোরে টিম ইন্ডিয়ার সঙ্গে। সচিনের অবসর এই ছেলেটিকে হয়তো পক্ষাঘাতগ্রস্তই করে দিল।

ওয়াংখেড়ে গেটের বাইরে এ দিন একই রকম ভারতীয় জার্সিতে সজ্জিত এক সমর্থককে দেখলাম। তফাতের মধ্যে তাঁর পিঠের পিছনে দশ নয়, সাত লেখা। অর্থাৎ সচিন থাকতে থাকতেই তাঁর প্রিয়তম সমর্থকের প্রতিদ্বন্দ্বী হাজির। এ বোঝাই যাচ্ছে ধোনির ফ্যান। হয়তো এ-ও আগামী দিনে সাত নম্বর পরে সারা পৃথিবী ঘুরবে। সময় তো এ ভাবেই এগিয়ে যায়। তারকাদের ছবিগুলোও এ ভাবে বদলে বদলে যায়। ক্যালেন্ডারে নতুন ছবি বসে। পুরনো ছবি চলে যায় পেছনের ঘরে। বেঙ্গালুরুর সাংবাদিকদের অনেকেই যেমন এ দিন বলাবলি করছিলেন, মাত্র একটা মরসুম আগে অবসর নেওয়া রাহুল দ্রাবিড়ের চেয়ে এখন ওখানে বিরাট কোহলির চাহিদা অনেক বেশি। রাহুলকে লোকে বেশি সম্মান করে। কিন্তু পাগলামিটা করে বিরাটের জন্য।

জীবন কি অবসরপ্রাপ্ত তেন্ডুলকরের জন্যও এমন নিষ্ঠুর বাস্তব নিয়ে অপেক্ষা করে থাকবে? কেউ জানে না। এখন জানতেও চাইছে না। অন্তত এই সপ্তাহ যে আবেগের পরশমাখা রোদ্দুরের। যুক্তির মন খারাপ করে দেওয়া বিকেলের নয়!


পুরনো খবর: সচিন উৎসবের গাড়িবারান্দায় বিষাদ-বৃষ্টির ছাট

http://www.anandabazar.com/14khela1.html

বলিউডও আচ্ছন্ন সচিন আবেগে

Nov 14, 2013, 02.06PM IST


সৌম্যদীপ্ত বন্দ্যোপাধ্যায়



মুম্বই: সচিন অবগাহনে ব্যস্ত বলিউড৷ মুম্বই ফিল্ম সিটি'তে এক চক্কর কাটলে বোঝা যাবে মাস্টার ব্লাস্টারে মোহিত সকলে৷ সকলে চান একবার হলেও ওয়াংখেড়েতে পা রাখতে৷ সচিনের বিদায়ী টেস্টের উত্তেজনা গায়ে মাখতে৷


সচিন বিদায়ী টেস্ট খেলবেন, অথচ মাঠে যাবেন না নীতা আম্বানি, তা হয় নাকি! তাঁর বসার জন্য ওয়াংখেড়ের সিট তৈরি৷ ভি আই পি বক্সের টিকিট কিনেছেন আমির খান ও কিরণ রাও৷ এই মুহুর্তে তাঁরা শহরের বাইরে৷ কিন্ত্ত বলিউডের খবর, ঠিক সময়ে তাঁরা মাঠে পৌঁছে যাবেন৷ আর এক অভিনেতা শাহিদ কাপুরও মাঠে যাবেন সচিনের বিদায়ী ম্যাচ দেখতে৷ তাঁর মুখপাত্র বলছেন, 'বহু দিন আগেই টিকিট কিনেছেন শাহিদ৷ ভি আই পি'দের সঙ্গে তাঁকেও দেখা যাবে৷ তবে ভাইকে সঙ্গে নিয়ে যাবেন শাহিদ৷' 'ফেরারি কী সওয়ারি'র নায়ক শরমন যোশি মাঠে যাওয়ার জন্য মুখিয়ে রয়েছেন৷ তাঁর অভিনীত সিনেমার সঙ্গে জড়িয়ে রয়েছে সচিনের লাল টুকটুকে ফেরারি৷


সচিন আবেগে শুটিংয়ের সময় পর্যন্ত বদলে ফেলছে বলিউড৷ বরুণ ধাওয়ান ও সুরকার অনু মালিক৷ ওয়াংখেড়ে-মুখী বলিউডকে সামলাতে হিমশিম খাবে মুম্বই ক্রিকেট সংস্থা৷ মধুর ভান্ডারকরের 'ফ্যাশন' ছবি করে বলিউডে যাঁর পা রাখা, সেই মুগ্ধা গডসে মাঠে যাওয়ার জন্য টিকিট কিনেছেন৷ তাঁর সঙ্গে যাচ্ছেন মুনমুন সেনের মেয়ে রাইমা৷


বলিউড সূত্রের খবর, দীপিকা পাড়ুকোণের সঙ্গে রণবীর কাপুর, সুশান্ত সিং রাজপুত ও রণবীর সিংরাও মাঠে যেতে পারেন৷ কিন্ত্ত দীপিকার পাশে কে বসবেন? জল্পনা তা নিয়েও৷ রামলীলা ছবির প্রচারে দীপিকা-রণবীর ঘুরে বেড়াচ্ছেন সারা দেশে৷ তা হলে ওয়াঙখেড়েতেও কি দু'জনে বসবেন পাশাপাশি ? তাহলে রণবীর কাপুর কী করবেন? গুঞ্জন ও জল্পনার মালা গাঁথার বদলে আরও একবার বলিউডে যাই৷ সেখানে বলছে, দু'জনে একসঙ্গে ম্যাচ দেখবেন৷ সব মিলিয়ে বলিউডে এখন সচিন- আবেগ৷

http://eisamay.indiatimes.com/sports/cricket/bollywood-celebrate-for-sachin/articleshow/25756790.cms?


বড়া পাও, গন্ডারের স্টিকার এবং ছোট্ট সচিন

*

বাংলা কাগজে সচিন তেন্ডুলকর নিয়ে প্রথম প্রতিবেদন লিখেছিলেন প্রাক্তন ক্রিকেটার শুভাশিস দাস৷ শিবাজি পার্কে রমাকান্ত আচরেকরের কাছে তিনিও ট্রেনিং নিতেন সচিন-কাম্বলিদের পাশাপাশি৷ সচিনের শেষ টেস্টের প্রথম দিন সচিনের শৈশবের ক্রিকেট নিয়ে বিশেষ প্রতিবেদন লিখলেন তিনি৷



এখন ভাবলে অবাক লাগে৷ মুম্বইয়ের শিবাজী পার্কে পাশাপাশি নেটে আমি প্র্যাক্টিস করছি কিশোর সচিন তেন্ডুলকরের সঙ্গে৷ রমাকান্ত আচরেকর স্যরের কোচিংয়ে একটা নেট ছিল বড়দের জন্য৷ একটা ছোটদের জন্য৷ সচিন ব্যাট করত ছোটদের নেটে৷ আমি, প্রবীণ আমরে, সমীর দীঘে, অতুল রানাডেরা ছিলাম বড়দের সঙ্গে৷


ওই সময় শিবাজী পার্কের মাঠে আচরেকরের কোচিং ক্যাম্পের মধ্যমণি ছিল সচিন৷ ওর ফুটফুটে চেহারা এবং চনমনে স্বভাবের জন্য সকলেই ওকে পছন্দ করত৷ ওর কোনও কিছুতেই আমরা না বলতাম না৷ নেটে ব্যাটিং করতে খুব ভালোবাসত৷ অনেকক্ষণ ধরে তা করতও৷ তারপরও থামত না৷ নেট প্র্যাক্টিসের পরও ওকে নকিং করে যেত দীর্ঘক্ষণ৷ কেউ না কেউ ওকে বল ছুঁড়ত৷ মাঝে মাঝে আমরা সবাই মিলে শিবাজী পার্কের ক্যান্টিনে খেতে যেতাম৷ অধিকাংশ দিন একটাই মেনু, বড়া-পাও৷ দু'পিস পাউরুটির মাঝে একটা বেসনের বড়া৷ সবচেয়ে সস্তার খাওয়ার৷ তাই-ই আমরা মহাতৃপ্তি নিয়ে খেতাম৷


মনে আছে, সচিন সে সময় একটা সাইমন্ডস ব্যাট নিয়ে ঘুরত৷ তাতে লাগানো ছিল গন্ডারের স্টিকার৷ ছেলেদের ক্যাচিং প্র্যাক্টিস হত৷ সচিন ওই সময়েই কোচিং করাতে খুব ভালোবাসত৷ কিন্ত্ত নিজের ফিল্ডিং প্র্যাক্টিসে ছিল প্রবল অনীহা৷ তাই বলে সচিন খারাপ ফিল্ডিং মোটেই করত না৷ ব্যাপারটা হল, কর্তৃত্ব করব, কিন্ত্ত আমার ওপর কাউকে কর্তৃত্ব করতে দেব না৷


নেট প্র্যাক্টিস শুরু করার আগে থেকেই সচিন, কাম্বলিদের মুখটা চিনতাম৷ কারণ ওদের সারদাশ্রম স্কুলের একটা গ্রপ ছিল৷ শিবাজী পার্কের খুব কাছেই ছিল স্কুলটা৷ ওদের প্রায়ই দেখতাম, স্কুলের ব্যাগ ফেলে ক্রিকেট খেলছে৷ প্রবীণ আমরের সঙ্গে আগে পরিচয় হয়েছিল৷ নেট শুরু হলে একে একে পরিচয় হল সমীর দীঘে, অতুল রানাডে, ময়ূর করদেকর, ও সুভাষ মায়কারদের সঙ্গে৷ সিনিয়রদের মধ্যে আসত নরেশ চুরি, জিতেন্দ্র থ্যাকারেরা৷


এখনকার ক্রিকেট কোচিং ক্যাম্পের ধারণার সঙ্গে মুম্বইয়ের তখনকার কোচিং ক্যাম্পগুলোকে মেলানো যাবে না৷ সে সময় আচরেকরের ক্যাম্পে সাকুল্যে ১৫-২০ জন প্র্যাক্টিস করতে আসত৷ জুনিয়র-সিনিয়র সবাই সবাইকে চিনত৷ এখন সারা দেশে বাবা-মায়ের ছেলেদের ক্রিকেটার বানানোর জন্য ছুটছে৷ তখন কিন্ত্ত এমন ছিল না৷ এখন সচিনের বড় হওয়া নিয়ে ওর দাদা অজিতের কত কথা শুনি৷ তখন কিন্ত্ত নেটের ধারেকাছে ওকে কখনও দেখিনি৷ তখন সাড়ে তেরো বছরের ছোট্ট সচিন একাই প্র্যাক্টিস করতে আসত৷ একা একাই যাতায়াত করত ট্রেনে৷


সময়টা ছিল আলাদা৷ টেস্ট ক্রিকেটাররা খেলছেন অথচ সাইটস্ক্রিন নেই৷ লাঞ্চ নিজেকে কিনে এনে খেতে হয়৷ টিফিন দূরের কথা, ক্লাবগুলোর আলাদা নেট প্র্যাক্টিসের ব্যবস্থা নেই সে ভাবে৷ ক্রিকেটারদের পেমেন্টের ব্যবস্থা নেই৷ তবু ক্রিকেটটা ওরা খেলত মন দিয়েই৷ না হলে সচিনদের মতো ক্রিকেটাররা জন্মই নিত না৷ আমি এখন প্রাক্তন ক্রিকেটার রাজু মুখোপাধ্যায়কে ধন্যবাদ দিই, আমার মুম্বইয়ে খেলার ব্যবস্থা করে দেওয়ার জন্য৷ নইলে অন্য ক্রিকেট দর্শন জানাই হত না৷


তখন মুম্বইয়ের কোচিং ক্যাম্পগুলোর একটা জিনিস বড় ভালো ছিল, ঘনঘন ম্যাচ খেলা৷ বম্বে জিমখানার বিরুদ্ধে আচরেকর একাদশের হয়ে এমনই একটা প্র্যাক্টিস ম্যাচ খেলার সুযোগ মিলেছিল আমার৷ সালটা ছিল ১৯৮৬, সেপ্টেম্বর মাসের মাঝামাঝি এক সময়৷ আমাদের টিমে সচিন, কাম্বলি, সমীর দীঘে, ময়ূর কর্দেকর, অতুল রাণাডেরা ছিল৷ উল্টো দিকে ছিল দিলীপ সরদেশাইয়ের ছেলে রাজদীপ সরদেশাই৷ জবীন ভরুচা, সঞ্জয় মঞ্জরেকর এবং ওর ভাই সন্দেশ মঞ্জরেকর৷ পুরো ম্যাচটা মনে নেই৷ তবে ম্যাচটা হয়েছিল লো-স্কোরিং৷ এবং আমরা হেরেছিলাম৷


সচিনের নাম তখনও কেউ জানে না৷


১৯৮৭ সাল৷ শিবাজী পার্কের কাছে 'মধুমিলন' অ্যাপার্টমেন্টে ছিল সন্দীপ পাটিলের ফ্ল্যাট৷ আমি তখন শিবাজি পার্ক ইয়ংস্টারে খেলি৷ সন্দীপ আমাদের ক্যাপ্টেন৷ একটা বাংলা কাগজের হয়ে আমি যেদিন সন্দীপের ইন্টারভিউ নিই, তার আগের দিন ছিল ১ জানুয়ারি৷ সেদিন দ্বিতীয় কিংবা তৃতীয় ডিভিশনের একটা ক্লাবের হয়ে ২৭৪ রানের একটা ইনিংস খেলেছিল সচিন৷ ওই ইন্টারভিউ নেওয়ার সময় উঠতি ক্রিকেটারদের প্রসঙ্গে সচিনের নামটা উঠে এসেছিল৷ তবে সচিনের নাম সম্পর্কে সন্দীপ মোটেও ওয়াকিবহাল ছিল না৷ সচিনের ২৭৪ করার খবরটা ২ জানুয়ারি টাইমস অফ ইন্ডিয়ার মুম্বই সংস্করণে বেরিয়েছিল৷ মনে হয়, ওটাই ছিল সচিনকে নিয়ে প্রথম খবর৷ মনে রাখবেন, তখনও কাম্বলির সঙ্গে সচিনের বিশ্বরেকর্ড হয়নি৷


ওই সময় মুম্বইয়ে কোচেদের মধ্যে কুলীন হিসেবে বসন্ত আমলাডি, ভিএস পাটিল, বাসু পরাঞ্জপে৷ এঁদের মধ্যে টেকনিকালি খুব ভালো ছিলেন বসন্ত আমলাডি৷ সে সময় 'স্পোর্টস উইক' ম্যাগাজিনে ক্রিকেট কোচিংয়ের উপর ওঁর লেখাও ছাপা হত৷ বসন্ত আমলাডির নিজস্ব কোচিং ক্যাম্প ছিল মেরিন ড্রাইভের পাশে পিজে হিন্দু জিমখানা মাঠে৷ ভিএস পাটিল কোচিং করাতেন দাদর ইউনিয়নের মাঠে৷ বাসু পরাঞ্জপের ক্যাম্প ছিল সিসিআই-এর মাঠে৷


তিন নামী কোচের তুলনায় রমাকান্ত আচরেকর নামডাক ছিল অনেক কম৷ আচরেকরের কাছে খেলা শেখার জন্য মাত্র ১২ টাকা দিয়ে একটা আবেদনপত্র পূরণ করতে হত৷ ছেলেরা নিজেরাই নেট টাঙাত৷ পিচ রোল করত৷ আবার প্র্যাক্টিস শেষে সে সব ছেলেরাই গুছিয়ে রাখত৷


কোচিং নিয়ে আচরেকরকে কখনও বাড়াবাড়ি করতে দেখিনি৷ কেউ ভুল করলে তখনই ছুটে ভুল শুধরে দিতেন না৷ উনি সব লক্ষ্য করে রাখতেন৷ প্র্যাক্টিস শেষ হওয়ার পর কার কোথায় ভুল হচ্ছে বুঝিয়ে দিতেন৷ কতদিন দেখেছি, সচিন বা প্রবীণ আমরে নেটে বারবার বোল্ড হচ্ছে৷ বা ক্যাচ তুলছে৷ কেউ সে দিকে তাকিয়েও দেখছে না৷ উল্টে ওরা চেষ্টা করছে বলটাকে কী করে আরও জোরে মারা যায়৷ কারণ আচরেকর স্যরের মূলমন্ত্রই ছিল, হিট দ্য বল!


সচিন আসল জায়গাতেই ক্রিকেট শুরু করেছিল৷

http://eisamay.indiatimes.com/sports/cricket/about-sachin/articleshow/25756454.cms?





India v West Indies, 2nd Test, Mumbai, 1st day

The crowd at Tendulkar's feet

After the fall of the second wicket, time stood still. The state of the game, or the performance of the other batsman got little attention. The crowd of 25,000 came to see just one man

Sidharth Monga in Mumbai

November 14, 2013



Manjrekar - 'Sachin played Shillingford well'

At 3.31pm, M Vijay gets out to a bat-pad catch off Shane Shillingford. There are about 20 overs to go to stumps. Two wickets are down. You don't expect a nightwatchman, with so much time to go, but sometimes people expect the worst. They all look towards the Indian dressing room. A support staff person moves about. There is no sight of either the regular No.4 or a nightwatchman. People keep looking. No signs. Anticipation builds. Tension builds. Suddenly someone realises the umpires have asked Vijay to wait because they are checking the legitimacy of the delivery. A minute has passed, and now someone has realised that. Time has stopped in India once again. Perhaps one last time, who knows?

There are old folk in the crowd, old enough to be his father, who might have seen him as the curly-haired kid in the maidans. Middle-aged people who have given up work today, who have grown with him, who have lived their lives with him as a part of them. Eighteen to 20-year olds who weren't even born when he debuted. Not a single person is sitting down. Then they see Vijay has been given the marching orders, 25,000 heads - the loudest 25,000 you can ever imagine - turn to the dressing room. Two wickets have fallen in this over, but nobody is bothered.


*

People are so busy counting his steps down the pavilion stairs they haven't even noticed the West Indies team have already formed a guard of honour for him © BCCI

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Vijay has become Shillingford's victim twice, twice he has come back flexing his elbow, but nobody has read into the reaction because they are too busy to give the next man in the best possible welcome. On both occasions, Vijay has been the second man out. So Sachin Ramesh Tendulkar puts on his arm guard, helmet, then gloves, and gets up. Now he comes in public view, and people lose control over themselves. People are so busy counting his steps down the pavilion stairs they haven't even noticed the West Indies team have already formed a guard of honour for him. Cheteshwar Pujara, the unbeaten batsman, has joined in. The umpires join in too.

There walks Tendulkar. Possibly for the last time because the West Indies batsmen haven't turned up in this series. He looks up to adjust to the outside light. Shakes the hand of the West Indies captain, Darren Sammy. Raises his bat to the opposition who earlier in the day gifted him a jersey signed by all of them. Nods once again in acknowledgement.

Tendulkar now bends, picks a piece of the soil, touches it on the peak of his forehead, and sort of crosses his heart. One of the umpires now gives Tendulkar the proper guard. By the time everything has settled down and Tendulkar faces his first ball, it's 3.35pm. Slow over-rate? Nobody cares.

Shillingford bowls, Tendulkar defends with the turn, it reaches on the bounce to short leg. People worry, people go quiet. "A mini heart-attack," one man shouts. Tendulkar defends the next ball, and the over is done.

It's 3.37pm when the next over starts. Six minutes, two balls, countless emotions. Now Pujara takes strike. Now Pujara cuts. Half-cut, half-punch. Past point for four. The crowd goes "Sachiiiiiin, Sachin". Now Pujara drives exquisitely through cover for four. The crowd goes "Sachiiiiin, Sachin". Pujara plays the whole over, but a man invokes the underworld classic, Satya, and shouts "Mumbai ka king kaun? [Who is the king of Mumbai]?" The whole stand replies, "Sachiiiiin, Sachin". "Cricket ka king kaun?" "Sachiiiiin, Sachin."

It's been 10 minutes since they stood up in the stands. Not one person has sat down. Shillingford starts a fresh over. Long-on back, a slip and two short legs in. Tendulkar stands tall, bat in air, squats, then the bat touches down once before the ball is delivered. He sweeps, and a cheer as loud as when India won the World Cup here more than two years ago goes up. We won't have another Bradman. Or maybe we will in the next innings.

You have got to keep in mind that this is a batsman who last scored a Test century in the first week of 2011. Averages 32 since then. Many Indians have argued over the last year that he has overstayed his welcome. The farewell series has been made garish by tasteless administrators trying to milk it. Then you watch this, and wonder what a loss it would have been had he gone without giving people this opportunity.

Forget the garishness. Forget that the opposition has left its Test-match temperament at the customs. Let's escape ephemerally once again. Let's lose ourselves again. Let's forget the last local train before peak-hour traffic. Let's applaud a forward-defensive like a goal.

So Tendulkar defends and we applaud. Then he takes a single to move to 3 off 9. In the next over, Shillingford provides a short ball, which he cuts away for four. About the 100-odd people who had sat down are back up again. They are watching from the terrace of the nearby Income Tax building. The big screen now shows Ramakant Achrekar, Tendulkar's coach, and Rajni Tendulkar, his mother, who are also here. They are both in wheelchairs now. How proud they must be.








The farewell series has been made garish by tasteless administrators trying to milk it. Then you watch this, and wonder what a loss it would have been had he gone without giving people this opportunity














Slowly, Tendulkar finds the rhythm. He is looking as assured as he has done in this year. He is also getting into the last-dance spirit. The 14th ball he faces, he reaches its pitch and drives it against the turn, because the gaps are on the off side. Past mid-off it goes. Tendulkar 12 off 14. India? It doesn't matter.

By now, every possible rhythmical chant "Sachin" can be made into has been chanted. "Sachiiiiin, Sachin." "Saaaaaachin." "Sachin, Sachin-Sachin-Sachin, Saaaachin." How come no one is out of tune when they chant his name?

This is the same ground where Tendulkar made his first-class debut. Lalchand Rajput, who was run out for 99 batting with Tendulkar, is here. Shishir Hattangadi, the opener in that match, is here. Many players who made their first-class debuts after that are here. Ashok Patel, the bowler who got him out for the first time in first-class cricket, and now lives in the US, has also come here. The Wankhede has changed completely. From the intimate concrete bowl it has now become a classy monster. Tendulkar is still there. Possibly one last time, but he is still batting. A banner in Wankhede says, "Now only humans will play cricket."

Cheteshwar Pujara's sole purpose in life by now is to take the single, and hand over the strike to Tendulkar. Once he drives to long-on, and Mexican wave dies abruptly because Tendulkar is now on strike. Tendulkar is looking solid. Moving right forward in defence against the quicks. Staying back to Shillingford because he hasn't been the best at reading the doosra, so he wants to give himself time to adjust to them off the pitch. He clips Marlon Samuels off the toes in the 27th over, and with that reaches 29 off 45. In his next over, Samuels pitches short, and he punches it to reach 33 off 52.

Tino Best, in the meantime, lobs a throw direct into the stumps at Tendulkar's end. The whole crowd goes "aye aye", which in Mumbai doesn't mean yes. It is their way of pulling someone up. Someone who is threatening their boy. Tendulkar, 40, is still their boy. They will protect him. When Best bowls a bouncer. When Best goes too far in the follow-through. "Tino sucks," shouts one stand. "Shush," goes the rest of the stadium. Best does a namaste [folded hands] as he walks back to his fielding position at fine leg, and all is well between him and the crowd.

The crowd actually couldn't be bothered less. They have come here to watch Tendulkar bat. They want to return tomorrow to watch him bat. They also want him to take most of the bowling left. Story of Tendulkar's life. Realistic expectations and him don't go together.

At 4.54pm, Tendulkar has played out the last ball of the day. He is 38 off 73. Pujara is 34 off 49, and has played some pretty decent shots, but no one has noticed. He could have streaked, and no one would have noticed. It's all forgiven this last time. You can focus on that man's batting alone, especially given he has batted well.

For about 10 seconds, Tendulkar looks at the pitch, waits for Pujara to join him, and then walks back. He raises the bat as he does. That's his promise. Time will stop tomorrow again.

Sidharth Monga is an assistant editor at ESPNcricinfo Feeds: Sidharth Monga

http://www.espncricinfo.com/india-v-west-indies-2013-14/content/story/688629.html








India v West Indies, 2nd Test, Mumbai, 1st day

Tendulkar's exquisite straight drive

Plays of the day for the opening day of the first Test between India and West Indies in Mumbai

N Hunter

November 14, 2013

The drop

Mohammad Azharuddin and Rahul Dravid used to field at first slip. Hands that picked some of the best catches. A bowler would trust them completely and likewise, these guys built his confidence. However R Ashwin, who fields at the same position, has never given that same kind of assurance. Today he had already seen a difficult chance, an outside edge from Kieran Powell fall a yard in front of him. But a few overs later when Powell was beaten by the superb seam movement of Bhuvneshwar Kumar, Ashwin spilled a straightforward catch. The ball was going to his left. Ashwin moved quickly but tried to pouch the ball, probably, with hard hands because the ball bounced off his left palm, trickled across his arm before bouncing off his lap onto the ground even as he tried to hold on to it in vain. Ashwin looked to the heavens for assistance. The bowler, too, did the same.

The shot

The ball was pitched on a good length. It was slightly fuller. Sachin Tendulkar's eyes lit up. He opened his stance, quickly moved forward and using his left elbow to lend direction, he punched that exquisite straight drive -past Darren Sammy, past mid-on for another four. It was a shot that comes to mind when you think Tendulkar the batsman. It is shot the roaring Wankhede took home.

The word of caution

Narsingh Deonarine was playing his first ball of the series. He tapped Bhuvneshwar towards mid-on and set off for a single without even realising Pragyan Ojha was standing well inside the circle. If that was not enough, Deonarine, who replaced Veerasammy Permaul, should have at least realised his partner was the as-safe-as-they-come Shivnarine Chanderpaul. The Guyanese, playing his 150th Test match, did not even blink as he turned his back to Deonarine, who had to retreat swiftly. An annoyed Chanderpaul indicated his displeasure by drawing a question mark with his hands.

The plan

The ploy of making the batsmen play as many balls as possible is a rule good fast bowlers never forget. Bhuvneshwar deployed that strategy successfully against all batsmen including Chanderpaul, who was defeated by the bowler's accuracy and persistence. In his third over of his first spell after lunch, Bhuvneshwar bowled four balls to Chanderpaul of similar nature: pitching back of a length, on leg or middle stump and moving away. Chanderpaul left a couple of deliveries alone, but the other two he was tempted to play, only to get squared up. In his next over, Bhuvneshwar improvised by pitching on the leg stump and creating an angle that forced Chanderpaul to play at the ball. The thick edge went to Ashwin, who did well to hold a good catch.

The catch

Deonarine seemed in a hurry as he tried to play most of the balls. Trying to defend a delivery from Ashwin which had pitched on the middle stump and was turning away, Deonarine stretched forward, but could not get to the pitch of the ball. The outside edge flew to the left of M Vijay, at short gully, who dived to pluck a spectacular low catch.

http://www.espncricinfo.com/india-v-west-indies-2013-14/content/story/688543.html

Punters bet heavily on Sachin Tendulkar's first innings


BANGALORE: While Sachin Tendulkar's fans are hoping the Master Blaster will go out with a bang, many punters across the country are betting he won't score a century in his 200th and last Test in Mumbai starting today.


Others are betting on virtually everything in the first innings; there are 7:10 odds that he won't score a century (for e.g. those who bet Rs 70 will get Rs 100 if Tendulkar fails to reach the three-figure mark but if he does, he'll lose the bet amount). You can place other bets too -- for a half-century, at least 30 runs, 40 and so on. No bookie has opened the zero slot, which indicates that not many feel Tendulkar will go the Don Bradman way who got out for a duck in his last Test.


All the entire betting is being done under the name 'Master Last Game' and bookies from South India call him 'Master', while those in Maharashtra and North India refer to him as 'SirJi'.


Sources in the state intelligence department there's around Rs 800 crore at stake just for the first innings. Depending on the first innings' performance, the odds will change for the rest of the match. In Karnataka, the amount at stake is Rs 10 crore. "While Bangalore-based punters are betting around Rs 5 crore, those in Hubli-Dharwad, Belgaum and Mangalore are putting up at least Rs 5 crore," sources said.


Hemanth Nimbalkar, joint commissioner of police (crime), said special teams have been set up to monitor betting. "We've warned offenders arrested earlier on betting charges and monitoring their movements," he said.

http://timesofindia.indiatimes.com/city/bangalore/Punters-bet-heavily-on-Sachin-Tendulkars-first-innings/articleshow/25718746.cms

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  6. Will Tendulkar have a Bombay duck? Bet on it! - The Times of India

  7. timesofindia.indiatimes.comSports

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Brand Sachin to prevail after retirement

Ajita Shashidhar    New Delhi   Last Updated: November 13, 2013  | 13:57 IST

Sachin Tendulkar. Photo: PTI

Brand Sachin Tendulkar will continue and there will be no void even after his retirement - this was the unanimous opinion of senior marketing professionals at the India Today Group's Salaam Sachin Conclave.


The master-blaster, who is all set to bid adieu to the cricketing world after playing his 200th test match, endorses over 15 brands (Adidas, Coke,  Jaypee  Cements , Aviva Life Insurance etc.) His endorsement income is known to be close to $22 million. He has 12 million active followers on Facebook, which is supposed to be the highest fan following that any Indian celebrity has across categories.


"The greatest attribute of Sachin is the longevity of his career which will go past his retirement," said Vinod Naidu, General Manager, World Sport Group, which manages the Sachin Tendulkar brand.


Naidu said that since his retirement was talked about for quite a while, they had the opportunity to lay out a well thought-out brand management strategy post retirement.


"The Sachin story will continue. Not only have we built a range of private labels in partnership with brands such as Addidas, we also have a lot of factual content on cricket that we will monetize," added Naidu. Apart from this, Tendulkar also supports a host of charitable causes which will help him keep his brand value alive.


"I am quite sure there will never be void in brand Sachin's journey," said, Sunil Bhalla, Co-Founder and Director, Lava Mobiles.


Industry leaders firmly believe that brand Sachin will outlive the test of time. This is because of the way he has inspired the Indians. "His personality reflects what the country has gone through," according to Nair of World Sport Group. Tendulkar was self-made and later went on to conquer the world -- and this, according to marketing professionals, is the perfect ingredient for building an everlasting brand.


"When you sell Tendulkar, you sell inspiration," added Bhalla of Lava Mobiles.

http://businesstoday.intoday.in/story/brand-sachin-will-never-die/1/200533.html


What the future holds for Sachin, the brand

November 13, 2013:  

Two MBA students of the Chennai-based SRM University share their views:

Sachin is not transitory, like Bollywood actors. He is and has been the face of the Indian and world cricket. In the world of advertisements, he has the performance connect plus the personality connect.

"You've got to create heroes and you've got to pay them," said Mark Mascarenhas of WorldTel back in 1995 after he made Sachin India's first multimillionaire sportsperson. Sachin is a cricketer and a brand all rolled into one. Sachin's value will not diminish; it will shine forever.

Sudheesh. K

Sachin Tendulkar can leave cricket, but cricket can't leave the 'God'. Even though Sachin has decided to hang up his boots after his 200th test match at Wankhede Stadium, Mumbai, the Little Master has various possibilities to enjoy a fulfilling retired life in which cricket will be an integral part.

IPL has come as a boon for some former players who believed they still have a lot to pass on in terms of cricketing acumen. It will be really interesting to see Sachin interviewing M.S. Dhoni or a Virat Kohli in the way former cricketers like Shastri and Gavaskar have done with Tendulkar.

With Sachin having spent 24 years in international cricket, no one knows better the trials and tribulations a young cricketer goes through.

Although Sachin might not be too keen to go into administration, he could give it a shot considering the tragic circumstances the Indian cricket administration finds itself in.

A former cricketer as the head of an association or occupying a vital post in BCCI bodes well for Indian cricket.

It won't be long before Sachin gets back to cricket in some way or the other. And fans would love to see him back in action.

Siddharth. U

http://www.thehindubusinessline.com/on-campus/what-the-future-holds-for-sachin-the-brand/article5347752.ece

Mamata Banerjee

16 hours ago

Eden Gardens, Kolkata, 08.11.2013 (5 photos)

Congratulations to Team India for their magnificent victory over West Indies today.


This test match was Sachin Tendulkar's 199th and the last at the Eden Gardens. Today's victory is indeed a befitting celebration of this momentous occasion.


I have presented Sachin a painting which I had specially done for him.


Government of West Bengal has also felicitated him on this occasion.


We wish him all the best in his life ahead.


I also congratulated M S Dhoni, Rohit Sharma and Shami for their brilliant performances.


Rohit was very happy and said that now Eden is his second home. Shami too was very happy. After all, Eden is his home ground.


Eden is the paradise of cricket. It is the dream of every cricketer to play before the sporting and cheerful crowd who have always been their pillars of support here.


Some pictures of today's occasion are uploaded for all of you to see.


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ঈশ্বর ইডেন ভালোবাসা

ইডেনে অন্তিম ম্যাচে কী অপেক্ষা করছে সচিনের জন্য? যিনি এতদিন শুধু এই খেলাটার জন্য শ্বাস নিয়েছেন, তার জন্য ক্রিকেট দেবতা ডালি উপুড় করতেই পারেন৷ লিখছেন সব্যসাচী সরকার


প্লিজ ডোন্ট ক্রাই, প্লিজ!

ইডেনের ড্রেসিংরুমে বসে ঝরঝর করে কাঁদছেন একজন আর পাশে বসে সান্ত্বনা আর একজনের৷ যিনি মারাঠিতে কান্নায় ভেসে যাওয়া বন্ধুকে বলছেন, 'আর কাঁদিস না, দেখিস, পরের বার আমরাই বিশ্বকাপ আনব৷'


পরের বার অর্থাত্‍‌ ১৯৯৯-এ বিশ্বকাপ দেশকে দিতে পারেননি সচিন, '৯৬-এর মার্চে ইডেনে বিশ্বকাপ সেমিফাইনালে হেরে যাওয়ার পরে এ দেশে বিশ্বকাপ আসতে লেগেছে আরও ১৫ বছর৷ কিন্ত্ত বিনোদ কাম্বলি ওই ঘটনার কথা ভুলতে পারেন না৷ গত বছর সচিন ওয়ান ডে থেকে অবসর নেওয়ার পরে 'এই সময়'-এর পাতায় একটা লেখা লিখেছিলেন কাম্বলি৷ সেখানে প্রথমেই বলেছিলেন, 'শুধু আমি নয়, সচিন নিজেও ওই বিশ্বকাপে হারটা ভুলতে পারত না৷ কারণ ও আউট হওয়ার পরেই আমাদের উইকেটগুলো তাসের ঘরের মতো পড়তে শুরু করেছিল৷'


তার পর ইডেনে যা ঘটেছিল, অবশ্যই কলঙ্কজনক৷ দর্শক হাঙ্গামার জেরে মাঠে মিসাইলের মতো কাচের বোতল উড়ে আসতে শুরু করায় ম্যাচ পরিত্যক্ত এবং শ্রীলঙ্কাকে জয়ী ঘোষণা করেছিলেন লয়েড৷ ২০০০ সালে জিম্বাবোয়ের ভারত সফরের সময় এক সাক্ষাত্কারে ওই বিশ্বকাপ সেমিফাইনাল নিয়ে সচিনকে প্রশ্ন করার সুযোগ হয়েছিল৷ জয়সূর্যের বলে স্টাম্পড হওয়া নিয়ে বলেছিলেন, 'সে দিন ইডেনে বল ঘুরছিল, কিন্ত্ত তা-ও ৬০-এর উপর স্কোর হয়ে গিয়েছিল আমার৷ জয়সূর্য অনেকটা করে ঘোরালেও সেই বলটা লেগ স্টাম্পের বাইরে পড়েছিল৷ আমি পা বাড়ালেও ছেড়ে দিয়েছিলাম ওয়াইড ভেবে৷ বলটা অদ্ভুত ভাবে আমার প্যাডের স্ট্র্যাপে লেগে কিপারের হাতে চলে যায়৷ তখন আমার পা বাইরে৷ প্যাডের স্ট্র্যাপে লেগে কিপারের হাতে না গেলে ওই আউটটা হতাম না!'


'৯৬ বিশ্বকাপের পরেই অবধারিত ভাবে উঠে আসবে ১৯৯৯-এ ভারত-পাকিস্তান এশীয় টেস্ট চ্যাম্পিয়নশিপে শোয়েব আখতারের সঙ্গে ধাক্কা ও তাঁর রান আউট৷ যে জন্য চতুর্থ দিন অশান্ত ইডেনকে শান্ত করতে মাঠে নামতে হয়েছিল আউট হওয়া সচিনকে৷ সেই ম্যাচে শোয়েব ইচ্ছাকৃত ভাবে সচিনকে ধাক্কা দিয়েছিলনে কি না বলা কঠিন৷ শোয়েব পরে বারবার দাবি করেছিলেন, ব্যাপারটা ইচ্ছাকৃত নয়৷ কিন্ত্ত ইডেনের দর্শক মানতে চায়নি৷ ম্যাচের শেষ দিন পুলিশ দিয়ে মাঠ ফাঁকা করে টেস্ট শেষ করতে হয়েছিল৷


ভারতের সব মাঠেই সচিনের জনপ্রিয়তা আকাশচুম্বী, সেখানে কোথায় কম, কোথায় বেশি, তার কোনও মাপকাঠি থাকতে পারে না৷ থাকার কথাও নয়৷ পরিসংখ্যান বলে , দেশের মাঠে চেন্নাইয়েই সবচেয়ে বেশি সফল সচিন৷ কিন্ত্ত তাই বলে ইডেন কি কম ভালোবাসে ক্রিকেট ঈশ্বরকে? এই শহরের ক্রিকেটীয় আবেগ বরাবরই মাত্রাছাড়া৷ গাভাসকরের মতো ব্যক্তিত্বকে ইডেন চায়ের ভাঁড় আর কমলালেবুর খোসা ছুঁড়ে মেরেছিল৷ বিরক্ত সানি ঘোষণা করেছিলেন, জীবনে কোনও দিন আর ইডেনে খেলব না! এমনকী সৌরভ বাদ পড়ার পরে দ্রাবিড়-চ্যাপেল জমানায় গোটা ভারতীয় দলের উপর ব্যারাকিং হয়েছিল, রাহুল বোল্ড হওয়ার পরে উল্লাসে ফেটে পড়েছিল জনতা৷ এতটাই যে টিম পরে মুম্বইয়ে গিয়ে বলেছিল, 'মনে হল বিদেশ থেকে দেশে এলাম!'


এই সে দিন, গত বছর অ্যালিস্টার কুকের ইংল্যান্ডের বিরুদ্ধে টেস্ট খেলতে এসে হরভজন সিং বলেছিলেন, 'অদ্ভুত একটা রহস্য আছে এই মাঠের৷ এই মাঠে আমার টেস্ট হ্যাটট্রিক আছে বলে বলছি না৷ যখনই ইডেনে নামি, ভিতর থেকে কেউ একটা বলে, এটাই সেই মঞ্চ, যেখানে কিছু করে দেখালে তুমি যে সম্মানটা পাবে, সেটা অন্য কোথাও পাবে না৷ যতবার ইডেনে খেলেছি, ততবার এটা মনে হয়েছে৷' একই কথা হয়তো বলবেন আজহারউদ্দিন বা ভিভিএস লক্ষ্মণ৷ দু'জনেরই ইডেনে টেস্ট রেকর্ড চোখ ধাঁধিয়ে দেওয়ার মতো৷ রাহুল দ্রাবিড়েরও দুই ইনিংসে সেঞ্চুরি আছে৷ সেই তুলনায় ইডেনে সচিনের রেকর্ড মোটেই আহামরি নয়৷ টেস্ট সেঞ্চুরি মাত্র দুটো, একটা ২০০২-এ ওয়েস্ট ইন্ডিজের বিরুদ্ধে দ্বিতীয় ইনিংসে করা ম্যাচ বাঁচানো ১৭৬, অন্যটা দক্ষিণ আফ্রিকার বিরুদ্ধে ২০১০-এ করা ১০৬, প্রথম ইনিংসে৷ শেষ টেস্ট ইনিংস বলতে গত বছর ইংল্যান্ডের বিরুদ্ধে চমত্কার ৭৬, দ্বিতীয় ইনিংসে রান না পাওয়ার পরেও ওটাই ইডেনে মাস্টারের শেষ টেস্ট ধরে নিয়ে বিদায় কুর্নিশ করেছিল ইডেন৷ তখন তো আর জানা ছিল না, বছর ঘুরতে না ঘুরতে ফের পড়ে পাওয়া চোদ্দো আনার মতো আরও একবার আসবে মাস্টারকে দু'চোখ ভরে দেখার সুযোগ৷ তা -ও ১৯৯ নম্বর টেস্টে৷


গত ১০ অক্টোবর বিদায়ী সিরিজের কথা ঘোষণা করেছিলেন সচিন৷ তার পর থেকেই গোটা দেশের ক্রিকেটমহল শুধুই দিন গুনেছে৷ প্রথমে ইডেন, পরে ওয়াংখেড়ে৷ আর এ বার তিনি শহরে পৌঁছনোর পর থেকে স্বভাবতই আবেগ মাত্রাছাড়া৷ সেই বিমানবন্দরে পা দেওয়ার পর থেকেই চূড়ান্ত বিশৃঙ্খলা আর অবাঞ্ছিত ভালোবাসার অত্যাচার সহ্য করে যেতে হচ্ছে সচিনকে৷ মোমের মূর্তি, কনফেটি, বিশালাকৃতি কেক বা মুখোশ সচিনের প্রয়োজন নেই, অনেক বেশি দরকার হোটেলে নিজের ঘরের নির্জন কোণ৷ যেখানে নিজের সঙ্গে কথা বলা যায়, খুঁজে নেওয়া যায় নিজের ভিতরের 'আমি'-টাকে৷


প্রশ্ন উঠতে পারে, যে লোকটা ১৯৮টা টেস্ট খেলেছে, তার আবার নতুন করে প্রস্ত্ততির কী দরকার? এই ভাবনাতেই যে কোনওদিন আটকে ছিল না তাঁর ক্রিকেট শিক্ষা৷ এখনও নেই৷ যে জন্য ১০০ সেঞ্চুরির পরে বলেছিলেন, 'এই খেলাটায় শেখার কোনও শেষ নেই৷ জীবনের শেষ দিন পর্যন্ত শেখা যায়৷ যখন প্রথম ক্রিকেট খেলতে এসেছিলাম, সেই ১০ বছর বয়সে আচরেকর স্যার এই কথাটা বলেছিলেন৷ যা আমি আজও ভুলিনি এবং মনেপ্রাণে বিশ্বাস করে এসেছি৷'


ইডেনে এ বার কী অপেক্ষা করে আছে সচিনের জন্য? কোনও সন্দেহ নেই, নিজের জন্য যে মানদণ্ড ঠিক করে রেখেছেন, সেই অনুযায়ীই জীবনের শেষ দু'টো টেস্ট খেলতে চাইবেন৷ ক্রিকেট এক বলের খেলা, শূন্য রানে ফিরতেই হতে পারে৷ আবার সেঞ্চুরিও অপেক্ষা করে থাকতে পারে৷ তবে যিনি ২৪ বছর ধরে শুধু এই খেলাটার জন্য বেঁচে থেকেছেন, তার জন্য ক্রিকেট দেবতা উপহারের ডালি উপুড় করে দিতেই পারেন৷ সে ক্ষেত্রে আমরা ফের আশ্রয় নেব রবি ঠাকুরে, অবাক বিস্ময়ে গাইব, 'তুমি কেমন করে রান করো হে গুণী...৷'

সচিন রাজার দেশে সব্যসাচী সরকার


রানের দেশে সফর শেষে, ইডেনে শেষবার এই শহরে শেষ কুর্নিশ, ক্রিকেট দেবতার।


সচিন জাদু, কী সুস্বাদু, ইডেন চলো আজ বাইশ গজে দু'চোখ ভরে, তেন্ডুলকর রাজ।


খানিক মায়া, ম্যাজিক কিছু, শুরুর থেকে শেষে সম্মোহনে আজ ইডেনে সচিন-রাজার দেশে।


শুধুই রাজা? নাকি আরও অনেক অনেক বেশি? উইলো হাতে ঈশ্বর-ই তো, মানুষ ছদ্মবেশ-ই!


আড়াই দশক, একশো শতক, সময় হল থামার, কলকাতাতে মাঠ মাতাতে সচিন তোমার-আমার।


সচিন আমার-তোমার-সবার, সচিন তুমি কার? সচিন নেশার, ভালোবাসার, সচিন অহঙ্কার।


এই পাঁচদিন শহর রঙিন, চাক্ষুষ শেষবার ক্রিজে সচিন, মাখন মসৃণ, স্ট্রেট ড্রাইভে চার।


এই পাঁচদিন সচিন অধীন, বাদবাকি সব ফিকে কলকাতাতে শেষ কুর্নিশ ক্রিকেট দেবতাকে।


রান না আসুক, কান্না আসুক, আবেগ-নদী পার রান ইডেনে, মন সচিনে, স্রেফ তেন্ডুলকর।


ইডেন চলুন, একটু ভুলুন, দিনের পাপক্ষয় এক শতকে এক আধজনই তেন্ডুলকর হয়!


সচিন-জ্বরে কাবু মমতা থেকে বুদ্ধ

প্রসেনজিত্‍ বেরা



কেউ আজ টসের পর ঠিক করবেন, মাঠে যাবেন কি যাবেন না৷ কেউ আবার মাঝের তিন দিন মাঠে যাওয়ার পরিকল্পনা করেছেন৷ কেউ ঠিক করেছেন, মাঠে যাবেন সচিনের ব্যাটিংয়ের দিনই৷ একদল আবার মাঠে না গিয়ে টেলিভিশনেই সচিন-দর্শন করতে চান৷


ডান থেকে বাম, মুখ্যমন্ত্রী থেকে প্রাক্তন মুখ্যমন্ত্রী৷ বর্তমান মন্ত্রী থেকে প্রাক্তন বিধায়ক৷ ছাত্র নেতা থেকে শহরের মেয়র---কমবেশি সচিন-জ্বরে আক্রান্ত সব্বাই৷ অনেকেই ইতিমধ্যে মহার্ঘ্য টিকিট কিংবা কমপ্লিমেন্টারি পাস জোগাড় করেছেন৷ যাঁদের জোগাড় হয়নি, তাঁরাও শেষবেলায় খোঁজখবর শুরু করেছেন টিকিটের৷ যাঁদের মধ্যে বহু বিধায়কও রয়েছেন৷ বিধানসভা থেকে এ বার টিকিট বিতরণের ব্যবস্থা না হওয়ায়, তাঁদের অনেকে ক্ষুব্ধও৷


বুদ্ধদেব ভট্টাচার্যের মতো পরিচিত ক্রিকেট অনুরাগী না হলেও আইপিএল-র খেলা দেখতে মুখ্যমন্ত্রী মমতা বন্দ্যোপাধ্যায় আগেও ইডেনে হাজির হয়েছেন৷ এ বার ইডেনে সচিনের শেষ টেস্ট-ম্যাচের সাক্ষী হতেও মাঠে যাবেন তিনি৷ ঘনিষ্ঠমহলে তিনি জানিয়েছেন, ৯ নভেম্বর শনিবার টেস্টের চতুর্থ দিনে তিনি ইডেনে যাবেন৷ তবে ইডেন টেস্ট নিয়ে যে ভাবে শহরে উত্তেজনার পারদ চড়ছে, তাতে আজ টেস্টের সূচনাতেও কিছুক্ষণের জন্য ইডেনে চলে যেতে পারেন মুখ্যমন্ত্রী৷ মুখ্যমন্ত্রী গেলে একঝাঁক নেতা-মন্ত্রীও অবধারিত তাঁর সঙ্গী হবেন৷


মমতা বন্দ্যোপাধ্যায় ইডেন-মুখী হলেও প্রতিদ্বন্দ্বী বাম শিবিরের দুই শীর্ষ নেতা--বুদ্ধদেব ভট্টাচার্য ও বিমান বসু কিন্ত্ত টেলিভিশনেই সচিন-দর্শন করতে চান৷ মুখ্যমন্ত্রী থাকাকালীন বুদ্ধদেব ভট্টাচার্য একাধিক বার ইডেনে গিয়েছেন৷ ইডেনের মঞ্চে সচিনকে সংবর্ধনা দিচ্ছেন বুদ্ধদেব ভট্টাচার্য, এই দৃশ্যেরও সাক্ষী থেকেছে রাজ্য৷ কিন্ত্ত বিরোধী শিবিরে চলে যাওয়ার পর ইডেন-নন্দনের ধারেকাছে আর যাননি তিনি৷ এই টেস্টও বাড়িতে কিংবা আলিমুদ্দিন স্ট্রিটের দলীয় দপ্তরে বসে টিভিতেই দেখবেন লাইভ টেলিকাস্চ৷ টেস্টের সময় আমডাঙায় দলীয় সভা থাকলেও সচিনের ব্যাটিং টিভিতে দেখার জন্য মুখিয়ে আছেন সিপিএম রাজ্য সম্পাদক বিমান বসুও৷ তাঁর কথায়, 'মাঠে না গেলেও খেলা দেখা যায়৷ আমি টিভিতে খেলা দেখব৷ সচিনের জন্য আমার ভালোবাসা ও শুভেচ্ছা রইল৷' বুদ্ধ-বিমান টিভিতে খেলা দেখলেও মাঠে যাচ্ছেন রবীন দেব, মানস মুখোপাধ্যায় থেকে ঋতব্রত বন্দ্যোপাধ্যায়ের মতো একঝাঁক সিপিএম নেতা৷ মানসবাবুর কথায়, 'বুধবার টসের রেজাল্ট দেখে ঠিক করব কবে যাব৷' রবীন দেব আবার ঋতব্রতকে সঙ্গে নিয়ে ৭ তারিখ মাঠে যাওয়ার প্ল্যান করেই ফেলেছেন৷


স্রেফ সচিন যতক্ষণ মাঠে থাকবেন, ততক্ষণ যে ভাবেই হোক মাঠে হাজির থাকার পরিকল্পনা করেছেন রাজ্যের শিল্পমন্ত্রী পার্থ চট্টোপাধ্যায়৷ তাঁর কথায়, 'বুধবার ক্যাবিনেটের শিল্প-বিষয়ক স্ট্যান্ডিং কমিটির বৈঠক থাকলেও আমি খেলা শুরুর সময়ে মাঠে যাব৷ মাঠ থেকে ফিরে মিটিং করব৷ যে দিন সচিন ব্যাট করবে, সে দিন মাঠে থাকার ইচ্ছে আছে৷' ছটপুজো ও কলকাতা চলচ্চিত্র উত্‍সব নিয়ে প্রচণ্ড ব্যস্ত রাজ্যের আর এক মন্ত্রী অরূপ বিশ্বাস৷ কিন্ত্ত ঘনিষ্ঠদের ইতিমধ্যেই তিনি জানিয়ে রেখেছেন, সচিন যখন ব্যাট করতে নামবেন, তাঁকে যেন খবর দেওয়া হয়৷ যাতে দ্রুত মাঠে হাজির হওয়া যায়৷ অরূপবাবুর কথায়, 'ইচ্ছে আছে যতক্ষণ সচিন মাঠে থাকবে ততক্ষণ মাঠে থাকার৷' এই ইডেন-মুখী মন্ত্রীদের মধ্যে ব্যতিক্রম হতে পারেন অপর হাইপ্রোফাইল মন্ত্রী সুব্রত মুখোপাধ্যায়৷ তাঁর কথায়, 'মাঠে যাওয়ার খুব একটা ইচ্ছে নেই আমার৷' সুব্রত মুখোপাধ্যায়ের যখন মাঠে যাওয়ার ইচ্ছে নেই তখন ইডেনের টিকিট প্রত্যাশী বিধায়কদের টেলিফোন সামলাতে জেরবার হতে হচ্ছে বিধানসভার চিফ হুইপ শোভনদেব চট্টোপাধ্যায়কে৷ ইডেনে টেস্ট হলেই সিএবি থেকে বিধানসভায় বিধায়কদের জন্য টিকিট বিক্রির ব্যবস্থা থাকে৷ কখনও কখনও কমপ্লিমেন্টারি পাস দেওয়া হয়৷ এবার কমপ্লিমেন্টারি দেওয়া হচ্ছে না৷ এবার টানা চার দিন বিধানসভা বন্ধ থাকায় সিএবি থেকে টিকিট নেয়নি বিধানসভা কর্তৃপক্ষ৷ ফলে নিজে একদিন ইডেনে যাওয়ার পরিকল্পনা করলেও টিকিট-প্রত্যাশী বিধায়কদের আর্জি এখন সামলাতে হচ্ছে শোভনদেববাবুকে৷ তাঁর বক্তব্য, 'প্রতি বিধায়কের জন্য একটি করে টিকিট বরাদ্দ করলেও অন্তত ২৯৫টি টিকিট তুলতে হত৷ সিএবি-কে পুরো টাকা দিতে হত৷ কিন্ত্ত বিধানসভা খুলছে বুধবার খেলার দিন, ফলে সব টিকিট বিক্রি না হওয়ার আশঙ্কা থেকেই এবার টিকিট তোলা হয়নি৷'