ये राज्य यूँ ही चलेगा....
अपनी स्वास्थ संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए अपने क्षेत्र के सांसद महोदय तक पहुँचने के लिए आप भी किसी पहुँच वाले व्यक्ति से जुगाड़ लगवायें ! याद रहें हमारे सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं को चाक चौबंद करना इनकी जिम्मेदारी नहीं है ! इनकी कृपा रही तों निजी चिकित्सालय (दुकानें) फलती-फूलती रहेंगी !
सरकारी स्वास्थ व्यवस्थाओं को चाक चौबंद करना हमारे जनप्रतिनिधियों का काम तो बिल्कुल भी नहीं है, वे सरकारी व्यवस्थाओं को चाक चौबंद किये जाने के बजाय सरकार से किसी भी पीड़ीत व्यक्ति के इलाज के लिए निजी चिकित्सा की दूकान के मनमाने कोटेशन पर इलाज हेतु धनराशि दिये जाने के लिए सरकार को पत्र ही लिख सकते हैं ! एक लोकसभा सांसद से इससे ज्यादा और क्या उम्मीद की जा सकती है ?
यह हमारे कुमाऊं क्षेत्र का दुर्भाग्य कहें कि यहाँ पर मेडिकल कॉलेज के नाम एक उच्च चिकित्सा संस्थान भी है, जहाँ की व्यवस्थाएं पता नहीं कैसी है, वहाँ के डॉक्टर कितने योग्य हैं, वहाँ का प्रशासन कैसा है, जो मण्डल की जनता को यह विस्वास नहीं दिला पा रहा है कि उनके शहर में एक मेडिकल कॉलेज नाम की संस्था भी है जहाँ से भावी चिकित्सक तैयार किये जाते है ? पता नही यह मेडिकल कॉलेज कैसा है, जिस पर गली मोहल्ले के दड़बे जैसे कमरों में स्वास्थ सुविधा के नाम पर चलने वाले अलां-फलां रिसर्च इंस्टीट्यूट भारी पड़ जा रहें हैं !
धन्य हैं मेरे शहर की जनता भी जो अपनी जान और माल की कीमत पर सब कुछ सह जाती है, धन्य है वे तमगेदार समाजसेवी भी जो अपना रोजगार का काम धाम छोड़कर उनके लिए धनराशि की व्यवस्था करवाने को इस प्रकार के प्रयत्न भी कर लेते हैं l
क्षेत्र की जनता के लिए इससे बड़ी त्रासदी और क्या हो सकती है कि एक लोकसभा सांसद निजी अस्पताल को सरकारी धन दिये जाने की सिफारिस के लिए बिना सोचे समझें मुख्यमंत्री को पत्र भी लिख देते हैं ! हल्द्वानी का कृष्णा होस्पीटल ना हुआ एम्स से भी बड़ा अस्पताल हो गया ?
कुमाऊं के विभिन्न सरकारी अस्पतालों से सुविधाओं के अभाव में ना जाने कितने जगदीश रोज कृष्णा हॉस्पीटल जैसे चिकित्सा में मुनाफ़ा देख रही दुकानों को रेफर किये जाते हैं, उन निरीह और निर्बल जगदीशों के लिए पत्र कौन लिखेगा जो माननीय सांसद साहब तक नहीं पहुँच पाते हैं ?
समस्या को फौरी तौर पर निपटाने के बजाय इस समस्या की जड़ को मिटाया जाता तो मैं भी सच में सांसद साहब का गुणगान कर रहा होता ! काश, जगदीश का इलाज इन दड़बों में चलने वाले हॉस्पीटलों की बजाय देश के किसी उच्च सुविधाओं से सुसज्जित अस्पताल में निशुल्क हो पाता ?
पैसा मिलने के बाद क्या गारंटी कि जगदीश को ये ठीक कर देंगे ? जो इन निजी अस्पतालों को चाहिए वो मिल गया मरीज जाये भाड़ में, दुवा करें कभी आपको इस स्थिति से दो चार ना होना पड़े !










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